*खबरों में बीकानेर*
चुनाव : पर्दे के पीछे -
लाइमलाइट में आने समर्थन देने का यह माध्यम अच्छा है
- मोहन थानवी
चुनावी माहौल में अपने पसंदीदा नेता को समर्थन देना लोकतंत्र का एक हिस्सा कहा जा सकता है। लेकिन समर्थन देने के ऐसे ऐसे तरीके ईजाद किए जा रहे हैं कि दोनों पक्ष लाइन लाइट में भी आ जाएं। जैसे की विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के रूप में चर्चा दाखिल कर देना और फिर अपने किसी नेता के समर्थन देने की बात कहते हुए नामांकन वापस ले लेना।
पर्दे के पीछे हो रही समर्थन देने की ऐसी बातें बीते कुछ दिनों से बाहर आने को अकुलाती रही और अब दो ही दिन में पर्चा वापस लेने और समर्थन देने की 100 से अधिक खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इनमें एक ऐसी खबर भी है जो लगभग पूरे राज्य में खूब चटकारे लेकर सुनी सुनाई जा रही है।
दरअसल बीकानेर पश्चिम में मंत्री रहे कांग्रेस के कद्दावर प्रत्याशी के सम्मुख कांग्रेस के ही एक जाने पहचाने चेहरे ने आर एल पी प्रत्याशी के रूप में पर्चा भर दिया। दुर्योग से वह अस्वस्थ भी हुए और संयोग से उनके पास मुख्यमंत्री का फोन भी आ गया। बताया जा रहा है मुख्यमंत्री के फोन आने के बाद उन्होंने अपना पर्चा वापस ले लिया। ऐसे और भी दृष्टांत लोगों में सुने सुनाए जा रहे हैं।
इनमें से एक है मंत्री रहे कांग्रेस के प्रत्याशी के भाई द्वारा भाजपा के प्रत्याशी को खुला समर्थन देने की चर्चा। चुनावी समीकरणों में नित नए उलटफेर होने के चलते खाजूवाला से कांग्रेस प्रत्याशी गोविंदराम मेघवाल के बड़े भाई किशनलाल चौहान ने अपना समर्थन भाजपा प्रत्याशी डॉ. विश्वनाथ मेघवाल को देकर राजनीतिक हलकों को चौंक दिया है। वो भी तब जबकि चौहान भाजपा के सदस्य नहीं बने हैं। इसी प्रकार बीकानेर में एक और प्रत्याशी ने रालोपा प्रत्याशी को अपना समर्थन जाहिर किया।
यूं तो बुधवार तक करीब करीब 100 दाखिल बच्चे वापस लिए गए लेकिन गुरुवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि पर यह संख्या बढ़कर सामने आ गई। वैसे पर्दे के पीछे जानकार लोग कह तो यह भी रहे हैं कि इस तरह समर्थन लेने देने और पर्चे वापस लेने से समीकरण तो बनते बिगड़ते दिखे या ना दिखे लेकिन संबंधित प्रत्याशियों को लाइमलाइट में आने का यानी सोशल मीडिया में चमकने का एक सुलभ अवसर अवश्य मिल जाता है।








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