*खबरों में बीकानेर*
चुनाव : पर्दे के पीछे - हिम्मतवर और खफा नेताओं की नाम वापसी का इंतजार...! अब चंद घंटे और...
- मोहन थानवी
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के उम्मीदवारों के मार्ग में अब एक ऐसा मोड़ आ रहा है जिसे पार करने के बाद दल और उनके प्रत्याशी जीतने के लिए अपना पूरा ध्यान जनसंपर्क में लगा सकेंगे। फिलहाल तो राजनीतिक दलों पर अब जिम्मेदारी आ गई है कि वह अपने टिकट मिलने से वंचित असंतुष्ट नेताओं के द्वारा भरे गए नामांकन वापस करवाएं। पर्दे के पीछे लोग तो यह कहने से भी नहीं चूक रहे की कुछ ऐसे प्रत्याशियों को भी नाम वापसी के लिए राजी किया जा रहा है जो अपने समर्थकों के वोट काफी संख्या में रखते हैं । दरअसल, पर्चा दाखिल करने वाले ऐसे हिम्मतवरों पर भी दलीय प्रत्याशियों की नजर है। और ऐसे हिम्मतवर नाम वापस लेते हुए यह कहने से नहीं चूकते कि वह फलां फलां नेता के समर्थन में चुनावी मैदान से हट रहे हैं।
यूं देखा जाए तो दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस असंतुष्टों की गतिविधियों से अछूती नहीं रही। दोनों ही पार्टियों के कतिपय असंतुष्टों ने कहीं-कहीं निर्दलीय के रूप में तो कुछ जगह निर्दलीय और पार्टी नाम से भी नामांकन दाखिल कर दिए हैं। गुरुवार 9 नवंबर नाम वापसी की अंतिम तिथि है। भाजपा और कांग्रेस के पास अब मात्र कुछ घंटे ही शेष रहे हैं जिनका सदुपयोग कर वे अपने असंतुष्टों को संतुष्टि प्रदान करें और नाम वापस करवा के अपने अधिकृत प्रत्याशी को जीत की ओर अग्रसर करवाएं।
बहरहाल अंदरखाने से यह सुनाई दे रहा है की कतिपय असंतुष्टों को राजी करने के लिए पार्टियों की ओर से उनके सुनहरे भविष्य को दिखाया जा रहा है यानी उन्हें आश्वस्त किया जा रहा है कि पार्टी में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। जीत-हार के पश्चात उन पर बागी का ठप्पा भी नहीं लगेगा और वे पार्टी के निष्ठावान मान्य होंगे
सियासी हलकों के जानकर मान रहे हैं कि अधिकांश जगहों पर दोनों पार्टियों के असंतुष्ट प्रत्याशी संतुष्टि का जामा पहन लेंगे। लेकिन दो एक अपवाद भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के साथ-साथ असंतुष्ट साथी से भी चुनावी मैदान में टक्कर लेगा।
ऐसे में पूर्व में राजनीति के जानकारों द्वारा बताए गए त्रिकोणीय मुकाबले के आंकड़ों में कुछ परिवर्तन भी देखने को मिल सकता है। फिलवक्त तो वांछित विधानसभा क्षेत्रों से नाराजगी में पर्चे भरने वाले हिम्मतवर नेताओं और पार्टियों की टिकट-बांट नीति से खफा बागियों की नाम वापसी की घोषणाओं का इंतजार किया जा रहा है।








यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...