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सिर चढ़'र बोल्यो राजस्थानी रामलीला रो जादू
दूजी रात री लीला मांय राम - सीता जलम, ताड़का वध री लीला रो होयो मंचन
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सिर चढ़'र बोल्यो राजस्थानी रामलीला रो जादू
दूजी रात री लीला मांय राम - सीता जलम, ताड़का वध री लीला रो होयो मंचन
सूरतगढ
राजस्थानी भासा आंदोलन नै लेय'र लगोलग सातवें बरस खेलीजण लाग री राजस्थानी रामलीला रो जादू लोगां रै सिर चढ़'र बोल रैयो है । राजस्थानी रामलीला देखण सारू टाबरां री टोळ री टोळ , बुढा - बडेरा , लुगायां-पतायां ही नीं मोट्यार भी रामलीला देखण नै आ रैया है ।
दूजी रात री लीला मांय राम-सीता जलम , ताड़का , मारीच , सुबाहु आद राकसां रै उत्पात सूं दुखी विश्वामित्र राजा दशरथ सूं राम-लिछमण नै मांग'र ल्यावै। राकसणी ताड़का साथै केई भूतण्यां-पलीतण्यां रै साथै आवै अर होलनाक दरसाव सूं सगळां नै डराय'र दरसकां मांय खळबली मचा दीनी । पछै भगवान राम सगळां राकसां रो खात्मो करै।राजस्थानी झ्ंसाणियां कलाकार विकी नंदा डाकियो बण'र दरसकां नै घणा हंसाया।
इण रात री लीला मांय सिरै पावणै कै रूप मांय पैलड़ा पार्षद सुरेन्द्र सिंघ राठौड़ , बलराम विश्नोई , अनिल बिश्नोई , तेजपाल सिंघ , बाबूलाल सुथार , करणी सिंघ राठौड़ , जयवीर सिंध ,भगवान श्रीगणेश री आरती करी । पावणां घणी सबळाई सूं मायड़ भासा राजस्थानी री मानता रो पख राख्यो । इण ढाळै मायड़ भासा राजस्थानी मांय रामलीला मंचन री खुलै हिड़द दै सूं सरावणा करी ।
दुसरी रात री लीला रै संवादा री बानगी :-
दशरथ — मुनिराज घणकरीक उमर बीतगी।जुवानी पराई हुगी। बुढ़ापो बारैकर फिरण लागयो। पण अजै तांई औलाद रो मूं कोनी देखयो मै गुरुजी सूं जिकर करयो अर बां आप नें बुलावणै री रा' दी। बस इण सारू आप नें फोड़ा घालया है।
जनक — प्रजा अर दुखी...... मेरी प्रजा नें दु:ख, मेरी प्रजा गरीब है तो मेरै खनै अखूट भंडार है मेरी प्रजा ने किंणी दुसमण रो डर है तो मेरै खनै बलवान फोज है।
प्रजा रै ही वास्तै मिला में राज करूं हूं।
जो कीं भी करूं हूं प्रजा रै वास्तै करूं हूं।।
विश्वामित्र — अरे दुष्टों... अठै थानै थारी मौत लयाई है। हुणी थारै मारगै थप्पड़ करया थानै सौदाई है।। बधगया थारा हौसलां इतरा, आंखया पर चरबी आई है। चलया जाओ-चलया जाओ, ई में ई थारी भलाई है।
राम — पिताजी री आज्ञ्या मान'र, मुनिराज री चिंता दूर करसयां।म्हे ई बात खातर ई धनुष बाण उठायो है। गौ बिरामणा री रिछपाल रो म्हे संकल्प उठा यो है।। जिको गौ-बिरामण रो शत्रु है बो ई म्हारौ दुसमण है। बां दुसटा रा सिर उतारण नें, धनुष बाण सुरदरसण है।।
लिछमण — मा बापड़ी मरगी थारी उणरी माटी तो ठिकाणै लगा। अरे बेशर्म थारो ओ ई हो धरम तेरी मां री देही कुता री शिकार है।। तूं लागै है जीवणै सूं बेकार है।
दूसरी रात री लीला रा कलाकार :-
राम - मनोज सुथार ,लिछमण - प्रदीप बाजीगर ,दशरथ - अमित कल्याणा ,वशिष्ठ - इमरान , दशरथ मंत्री - यश कल्याणा , द्वारपाल - रामानंद बिशनोई ,श्रृंगी रीसी - तपेश ,
जनक - संजय बिश्नोई , प्रजाजण - विकी नंदा , विशाल वर्मा , कुलदीप स्वामी , सुबाहू - सुजीत , मारीच - यश वर्मा ,
विश्वामित्र - राजकमल , ताड़का - विशाल वर्मा , सोनू नायक , राजू भार्गव , ईसू छींपा ,राक्स - पुनित , तपेश, इमरान ,शिकार –कमल वर्मा , राहुल ,डाकियो - विकी नंदा
आं कलाकारां आपरी कला दिखाई अर दरसकां घणी सरावणा करी।
लीला रै संयोजन मांय ओम साबणिया , मनोज कुमार स्वामी , अमरीश जंवरिया , नीलम छींपा रो सैयोग रैयो। बठेई लीला नें जै जै राजस्थान री टीम लाईव प्रसारण लंदन सूं करण लाग रैया है । सूरतगढ सूं इण तकनीकी काम नें हरीश कुमार , अशोक कुमार , राहुल सिंवर सम्हाळ राख्यो है।
C P MEDIA
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