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बलिदानी गो भक्तों को हमेशा याद रखा जाएगा
बीकानेर गोशाला संघ, मां भारती सेवा प्रन्यास, राष्ट्रीय गाय आंदोलन राजस्थान, भारतीय जन स्वाभिमान मंच व सनातन धर्म प्रचारिणी सभा के तत्वाधान में बलिदान हुए गो भक्तों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया
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बलिदानी गो भक्तों को हमेशा याद रखा जाएगा
बीकानेर गोशाला संघ, मां भारती सेवा प्रन्यास, राष्ट्रीय गाय आंदोलन राजस्थान, भारतीय जन स्वाभिमान मंच व सनातन धर्म प्रचारिणी सभा के तत्वाधान में बलिदान हुए गो भक्तों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया
*बीकानेर गोशाला संघ*
तुलसी सर्किल बीकानेर
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दिनांक-07.11.2020
*गो भक्त बलिदान दिवस श्रद्धांजलि सभा ७ नवम्बर 2020*
बीकानेर गोशाला संघ, मां भारती सेवा प्रन्यास, राष्ट्रीय गाय आंदोलन राजस्थान, भारतीय जन स्वाभिमान मंच व सनातन धर्म प्रचारिणी सभा के तत्वाधान में 7 नवंबर 1966 को बलिदान हुए गो भक्तों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन संस्था कार्यालय पर किया गया।
इस *श्रद्धांजलि व संकल्प सभा का आयोजन* पर गो वंदना ,गणेश वंदना के साथ श्रद्धांजलि सभा प्रारंभ हुई इस अवसर पर संगठन के
*अध्यक्ष सूरजमाल सिंह नीमराणा* ने बताया कि 7 नवम्बर 1966 के आंदोलन मे प्रमुख संतों- यथा *श्री करपात्री जी महाराज, श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी महाराज, सरदार श्री जगजीत सिंह जी, श्री राम चंद्र वीर जी, श्री अटल बिहारी वाजपेयीजी, भाई जी श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार, शंकराचार्य निरंजन देवजी, सदाशिव गोलवलकर जी, जैन संत सुशील मुनी जी, श्री राम शरण दास जी, श्री प्रकाश वीर शास्त्री जी* आदि आदि गो भक्तो ने संपूर्ण गो हत्या बंदी आंदोलन के अभियान का नेतृत्व किया।
उस समय दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार थी और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी शांतिपूर्वक चलने वाले आंदोलन को कुचलने के लिए इंदिरा गांधी ने गौ भक्तों पर गोलियां बरसाई एक अनुमान के अनुसार लगभग 5000 गो भक्त कालकलवित्त हुए, गौ माता के हित बलिदान हुए, इतना बड़ा नरसंहार जलियांवाला बाग में भी नहीं हुआ था, जो तत्कालीन स्वतंत्र भारत की हमारी सरकार ने करके दिखा दिया।
बड़ा दुर्भाग्य है उस नरसंहार की सूचना किसी भी अखबार में हेड लाइन नहीं बनी, क्योंकि उस समय केंद्र में कांग्रेस की हिंदू विरोधी सरकार थी, गाय विरोधी सरकार थी, आज उसी विचार को लेकर हमारे गाय विरोधी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, गौशालाओं के साथ दुर्भावना रखते हुए गौशालाओं को मिलने वाला अनुदान भी बंद करने की चेष्टा कर रहे हैं। गौशालाओ को रुला रुला कर अनुदान देने की सिफारिश कर रहे हैं, क्योंकि जिस पार्टी के अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं उस पार्टी की विचारधारा ही गो विरोधी रही है, चाहे नेहरू, इंदिरा और राजीव हो कोई भी प्रधानमंत्री रहा, वह गो विरोधी रहा जो लोग गाय का समर्थन करना चाहते थे उनको कांग्रेस ने हटा दिया।
आज बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो गाय का घोर विरोधी है, यदि मुख्यमंत्री चाहे भी तो अपनी पार्टी की विचारधारा को नहीं बदल सकता।
आज हम सब को संकल्प लेना चाहिए ऐसी गो विरोधी सरकारे सत्ता में ना आए ऐसा प्रबंधन आम भारतीय सनातनी को करना चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए *आयोजन के संयोजक अरविंद उभा* ने कहा कि वर्तमान सरकार गाय, संत, और सनातन धर्म की घोर विरोधी हैं, कांग्रेस को जब भी मौका मिला उसने सनातन धर्म का कड़ा विरोध किया, और उसका समर्थन करने वाले पत्रकार हो, संतो हो ,महंत हो राजनेता हो, उनको प्रताड़ित किया, उन्हें जेल में डालने की धमकी दी और जेल में डाल भी दिया, ऐसे हिंदू धर्म विरोधी लोगों को हमेशा हम सब को कड़ा विरोध करना चाहिए ।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए *आयोजन के सह संयोजक गोपाल सिंह नाथावत* ने कहा कि गो भक्तो के बलिदान को अकार्थ नहीं जाने देना चाहिए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि जब दी जाएगी जब पूरे भारतवर्ष में गोहत्या बंदी हो जाएगी,
वर्तमान केंद्र सरकार भी गोहत्या बंदी करने के पक्ष में नहीं है, तो अब हम किस पर विश्वास करें। सनातन धर्म व गाय की कोई भी सरकार नहीं है। हम सबको मिलकर गायवादि, सनातन धर्म वाली सरकार को चुनना है, भविष्य में इसका ध्यान रखें ।
भारतीय जन स्वाभिमान मंच के *अध्यक्ष शीशपाल गिरी गोस्वामी* ने कहा कि भारत सरकार को अतिशीघ्र संपूर्ण गोहत्या बंदी कानून लाना चाहिए ताकि 1966 के गौ भक्तों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके।
*राष्ट्रीय गाय आंदोलन के चांदवीर सिंह ने बताया कि हमारा गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने, गाय को कैटल श्रेणी से बाहर निकालने के अभियान के तहत आज 7 नवंबर से गोपा अष्टमी 22 नवंबर 2020 राजस्थान के प्रत्येक गो भक्त से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखवाने की चेष्टा की जाएगी।*
आज की श्रद्धांजलि सभा में 1966 की गौ भक्तों के चित्र पर *फूलों से और 2 मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गई।*
इस अवसर पर सनातन धर्म प्रचारिणी सभा के *प्रेम सिंह राठौड़* ने *प्रोफेसर रामरंग और श्री विश्वभंर सहाय प्रेमी जी* का *7 नवम्बर का आंखों देखा हाल* पढ़ कर सुनाया जाए।
श्रद्धांजलि सभा में गो अभयारण्य समिति के *पार्षद अनूप गहलोत* ने कहा कि *भारत सरकार को 7 नवंबर को गो भक्त बलिदान दिवस के रूप में घोषित करना चाहिए* इसके लिए संगठन अति शीघ्र एक अभियान चलाएगा, इसमें 7 नवंबर को गो भक्त बलिदान दिवस के रूप में घोषित करवाने की चेष्टा की जाएगी।
माँ भारती सेवा प्रन्यास के *विष्णु सिंह राजपुरोहित ने अपने ** वक्तव्य रखें जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में पूर्ण गौरक्षा कैसे हो इसका सुझाव दीया।*
👉संकल्प लें कि हम हर माह 500-1000 या ज्यादा का *पंचगव्यों से बने पदार्थो, नवग्रह धूप, गोनाईल, अर्क, घनवटी और कीट नियंत्रक* आदि लेंगे।
👉हम गौ का *प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पालन* करने, का खर्च किसी *गोपालक या गौशाला* को दें।
👉समर्थ *गौशालाओं में बैल चालित उपकरण, गोबर से लकड़ी, गोमुत्र से अर्क बनाने की मशीन* दें।
श्रद्धांजलि सभा का समापन ,गौ माता की जय के उद्घोष व ओम का उच्चारण कर अगले वर्ष विशाल रूप से मनाने का संकल्प लेकर किया गया।
आज की श्रद्धांजलि सभा में उमाशंकर सोलंकी, ए0 सुनील आचार्य, राम कुमार सोलंकी, अशोक कुमार ,मनोज स्वामी, अश्विनी बरेनिया, अंबासर गोशाला के सरवन सिंह राठौड़, बैरीसालसिंह, विशाल सिंह, रघुनाथ सिंह, रविराज सिंह नीमराना आदि ने भाग लिया
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