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कपिल सरोवर का पानी हिला मगर फीका-फीका रहा श्रीकोलायतजी का मेला, आस्था की डुबकी लगाते साधू संत दिखे न पहुंचे श्रद्धालु
श्रीकोलायतजी । कार्तिक
पूर्णिमा के मौके पर इस बार तीर्थनगरी
श्रीकोलायत में भरने वाले मेले की रंगत
फीकी रही। हर साल इस मौके जहां घाटों
पर श्रद्धालुओं को पैर रखने को जगह नहीं
मिलती थी, वहां आज सिर्फ पुलिसकर्मी ही
नजर आये। जानकारी में रहे कि
श्रीकोलायत के कपिल सरोवर में कार्तिक
पूर्णिमा के दिन हर साल करीब दो लाख
लोग डुबकी लगाते हैं लेकिन कोरोना
वायरस के चलते इस मेले में सोमवार को
इक्का दुक्का लोग भी नजर नहीं आये। सांय
दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि की तपोस्थली
पर न सिर्फ बीकानेर संभाग के बल्कि
देशभर से लोग आते हैं। हजारों की संया
साधु संत भी देश-विदेश से आते हैं लेकिन
इस बार सोमवार दोपहर तक मंदिर और
तालाब दोनों ही सूने नजर आये। इस मेले
से एक महीने पहले ही यहां हाट बाजार शुरू
हो जाता है। सैकड़ों की सं या में दुकानें
लगती है, जिसमें ग्रामीणों के लिए घरेलु
सामान के साथ ही पशुओं के लिए कई तरह
के सामान सस्ती दर पर मिल जाते हैं। क्षेत्र
की इकोनॉमी के लिए यह मेला काफी
महत्व रखता है। इसी मेले के कारण यहां
कई होटल्स भी खुल गए लेकिन इस बार
कहीं भी कोई नजर नहीं आया।
हर साल होता है
विशेष पूजन श्रीकोलायत के कपिल सरोवर में बने
सभी 52 घाटों पर कार्तिका पूर्णिमा के मौके
पर विशेष पूजन होता है। हर घाट पर लोग
एक एक बार स्नान करते हैं। लाखों की सं या
आने वाले लोग कपिल मुनि मंदिर में दर्शन
के साथ ही देश-विदेश से आने वाले साधू-
संतों के साथ संवाद भी करते हैं। मेले से कई
दिन पहले ही नेपाल, मॉरिशस के अलावा
भारत के मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश,
उाराखंड सहित कई राज्यों से साधु सां य
दर्शन प्रणेता के मंदिर में आते हैं। बड़ी सं या
में नागा साधु भी यहां नजर आते हैं और ह
तों तक धुणी रमाते हुए तपस्या करते हैं।
इनकी सेवा में श्रीकोलायत के साथ ही
आसपास के गांवों के लोग जुट जाते हैं। मगर
इस बार रंगत फीकी रहने के कारण
श्रद्धालूओं को निराशा का सामना करना पड़ा।
सर्दी की 'आधिकारिक घोषणाÓ
है श्रीकोलायत मेला
बीकानेर में सर्दी का आगमन कार्तिक
पूर्णिमा मेले के दिन से होता है। यह मान्यता
रही है कि इस मेले में आने वाले लोग तालाब
में स्नान करते हैं तो इससे हिलने वाला पानी
पूरे बीकानेर को सर्दी की गिऱत में ला देता
है। आमतौर पर इसी
दिन से लोग कहने
लगते हैं 'कोलायत रो
पोणी छिडग्यो, अबै
सर्दी आयगीÓ अर्थात
हजारों लोगों के स्नान से
कपिल सरोवर का पानी
हिल गया। अब सर्दी
आ चुकी है। आधुनिक
तर्कों में देखे तो यह
सही भी है। कार्तिक
मास का अंतिम दिन।
अब हिंदू कैलेंडर में
माघ का महीना आएगा
जिसमें सर्दी पड़ती है।
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