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🙏 मोहन थानवी 🙏
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
नहीं रहे ग्रामीण पत्रकारिता के
भीष्म पितामह खींवराज शर्मा
अस्वस्थता के बाद महाप्रयाण, युगपक्ष परिवार सहित समूचा अंचल शोक से मर्माहत
बीकानेर (कासं)। दैनिक
युगपक्ष परिवार के वरिष्ठ सदस्य और
वरिष्ठ पत्रकार कोलायत निवासी
खींवराज जी शर्मा का असामयिक निधन
हो गया । समूचे उत्तर पश्चिम राजस्थान में
'नेताजी के नाम से मशहूर स्व. शर्मा
83 वर्ष के थे । वे अपने पीछे पत्नी, दो
पुत्रों, दो पुत्रियों सहित भरापूरा परिवार
छोड़ गये हैं। गत कुछ समय से अस्वस्थ
चल रहे नेताजी की पार्थिव देह का
अंतिम संस्कार गमगीन माहौल में किया
गया । सोशल डिस्टेंसिंग की सरकारी
एडवाईजरी एवं परिवारजनों की अपील
के बावजूद बड़ी तादाद में शोक विह्वल
जन उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब
की तरह उमड़ पड़े। खरे-निर्भीक और दबंग पत्रकार
'युगपक्ष की शुरुआत से जुड़े नेताजी
सदैव सत्य और सटीक खबरो को
आमजन के हितों के लिए उठाते रहे ।
श्रीकोलायत अंचल सहित समूचे उत्तर
पश्चिम राजस्थान के पत्रकारिता जगत में
उनकी अलग पहचान थी । खरी बात मुंह
पर कहने वाले निर्भीक पत्रकार रहे स्व.
शर्मा ने कोलायत इलाके की समस्याओं
को प्रमुखता से उठाते हुए उनका
निराकरण करवाया । राजनीतिक दलो
की गतिविधियों पर भी उनकी पैनी नजर
रहती थी। युगपक्ष के लिए उन्होंने
राजस्थान विधानसभा में भी रिपोर्टिंग
की। वे युगपक्ष के आधारस्तंभों में से
एक थे और एक तरह से इस परिवार के
वरिष्ठ संरक्षक थे। स्व. खींवराजजी शर्मा
नेताजी के निधन की खबर से समूचे
इलाके मे शोक की लहर छा गयी ।
अनेक राजनीतिज्ञों, अधिकारियों, मीडिया
जगत के लोगों ने शोक संतप्त नेताजी के
सुपुत्रों राजेन्द्र व्यास, गोकुल शर्मा तथा
अन्य परिजनों को संवेदना प्रकट की।
सत्य-ईमानदारी के लिए किसी भी
हद तक जाने को रहते थे तैयार
स्व. खींवराजजी शर्मा (नेताजी) सच्चाई और ईमानदारी के लिए कभी
परिणाम की चिंता नहीं करते थे। सच्चाई व ईमानदारी के पीछे वे किसी हद तक
जाने को तैयार रहते थे। आपकेा बता दें कि पत्रकारिता में आने से पूर्व उन्होंने
गजनेर पैलेस होटल में पोस्टमास्टर (1965-66), खादी मंदिर में सेवाएं दीं,
इसके बाद कुछ समय राशनडिपो संचालित किया बीकानेर में (1967-69),
कुछ समय बीकानेर जिला कलेक्ट्रेट में एलडीसी भी रहे लेकिन हर जगह बेईमानी
के खिलाफ आवाज़ बुलंद की और खुद ही उस काजल की कोठरी से अलग भी
बेदाग हुए। राजनैतिक जीवन में उन्होंने 1969 में प्रवेश किया उस समय की
समाजवादी पार्टी, जनता पार्टी में मानिकचंद जी सुराना के साथ उन्होंने गांव गांव
घूमकर नई पार्टी की जड़ें जमाईं। स्व. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद
1983 में वे काँग्रेस पार्टी में आ गए और फिर जीवन पर्यंत इसी पार्टी के रहे।
कोलायत में काँग्रेस पार्टी का पर्याय नेताजी ही माने जाते रहे, कई पदों को उन्होंने
पूर्ण कुशलता और सच्चाई ईमानदारी के साथ सुशोभित किया।
----------------------------लगातार
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