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नई दिल्ली। चीन के सुप्रीम लीडर शी जिनपिंग का आक्रामक रुख उन्हें भारी पड़ सकता
है। वे इसके जरिए भले ही यह संकेत देना चाह रहे
हों कि कोरोना वायरस के चलते बाद चीन को
आर्थिक और कूटनीतिक तौर पर कोई झटका नहीं
लगा है। मगर जिस तरह भारत समेत अन्य देशों ने
चीन का प्रतिकार किया है, जिनपिंग का यह इरादा
फेल भी हो सकता है। अपनी पार्टी या सरकारी
मशीनरी पर शी का कंट्रोल वैसे ही बरकरार है।
लेकिन कभी हर चीज के चेयरमैन कहे जाने वाले
जिनपिंग की रतार बहुत धीमी हो चली है।
2015-16 में आथिüक सुस्ती के बावजूद वह
अपनी सत्ता आसानी से बचा ले गए थे, हालांकि
अब चुनौती बड़ी और ग्लोबल है। चीन एक बार
फिर आर्थिक गिरावट झेल रहा है। पश्चिमी देशों का
मूड उसके खिलाफ हो गया है, इनमें से कई तो ऐसे
हैं जिनके चीन के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं। विदेशी
जाकर काम, पढ़ाई या घूमने वाले रईस चीनियों को
भी इस बात का एहसास हो चुका है। बेल्ट एंड रोड
इनिशिएटिव नेटवर्क इसीलिए बनाया गया था ताकि
चीन के राजनीतिक हित साधे जा सकें और दूसरे
देशों पर आथिüक निर्भरता कम हो सके। इस
प्रोजेक्ट को बड़ा झटका लगा है। कई देश कर्ज को
रीशेड्यूल करने की भी मांग कर रहे हैं। चीन ने हफ्तों
तक कोविड-19 की बात छिपाई, इससे भी इस
पहल पर नकरात्मक असर हुआ है। अपाचे हेलिकॉप्टर
फॉरवर्ड बेस पर अपाचे हेलिकॉप्टर भी ऑपरेशन
करते दिखाई दिए। ये युद्धक हेलिकॉप्टर अमेरिकी
कंपनी बोइंग ने बनाए हैं। इसका कुल वजन 6838
किलोग्राम के आसपास होता है। ये अधिकतम
279 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर
सकते हैं। इसमें दो टर्बोशाफ्ट इ्ंजन होते हैं जो
इसमें एयर टु एयर मिसाइलें, रॉकेट और गन की
क्षमता होती है। इसकी ऊंचाई लगभग 15.24 फीट
होती है और पंख 17.15 फीट तक फैले होते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कल जवानों की हौसला
आफजाई और चीन को कड़ा संदेश देने के लिए
लेह पहुंचे थे। उन्होंने घायल जवानों से मुलाकात के
दौरान कहा कि भारत न किसी के सामने झुका है
और न ही झुकेगा। पीएम मोदी ने चीन की
विस्तारवादी नीति को लेकर उसे जमकर लताड़
लगाई जिसके बाद बौखलाहट में चीन भी जवाब
देने लगा। मिग-29 का भी ऑपरेशन
चीन सीमा पर मिग-29 विमान भी ऑपरेशान में
शामिल हैं। गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद
भारत हर चुनौती के लिए तैयार है। इस झड़प में 20
जवान शहीद हो गए थे और बड़ी सं-
या में चीनी
जवान भी मारे गए थे। चीन अकसर सीमाओं को
लांघने की कोशिश करता रहता है। हालांकि भारतीय
जवान उनकी हर कोशिश नाकाम करने में कसर
नहीं छोड़ते। पाटीü के वफादार रहे हैं शी जिनपिंग
शी जिनपिंग ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो पूरी
तरह से पार्टी के प्रति समर्पित है। उनका मकसद
कयुनिस्ट पार्टी के हाथों में चीन की सत्ता रखना
है। पार्टी ने जिस तरह से आर्थिक विकास किया है
और शी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जैसा अभियान
चलाया, उससे इस मकसद को और बल मिला। शी
ने अपने कई दुश्मनों को करप्शन कैंपेन में निपटा
दिया। आक्रामकता कहीं चीन को ले न डूबे
चीन ने हाल ही में जो आक्रामक रुख अपनाया,
उसका मकसद अपने पड़ोसियों को याद दिलाना था
कि वे दोयम दर्जे पर हैं। हालांकि शी जिनपिंग का
यह दांव ठीक नहीं बैठा। लाइन ऑफ एक्चुअल
कंट्रोल पर चीन ने जब घुसपैठ की भारत ने उसका
करारा जवाब दिया। यह साफ हो गया कि बात आगे
बढ़ जाएगी, भारत इस डर से चुप नहीं बैठेगा। दूसरी
तरफ, ऑस्ट्रेलिया ने भी इम्पोर्ट बंद करने की चीन
की धमकी को नजरअंदाज करते हुए चीनी सैनिकों
के आने पर रोक लगा दी है। दक्षिण चीन सागर में
जापान और दक्षिण एशियाई देश चीन के आगे गुट
बनाए खड़े हैं और उससे समुद्र के नियमों का
पालन करने को कह रहे हैं।
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