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बीकानेर 7 मई 2020
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विनम्रता ही महानता की ओर ले जाती है
विनम्रता की प्रतिमूर्ति थे रवींद्रनाथ टैगोर - कामिनी भोजक
बीकानेर 7 मई- भारत ही नही सम्पूर्ण विश्व के महान दार्शनिक कवि,संत, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की आज 159 वी जयंती पर कल्याण फाउंडेशन ऑफ इंडिया के कार्यालय में स्मरण सभा वीडियो कॉल केजरिये आयोजित की गई |
फाउंडेशन की निदेशक कामिनी भोजक ने तैलचित्र पर पुष्पहार अर्पित करते हुए कहा कि नोबेल पुरस्कार प्राप्त गुरुदेव रवींद्रनाथ भारत को वो महान विरासत देकर अमर हुए है जो कि भारत वर्ष का एक अभिन्न हिस्सा है भारत वर्ष की पहचान है|कामिनी भोजक ने कहा कि रवींद्रनाथ एकमात्र भारतीय साहित्यकार है जिनको नोबेल पुरस्कार मिला इतना ही नही वे अकेले ऐसे कवि है जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान है| भारत का राष्ट्रगान "जन गण मन"और बांग्लादेश के राष्ट्रगान "आमार सोनार बांग्ला" उनकी कालजाई रचना है जिनको राष्ट्रगान बनाया गया है| रवींद्रनाथ ने ही विनम्रता का मंत्र दिया और कहा कि अगर आप चाहते है कि आपके बाद भी दुनिया आपको याद रखे आपको महानता के लिए जाना जाए तो सबसे पहले आपको अति विनम्र होना होगा क्योंकि विनम्रता ही महानता की राह खोलती है
आज जरूरत है कि हम प्रखर राष्ट्रवादी टेगौर के साहित्य को बालको को पढ़ने को दे ताकि वे उनसे कुछ सिख सके|
फाउंडेशन के सचिव आर.के.शर्मा ने पुष्पांजलि करते हुए कहा की रवींद्रनाथ भारत के उन व्यक्तियों में शुमार है जिनकी बदौलत उनके देश की पहचान है और ऐसे महान संत को हर युवा को पढ़ना चाहिए
प्रवक्ता नितिन वत्सस ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि एक शांत और श्रेष्ठ कवि होने के साथ रवींद्रनाथ की रचनाओं को जब आप पढ़ेंगे तो पाएंगे कि जीवन जीने की कला और दुखों से निकलने का सार उनमें मिलता है
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी श्रीलाल सेवग ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ भारत के सच्चे सपूत थे अंग्रेजी दासता से भारत को आजाद करवाने के लिए उन्होंने अपनी रचनाओं से अलख जगाने का कार्य किया
वरिष्ठ समाजसेवी सत्यदेव शर्मा,गणेशदास स्वामी,दुर्गादत्त भोजक,विक्रम सिंह राठौड़, श्रीमती सरोज देवी, कर्मचारी नेता पुरषोत्तम सेवक,कन्हैयालाल सेवग,गोपाल सुथार,श्रीमती मंजू, सतीश शर्मा, जितेंद्र भोजक, श्रीमती स्वेता, खुश,पुलकित, सुश्री मानवी, रेखा देवड़ा,आदि ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए महापुरषो के जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
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