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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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भयावह वो 2-3 दिसंबर की रात ये 6-7 मई की रात
डरा रहा विशाखापत्तनम, खतरनाक था भोपाल गैस कांड
बुधवार-गुरुवार की बीतती रात विशाखापत्तनम में एक फैक्ट्री में जहरीली गैस के रिसाव से दोपहर तक 8 लोगों की मौत की खबरें आ रही हैं। जबकि 5000 से ज्यादा बीमार हो चुके हैं। इस हादसे से करीब 36 वर्ष पूर्व भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 को हुई गैस त्रासदी की यादें आज भी सिहरा देती हैं, जिसमें हजारों जानें गई थीं। सरकारी आंकड़े ही 3787 मौतों की बात करते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 7मई गुरूवार तड़के आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में लोगों की नींद एक अजीब दुर्गंध के साथ यकायक खुल गई । लोगों के लिए सांस लेना तक दूभर होने लगा। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले 1 बच्चे समेत 3 लोगों की मौत की दुखभरी खबर आ गई । ऐसा हादसा एक केमिकल फैक्ट्री में जहरीली गैस की रिसाव के चलते हुआ। ये पंक्तियां लिखे जाने तक इस दुर्घटना में 8 लोगों की जान जा चुकी है और 5 हजार से ज्यादा के बीमार होने के समाचार हैं।
नवभारत टाइम्स के अनुसार
एलजी पॉलीमर इंडस्ट्री में करीब ढ़ाई बजे जहरीली रासायनिक गैस का रिसाव शुरू हुआ। नायडूथोटा के आरआर वेंकटपुरम इलाके में जहां यह फैक्ट्री स्थित है, उसके आस-पास के करीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में लोग सड़कों पर बेहोश होकर गिरने लगे, आंखें जलने लगीं और कुछ लोगों को शरीर पर छाले पड़ने की समस्या भी हुई। आनन-फानन में प्रशासन ने 5 गांवों को खाली करा लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा, लेकिन तब तक कम से कम 5 लोग जहरीली गैस से काल के गाल में समा चुके थे। प्रशासन की ओर से इलाके में राहत का काम जारी है। स्थानीय पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और लोगों को प्रभावित इलाके से दूर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रही है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर जल्द नियंत्रण की उम्मीद है, लेकिन पहले ही कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से परेशान लोगों पर इसका असर कब तक बना रहेगा, यह बताना मुश्किल है।
यूनियन कार्बाइड दुर्घटना की यादें हुईं ताजा
विशाखापत्तनम में जहरीली गैस के रिसाव की इस घटना ने करीब 36 साल पहले हुई ऐसी ही एक दुर्घटना की यादें ताजा कर दीं। विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में शामिल यह हादसा साल 1984 में 2 दिसंबर की रात को हुआ था। विशाखापत्तनम की ही तरह भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था जिसका असर आज भी वहां के लोगों पर स्पष्ट देखा जा सकता है। हालांकि, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में हुआ हादसा विशाखापत्तनम में हुए हादसे से कहीं ज्यादा डराने वाली और घातक थी।
अब भी मौजूद है गैस हादसे का असर
2-3 दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को यूनियन कार्बाइड की फर्टिलाइजर फैक्ट्री से जहरीले गैस का रिसाव शुरू हुआ और पूरे शहर में बादल की तरह छा गया। तब लोग सो रहे थे और कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जिनकी जानें बच गईं, उनके फेफड़े कमजोर पड़ गए और आखें खराब हो गईं। इनमें से कई की तो सुधबुध चली गई और वो मनोरोगी हो गए। मिथाइल आइसोसाइनाइड के रिसाव से करीब 3,000 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 1.02 लाख लोग प्रभावित हुए थे। मौत का वास्तविक आंकड़ा 15 हजार से ज्यादा था, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 3787 मौतें ही दर्ज हैं। इस हादसे से प्रभावित लोग अब भी कैंसर, ट्यूमर, सांस और फेफड़ों की समस्या जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं।
साभार NBT नवभारत टाइम्स
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