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बीकानेर। वैशाख शुक्ल सप्तमी को गंगा
सप्तमी पर्व मनाया गया। कोरोना लॉक डाउन
के कारण बीकानेर के गंगा मंदिरों में छोटेबडे स्तर
पर कोई आयोजन नहीं हुए। कहीं कहीं केवल औपचारिक तो कहीं सांकेतिक
रूप से पूजन किया गया। धार्मिक मान्यताओं
के अनुसार आज के ही दिन ब्रह्मा के
कमंडल से मां गंगा की उत्पत्ति हुई थी और
भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर गंगा शिव की
जटाओं में समाई थी। तभी से गंगा सप्तमी का
पर्व चला आ रहा है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा
स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता
है। मान्यता यह है कि गंगा सप्तमी के दिन
किए गये गंगा स्नान से व्यक्ति के सभी पाप
नाश नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति
होती है। परन्तु इस बार कोरोना के कारण
ऐसा नहीं हुआ। लोगों ने गंगाजल डाल कर
घरों में ही स्नान किया। शहर में नत्थूसर गेट
के बाहर स्थित कपिल मुनि मंदिर, नया कुआं
स्थित गंगा मंदिर, मरुनायक चौक स्थित गंगा
माता मंदिर, गोगागेट के घूमचक्कर स्थित गंगा
माता मंदिर, रथखाना स्थित गंगामैया जी के मंदिरों में बंद पटों के पीछे ही आयोजन हुए। पुजारी ने दोपहर 12 बजे
बाद गंगा मैया की आरती की । इन संक्षिप्त
आयोजनों में केवल पुजारी शामिल हुए।
मंदिरों में श्रद्धालु उपस्थित नहीं हुए। इससे
पहले कथा का वाचन की रस्म अदायगी की
गई। वहीं अक्षय तृतीया के बाद गंगा सप्तमी
पर घरों में खीचड़ा और इमलाणी बनाकर
गंगामैया के भोग लगाया गया। जो श्रद्धालु
गंगा सप्तमी के दिन हरिद्वार-ऋषिकेश जाकर
स्नान करते थे वे इस बार कोरोना के कारण
नहीं जा पाए। आज के दिन बड़ी तादाद में
श्रद्धालु कपिल सरोवर में स्नान कर गंगा मैया
के दर्शन करते है, वो नहीं हो पाया।
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