✒️खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
📰
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
🙏
twitter, Podcast, YouTube, साहित्य-सभागार के साथ-साथ Facebook, Pinterest, LinkedIn और Instagram पर भी आपकी खबरें Khabron Me Bikaner 🎤
🇮🇳
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
साभार युगपक्ष
📒 📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓
📰
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
चीन ने दुनिया के बाजार से एन-95 मास्क, ग्लव्स,
गॉगल पर किया कब्जा, अब मांग रहा पैसा
पेइचिंग। कोरोना महासंकट से दुनिया की
आधी आबादी जूझ रही है। इस महामारी की चपेट में
आकर अब तक 82 हजार ज्यादा लोग मारे जा चुके
हैं और 14 लाख लोग इससे संक्रमित हैं। कोरोना
महामारी की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी
और उसकी भूमिका को लेकर विश्वभर में संदेह के
बादल उमड़ रहे हैं। इस बीच कोरोना महासंकट में
चीन की भूमिका को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।
अमेरिकी अखबार थीपोचटाइस की रिपोर्ट के
मुताबिक चीन ने कोरोना संकट शुरू होने पर
दुनियाभर के बाजार से एन-95, मेडिकल प्रॉटेिटव
सूट, गॉगल्स, कीटाणुनाशक, सर्जिकल ग्लव्स,
ऑसीजन मशीन और मेडिकल वेंटिलेटर को दान के
बहाने या पैसा देकर खरीद लिया। ये सभी चीजें
कोरोना के मरीजों के इलाज और डॉटरों तथा
पैरामेडिकल स्टाफ के लिए बेहद जरूरी हैं। रिपोर्ट के
मुताबिक जनवरी महीने में किलर कोरोना वायरस के
संक्रमण बढऩे पर चीन के अधिकारियों ने विश्वभर के
बाजारों से अरबों मास्क और सैकड़ों टन मेडिकल
उपकरण खरीद लिए थे। वह भी तब जब चीन खुद
ही इन सामानों का बड़ा उत्पादक देश है। यही नहीं
चीन दिसंबर तक इन उपकरणों का निर्यात करने वाले
चीन ने जनवरी में महामारी के बढऩे पर इन उपकरणों
का निर्यात बंद कर दिया। चीन की इस बड़ी साजिश
में चीन की कंपनियां और संगठन पूरी तरह से शामिल
रहे। इन कंपनियों ने अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और
अन्य देशों से सारे सामान को खरीदकर चीन भेज
दिया। कई चीनी कंपनियों ने मास्क जैसे जरूरी चीजें
बनाने वाली वैश्विक कंपनियों से कहा कि वे या तो
उन्हें अपने सामान बेच दें या इस महाआपदा से बचाव
के लिए दान कर दें। चीन की इस चाल के बाद इन
देशों में जरूरी मेडिकल उपकरणों की कमी हो गई।
चूंकि दुनिया की फैट्री कहे जाने वाले चीन ने इन
प्रॉडट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, इसलिए
ये देश सामान खरीद नहीं सके। तीन महीने बाद आज
आलम यह है कि चीन से कोरोना खत्म हो गया है और
दुनिया अपना घर लुटाकर कोरोना से बचाव के
उपकरण खरीदने के लिए चीन के दरवाजे पर भीख
मांग रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की चाल
के ऐसे कई सबूत अब सामने आ रहे हैं। बताया जा
रहा है कि चीन ने दुनियाभर में फैले चीनी मूल के
लोगों से कहा कि वे कोरोना मरीजों के बचाव के लिए
जरूरी उपकरण खरीदकर दान करें। चीन की
कयुनिस्ट पार्टी के यूनाइटेड फ्रंट वर्क्स डिपार्टमेंट की
आधिकारिक वेबसाइट पर लिखे गए एक लेख में कहा
गया है, (मेडिकल सप्लाइ) लगातार खरीदते रहें और
इसे चीन को भेजते रहें। आप जितना अधिक से
अधिक खरीद सकते हैं, खरीद लीजिए। यही
डिपार्टमेंट पश्चिमी देशों और देश के अंदर चीन सरकार
के अजेंडे को बढ़ावा देता है। इससे चीनी छात्र और
विश्वविद्यालय जुड़े हैं। इसके बाद यूनाइटेड फ्रंट वर्स
डिपार्टमेंट ने चीनी मूल के लोगों से अपील की कि वे
भी जिस देश में रहते हैं, वहां से मेडिकल सप्लाइ
खरीदकर उसे वापस चीन भेज दें। इसके बाद
अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, आर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया,
संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से सैकड़ों टन
मेडिकल सप्लाइ चीन भेजी गई। यही नहीं डिपार्टमेंट
ने लोगों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया कि वे
जब चीन अपने घर लौटें तो अपने साथ मेडिकल
सप्लाइ लेकर आएं। अमेरिका में चीन के महावाणिज्य
दूतावास ने 26 जनवरी को एक नोटिस जारी करके
चीनी मूल के लोगों से दान की अपील की थी।
2.46 अरब शिपिंग कार्टून कोरोना से
बचाव के लिए चीन पहुंचे
चीन के कस्टम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक
24 जनवरी से 29 फरवरी के बीच 2.46 अरब
शिपिंग कार्टून कोरोना महामारी से बचाव के लिए
चीन पहुंचे। इनकी कुल कीमत 1.158 अरब
डॉलर है। सात मार्च को चीन के कस्टम विभाग
ने बताया कि इसमें दो अरब मास्क और 25
मिलियन प्रॉटेिटव सूट शामिल थे। यह हालत
तब है जब चीन के सरकारी समाचार संगठन
बीजिंग न्यूज के मुताबिक दुनिया के 50 प्रतिशत
मास्क खुद चीन में बनते हैं। वर्ष 2019 में चीन
ने 5 अरब मास्क बनाए थे जिसमें से 54 प्रतिशत
मेडिकल ग्रेड के मास्क थे।
साभार युगपक्ष
📒 📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓





यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...