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हम पहले भी एकसाथ बत्तियां बुझा चुके...
'रात 9 बजे 9 मिनट लाइट ऑफ का ग्रिड क्रैश से कनेक्शन
यह पहली
बार नहीं है कि देश में 'बत्तियां
बंद हो रही हैं।
'अर्थ आवर जैसी
पहल में इस प्रकार के कदम
उठाए गए हैं...
पूरी खबर पढ़ें 👉 👇
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के
खिलाफ जंग में देशवासियों से
सामूहिकता के इजहार के लिए रविवार
को रात 9 बजे से 9 मिनट तक लाइट
बंद कर मोमबत्ती, टॉर्च जलाने की
अपील की है।
पीएम की इस अपील के बाद
ऐसी आशंका जताई जा रही हैं कि एक
ही साथ लाइटें बंद होने और 9 मिनट
बाद फिर से चालू होने से बिजली ग्रिड
क्रैश हो सकता है। ऐसी आशंका जाहिर
करने वालों में जयराम रमेश, शशि
थरूर, प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे कांग्रेस
के कई दिग्गज नेताओं से लेकर महाराष्ट्र
के बिजली मंत्री नितिन राउत तक
शामिल हैं। इस आशंका के आधार पर
सोशल मीडिया पर लोग पीएम मोदी की
अपील के समर्थन और विरोध में
अपनी-अपनी 'विशेषज्ञताÓ का इजहार
करने लगे। देखते ही देखते सोशल
मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई
कि पीएम मोदी को इस तरह की अपील
करनी चाहिए थी या नहीं। आखिरकार
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को सामने आना
पड़ा। मंत्रालय ने ग्रिड फेल होने की
आशंका को सिरे से खारिज करते हुए
कहा कि ग्रिड के संतुलन के लिए पर्याप्त
उपाय किए गए हैं। मंत्रालय ने यह भी
स्पष्ट किया कि उस समय स्ट्रीट लाइट
से लेकर रेफ्रिजरेटर, पंखे जैसे घरेलू
उपकरण नहीं बंद होंगे। सिर्फ घरों की
लाइटें बंद होंगी, जिससे बहुत ज्यादा
फर्क नहीं पड़ेगा।
अर्थ आवर जैसे वक्त में
भी लोग कर चुके हैं ऐसा एक अधिकारी ने कहा कि
प्रधानमंत्री की इस अपील से
बिजली की मांग में रविवार को
10,000 से 12,000 मेगावॉट
की कमी आ सकती है। इसका
राष्ट्रीय पावर ग्रिड की स्थिरता पर
कोई असर नहीं पड़ेगा।
अधिकारी ने कहा कि यह पहली
बार नहीं है कि देश में 'बत्तियां
बंद हो रही हैं।
'अर्थ आवर जैसी
पहल में इस प्रकार के कदम
उठाए गए हैं। देश में 2012 में
तकनीकी कारणों से ग्रिड ठप
हुआ था।
हालांकि भारत में इस
समय में मजबूत नेटवर्क है जो
बिजली मांग में उतार-चढ़ाव से
निपटने में सक्षम है।
(साभार हिस) युगपक्ष
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