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जिले को तम्बाकू मुक्त करना एक सामाजिक जिम्मेदारी भी : नरेंद्र सिंह,
कोटपा एक्ट को लेकर पुलिस प्रशासन व सहयोगी विभागों के साथ कार्यशाला आयोजित
बीकानेर। जिले को तम्बाकू व धूम्रपान मुक्त करना ना केवल चिकित्सा, पुलिस व सहयोगी विभागों का काम है बल्कि ये एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी है इसलिए इसे अपने फर्ज से ऊपर समझें और कोटपा एक्ट 2003 की शत प्रतिशत पालना सुनिश्चित करवाएं। ये कहना था रास्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी नरेन्द्र सिंह का, वे स्वास्थ्य भवन सभागार में आयोजित आमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैसे तो पुलिस विभाग के लिए कोटपा एक्ट एक बहुत छोटा विषय है क्योंकि बड़े जघन्य अपराधों को भी विभाग नियंत्रित करता है लेकिन सामजिक तौर पर देखें तो ये विकराल समस्या है जिसे हम बड़े आसानी से समाप्त कर सकते हैं। उन्होंने एक्ट के तहत नियमित चालानिंग कर इस बुराई पर लगाम लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोटपा एक्ट का उल्लंघन कर रहे उत्पादों को जब्ती की कार्यवाही भी की जाए ताकि उत्पादकों तक नकेल कसी जा सके। उन्होंने बताया कि सभी हुक्काबार अवैध हैं क्योंकि कोटपा एक्ट में इनके लाइसेंस का कोई प्रावधान ही नहीं है अतः पुलिस विभाग द्वारा इन्हें बंद करवाने की कार्यवाही होनी चाहिए। कोई तम्बाकू उत्पाद किसी नाबालिक को दिखना नहीं चाहिए लिहाजा कोई उत्पाद बाहर की तरफ प्रदर्शित होना धारा 6 बी के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि धारा 7 के तहत सभी तम्बाकू उत्पादों के पैकेट के 85 प्रतिशत भाग पर तम्बाकू के नुकसानों को बताती अद्यतन सचित्र वैधानिक चेतावनी होनी चाहिए। संयुक्त निदेशक डॉ देवेन्द्र चैधरी व उपनिदेशक डॉ संदीप अग्रवाल द्वारा जिले को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए योजनाबद्ध कार्यवाही और समन्वित चलानिंग पर जोर दिया।
सीएमएचओ डॉ. बी.एल. मीणा ने जानकारी दी कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिये हानिकारक तो है ही अपितु परोक्ष धूम्रपान से भी कैंसर, अस्थमा, स्ट्रोक आदि रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इसे भावी पीढ़ी तक जाने से रोकना कोटपा एक्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है चिकित्सा प्रशासन सभी विभागों को साथ लेकर इस बुराई को रोकने के लिए संकल्पबद्ध है। जिला टीबी अधिकारी डॉ सी.एस. मोदी ने बताया कि धूम्रपान करने पर टीबी की संभावनाएं तो बढती ही हैं साथ ही फेफड़ों की कार्यक्षमता भी समाप्त हो जाती है। जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के महेंद्र जयसवाल ने कोटपा एक्ट की धारा 4, 5, 6 व 7 की विस्तृत जानकारी देते हुए लागू करने में पुलिस विभाग की अपेक्षित भूमिका रेखांकित की। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यतः धारा 4 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों व इसके लिए साधन उपलब्ध करवाने वालों पर 200 रूपए तक का चालान जबकि धारा 6 बी के तहत विद्यालयों-शिक्षण संस्थानों के 100 गज दायरे में सिगरेट बेचने वालों पर चालान किया जा सकता है। नाबालिकांे को तम्बाकू उत्पाद न बेचने का साइनेज ना लगाने वालों पर भी धारा 6 ए के तहत चालान किये जाते हैं। धारा 5 के तहत तम्बाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर पूर्ण रोक है।
कार्यशाला में अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक सुनील बोड़ा, समस्त वृताधिकारी व थाना प्रभारियों के साथ, आरसीएचओ डॉ रमेश गुप्ता, डिप्टी सीएमएचओ डॉ इंदिरा प्रभाकर, डॉ योगेन्द्र तनेजा, समस्त बीसीएमओ, सीएचसी-पीएचसी प्रभारी मौजूद रहे।
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जिले को तम्बाकू मुक्त करना एक सामाजिक जिम्मेदारी भी : नरेंद्र सिंह,
कोटपा एक्ट को लेकर पुलिस प्रशासन व सहयोगी विभागों के साथ कार्यशाला आयोजित
बीकानेर। जिले को तम्बाकू व धूम्रपान मुक्त करना ना केवल चिकित्सा, पुलिस व सहयोगी विभागों का काम है बल्कि ये एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी है इसलिए इसे अपने फर्ज से ऊपर समझें और कोटपा एक्ट 2003 की शत प्रतिशत पालना सुनिश्चित करवाएं। ये कहना था रास्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी नरेन्द्र सिंह का, वे स्वास्थ्य भवन सभागार में आयोजित आमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैसे तो पुलिस विभाग के लिए कोटपा एक्ट एक बहुत छोटा विषय है क्योंकि बड़े जघन्य अपराधों को भी विभाग नियंत्रित करता है लेकिन सामजिक तौर पर देखें तो ये विकराल समस्या है जिसे हम बड़े आसानी से समाप्त कर सकते हैं। उन्होंने एक्ट के तहत नियमित चालानिंग कर इस बुराई पर लगाम लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोटपा एक्ट का उल्लंघन कर रहे उत्पादों को जब्ती की कार्यवाही भी की जाए ताकि उत्पादकों तक नकेल कसी जा सके। उन्होंने बताया कि सभी हुक्काबार अवैध हैं क्योंकि कोटपा एक्ट में इनके लाइसेंस का कोई प्रावधान ही नहीं है अतः पुलिस विभाग द्वारा इन्हें बंद करवाने की कार्यवाही होनी चाहिए। कोई तम्बाकू उत्पाद किसी नाबालिक को दिखना नहीं चाहिए लिहाजा कोई उत्पाद बाहर की तरफ प्रदर्शित होना धारा 6 बी के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि धारा 7 के तहत सभी तम्बाकू उत्पादों के पैकेट के 85 प्रतिशत भाग पर तम्बाकू के नुकसानों को बताती अद्यतन सचित्र वैधानिक चेतावनी होनी चाहिए। संयुक्त निदेशक डॉ देवेन्द्र चैधरी व उपनिदेशक डॉ संदीप अग्रवाल द्वारा जिले को तम्बाकू मुक्त बनाने के लिए योजनाबद्ध कार्यवाही और समन्वित चलानिंग पर जोर दिया।
सीएमएचओ डॉ. बी.एल. मीणा ने जानकारी दी कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिये हानिकारक तो है ही अपितु परोक्ष धूम्रपान से भी कैंसर, अस्थमा, स्ट्रोक आदि रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इसे भावी पीढ़ी तक जाने से रोकना कोटपा एक्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है चिकित्सा प्रशासन सभी विभागों को साथ लेकर इस बुराई को रोकने के लिए संकल्पबद्ध है। जिला टीबी अधिकारी डॉ सी.एस. मोदी ने बताया कि धूम्रपान करने पर टीबी की संभावनाएं तो बढती ही हैं साथ ही फेफड़ों की कार्यक्षमता भी समाप्त हो जाती है। जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के महेंद्र जयसवाल ने कोटपा एक्ट की धारा 4, 5, 6 व 7 की विस्तृत जानकारी देते हुए लागू करने में पुलिस विभाग की अपेक्षित भूमिका रेखांकित की। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यतः धारा 4 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों व इसके लिए साधन उपलब्ध करवाने वालों पर 200 रूपए तक का चालान जबकि धारा 6 बी के तहत विद्यालयों-शिक्षण संस्थानों के 100 गज दायरे में सिगरेट बेचने वालों पर चालान किया जा सकता है। नाबालिकांे को तम्बाकू उत्पाद न बेचने का साइनेज ना लगाने वालों पर भी धारा 6 ए के तहत चालान किये जाते हैं। धारा 5 के तहत तम्बाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर पूर्ण रोक है।
कार्यशाला में अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक सुनील बोड़ा, समस्त वृताधिकारी व थाना प्रभारियों के साथ, आरसीएचओ डॉ रमेश गुप्ता, डिप्टी सीएमएचओ डॉ इंदिरा प्रभाकर, डॉ योगेन्द्र तनेजा, समस्त बीसीएमओ, सीएचसी-पीएचसी प्रभारी मौजूद रहे।
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