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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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बहन शूपर्णखा की दशा देखकर भड़के रावण, किया सीता हरण
संवादों से हुए भाव-विभोर
बीकानेर। स्थानीय गर्वमेन्ट प्रेस रोड स्थित गोपीनाथ मंदिर में रविवार को रामलीला महेंद्र सिंह राजपुरोहित की स्मृति में शहरी जन कल्याण सेवा संस्थान एवं श्री राम रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में शुक्रवार को सर्वप्रथम भगवान राम-लक्ष्मण द्वारा गंगा पार करने का मनोहारी ²श्य मंचित किया गया। मल्लाह केवट के प्रभु प्रेम ने श्रद्धालुओं को भक्ति से सराबोर कर दिया। तत्पश्चात वन में भगवान राम, लक्ष्मण व सीता को शूपर्णखा की भेंट, शूर्पणखा द्वारा राम व लक्ष्मण से विवाह का आग्रह करना, दोनों भाइयों के द्वारा विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने पर शूपर्णखा द्वारा कुपित होकर सीता पर हमला करने के लिए जाना , लक्ष्मण का शूपर्णखा के नाक-कान काटना, शूपर्णखा द्वारा अपने भाइयों खर दूषण के दरबार में जाना, राम लक्ष्मण द्वारा खर दूषण व राक्षसों का वध करना, रावण दरबार में शूपर्णखा का आगमन व अपनी व्यथा सुनाना, रावण द्वारा मारिच को लेकर स्वर्ण मृग लीला रचकर सीता हरण तथा सीता की रक्षा के लिए जटायू द्वारा वीरगति को प्राप्त होना इत्यादि ²श्यों का मंचन किया गया।
श्रीराम, लक्ष्मण, सीता वनों में घूमते हैं तभी वहां शूर्पनखा पहुंचती है व श्रीराम के साथ विवाह रचाने की हट करती है लेकिन श्रीराम द्वारा विवाह के लिए मना करते हैं। श्रीराम बताते हैं कि वह शादीशुदा हैं व उनकी पत्नी सीता भी उनके साथ हैं तो वह दूसरी शादी कैसे कर सकते हैं? फिर शूर्पनखा की नजर लक्ष्मण पर पड़ती है और वह लक्ष्मण से शादी की जिद पकड़ लेती है। इन हरकतों से तंग आकर लक्ष्मण शूर्पनखा की नाक काट देते हैं। नाक कटने के बाद शूर्पनखा खर दूषण के पास जाती है और आपबीती सुनाती है। क्रोधित खर दूषण बदले की आग लिए जंगल की ओर रवाना होते हैं जहां श्रीराम से युद्ध के दौरान मारे जाते हैं। इस पर शूर्पनखा बदले की आग लिए राजा रावण के दरबार पहुंचती है व अपना दुखड़ा रोती है। रामलीला के अंतिम दृश्य में सूपर्नखा अपने भाई रावण के पास पहुंची, जिस पर रावण ने इस अपमान का बदला लेने का वचन दिया। सती अनुसुइया ने सीता को नारी धर्म की शिक्षा दी। इसके बाद शूर्पणखा के नृत्य और जुगलबंदी का दौर शुरू हुआ, जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। आयोजक खुशालचंद व्यास ने बताया कि प्रभू राम का पात्र गोपाल, सीता के पात्र में सुरेश कुमार,लक्ष्मण की भूमिका राम राजपुरोहित,सुर्पनखा की भूमिका अमित,खर दुषण की भूमिका सुरेन्द्र स्वामी,रावण की भूमिका में देवीसिंह राठौड तथा मारीच की भूमिका दयाराम ने निभाई।
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