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ढढ्ढा कोटड़ी में सवा करोड़ जाप अनुष्ठान शुरू
बीकानेर, 15 सितम्बर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिनमणि प्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. सहवृृति साध्वीवृृंद के सान्निध्य में रविवार को ’’विध्नहर्ता-मंगलकर्ता’’ सिद्धचक्र मंत्र का सवा करोड जाप अनुष्ठान ढढ्ढा कोटड़ी में शुरू हुआ।
ढढ्ढा कोटड़ी मंें परमात्मा की प्रतिमा, सिद्धचक्र और वासक्षेप अभिमंत्रित कलश की स्थापना की गई है। ’’ ऊं ह्ीं श्रीं सिद्धचक्राय नमः’’ मंत्र के जाप की व्यवस्था सुबह साढ़े पांच बजे से रात नौ बजे तक की गई है। किसी परिस्थितिवश ढढ्ढा कोटड़ी में जाप नहीं करने वाले श्रावक-श्राविकाओं को घर पर या पास के जिनालय में या सिद्धचक्र यंत्र के आगे भी जाप की सुविधा प्रदान की गई है।
साध्वीश्री शशि प्रभाजी म.सा. ने बताया कि प्रत्येक आराधक को हर दिन 21 माला का जाप करना है। इस प्रकार क आराधक के द्वारा 27 दिन यानि 11 अक्टूबर तक 567 माला 56700 मंत्र का जाप किया जाएगा। अभिमंत्रित कलश ढढ्ढा कोटड़ी में जाप करने वालों को दिया जाएगा। जाप के लिए एक ही आसन, एक ही माला व एक ही स्थान का चयन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि नवपद रूपी सिद्धचक्र की यह आराधना 9 अंक को ध्यान में रखकर की गई है। नवनिधि की भंडार, यह साधना है।
ढढ्ढा कोटड़ी में रविवार को प्रवचन में साध्वीश्री संवेग प्रज्ञा ने कहा कि सिद्धचक्र जैन शासन का विध्नहर्ता, मंगलकर्ता गणनायकगण राज है। शास्त्रों मं कहा गया है कि ’’ श्री सिद्धचक्र आराधो, मनवांछित कारज साधो रे, भविका श्री सिद्धचक्र आराधो’’। उन्होंने बताया कि यह शाश्वत मंत्र है। प्रत्येक तीर्थंकर के शासनकाल में इसकी आराधना होती रही है। नव आराध्य स्वरूप शास्वत पदों का इसमें समावेश होता है। सिद्धचक्र की आराधना से सर्व विध्नों का विनाश, रोग शोक का निवारण, सद्बुद्धि का सिंचन,सौभाग्यवर्द्धन, पुण्य उपार्जन एवं कर्मों का संहरण होता है। साधक की नवपदों में उत्तम स्थान की प्राप्ति होती है। यह आराधना आधि-व्याधि-उपाधि को दूर करने, शारीरिक स्वच्छता, मानसिक स्थिरता, बौद्धिक निर्मलता को प्रदान करती है।
साध्वीश्री ने कल्पसूत्र के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि धर्म यानि अपने स्वभाव में रमण करना है। जीवन की बहूमुल्यता को समझें तथा सुखी, दुःखी, पापी व धर्मी के प्रति दृष्टिकोण व सोच बदले। धार्मिक श्रावक-श्राविकाओं से सीख लेकर सच्चे धार्मिक बनें। दुखी-पापी के भूतकाल को देखकर सीख लें तथा पापकर्मों से बचें। सुखी से प्रेरणा लेकर उससे ईष्या नहीं करें तथा पुण्यों का संचय करें।
अभिनंदन- अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद के राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष पुरुषोतम सेठिया का श्री खरतरगच्छ युवा परिषद के अध्यक्ष राजीव खजांची ने श्रीफल, माला व स्मृति चिन्ह से तथा बालेतरा के जितेन्द्र चोपड़ा, पुरुषोतम मालू, कुशल भक्त मंडल बाड़मेर पुखराज लूणिया का वरिष्ठ श्रावक महावीर नाहटा अभिनंदन किया। खरतरगच्छ युवा परिषद बालोतरा की ओर से संघ पूजा की गई।
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