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सामूहिक क्षमापना एवं अभिनन्दन समारोह आयोजित
गंगाशहर 15 सितम्बर। क्षमा, मुक्ति, सरलता व मृदुता ही मोक्ष मार्ग के प्रवेश द्वार है। इन दरवाजों में प्रवेश किये बिना मुक्ति सम्भव नहीं है। ये उद्गार आज आज जैन महासभा द्वारा तेरापंथ भवन में सकल जैन समाज के सामुहिक क्षमापना एवं तप अभिनन्दन समारोह में मुनि श्री सुमतिकुमार जी ने व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा कि हृदय को सरल बनाकर सबसे क्षमायाचना करने से ही इसका महत्त्व है। मुनिश्री शान्ति कुमार जी ने कहा कि सम्यकत्व की पहली सीढ़ी क्षमा है। मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति विचारों से उच्च या दलित बनता है। कथनी व करनी में दोहरापन या वंचना करने से कल्याण नहीं हो सकता।
प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशिप्रभाजी ने कहा कि जैन संस्कृति में ‘वेरं मज्झ न केणई’ को सर्वाधिक महता दी गई है। इसे सिर्फ ऊपरी रूप से न बोलना पर्याप्त नहीं है। प्रतिकूलता में अगर ये भाव मन में व आचरण में रहने चाहिए। प्रतिकूलता ही कसौटी होती है। वस्तुतरू प्रतिकूलता से कर्म क्षय व निर्जरा होती है। साध्वी श्री ने कहा कि भाव जगत का ही महत्व है। भाव शुद्धि ही सिद्धि है। साध्वी सोम्यगुणा ने जैनत्व की पहचान है क्षमा। किसी का दिल न दुखाना ही भगवान महावीर का मुख्य संदेश है। उसे हृदयागम करें और सबके साथ मैत्री का भाव रखें।
इस अवसर पर जैन महासभा के अध्यक्ष जयचन्दलाल डागा ने सभी तपस्वीजनों व आगन्तुकों का स्वागत करते हुए कहा कि सामुहिक क्षमापना एवं तप अभिनन्दन समारोह जैन दिगम्बर समाज की संवत्सरी अनन्त चतुर्दशी के बाद प्रथम रविवार को आयोजित किया जाता है। जिसमें सभी जैन साधु साध्वियों के सान्निध्य हेतु निवेदन किया जाता है। इस अवसर पर जतनलाल दूगड़ ने जैन महासभा की और से क्षमायाचना करते हुए कहा कि कभी कभी परिवार मित्रता व समाज में न चाहते हुए भी मन आग्रह हो जाते व हमारी दिशा प्रेम व स्नेह सौहार्द से भटक कर गलत हो जाती है। पर जिस प्रकार गलत राह से यू-टर्न लेकर हम पुनः सही मार्ग पर आ सकते हैं उसी प्रकार जैन संस्कृति में प्रतिक्रमण कर क्षमापना का अवसर एक यू-टर्न लेने का अवसर है जहां से हम वापस सहज व सरल होकर प्रेम व स्नेह सौहार्द के मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं। दूगड़ ने बताया कि इस अवसर पर 8 व 8 से अधिक दिनों की तपस्या करने वाले 216 तपस्वीजनों का अभिनन्दन किया जा रहा है। जिनमें एक महीने तक के 5 तपस्वी व छोटी छोटी उम्र के बच्चे भी शामिल हैं।
इस अवसर पर श्री जैन हितैषी श्रावक संघ के इन्द्रमल सुराणा, ज्ञान गच्छ के दुलीचन्द बुच्चा, अरिहन्तमार्गी जैन महासंघ के जयचन्दलाल सुखाणी, तपःगच्छ श्री संघ से सुरेन्द्र बद्धानी, खरतरगच्छ संघ से मनीष नाहटा व केशरीचन्द सेठिया, साधुमार्गी श्रावक संघ के राजेन्द्र गोलछा एवं मनोज डागा, हुक्मगच्छीय श्रावक संघ से मेघराज सेठिया व अशोक श्रीश्रीमाल, जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा गंगाशहर के अध्यक्ष डा. पुनमचन्द तातेड़, बीकानेर के सुरपत बोथरा, भीनासर के महेन्द्र बैद, जैन यूथ क्लब के सत्येंद्र बैद आदि ने अपने अपने संघों का प्रतिनिधित्व करते हुए क्षमायाचना की व अपने विचार व्यक्त किए।
चम्पकमल सुराना ने जैन महासभा की महावीर जयन्ती, जरूरतमन्द विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृति, 21 व्यंजन सीमा अभियान आदि विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि जैन प्रतिभा समारोह आगामी 20 अक्टूबर को आशीर्वाद भवन में आयोजित होगा।
समारोह में सभी तपस्वीजनों का महापौर नारायण चौपड़ा, सौजन्यप्रदाताओं व गणमान्य व्यक्तियों ने अभिनन्दन व सम्मान किया। युवक परिषद्, महिला मण्डल किशोर मण्डल व कन्या मण्डल के कार्यकर्ताओं का इसमें बहुत सहयोग रहा।
कार्यक्रम की शुभारम्भ चारित्रात्माओं द्वारा नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से हुआ। तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण किया। भंवरलाल डाकलिया ने अणुव्रत गीत का संगान किया। कार्यक्रम का भव्य संचालन हेमन्त सींगी ने किया।
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