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आचार्य तुलसी के पदारोहण दिवस पर मनाया विकास महोत्सव एवं मासखमण तप अभिनन्दन समारोह
गंगाशहर। तेरापंथ भवन में 26वां विकास महोत्सव एवं मासखमण तप अभिनन्दन समारोह मुनिश्री सुमतिकुमारजी के सान्निध्य में आयोजित हुआ। समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि आचार्य तुलसी ग्रहणशील महामानव थे जिन्होंने धर्मसंघ को नया रूप और आकार के साथ विकास के नए आयाम प्रदान किए। आचार्य तुलसी के पदारोहण दिवस को विकास महोत्सव दिवस के रुप में मनाया जाता है। आचार्य महाप्रज्ञ जी ने इस महोत्सव को मनाना शुरु किया था। मुनिश्री ने कहा कि विकास महोत्सव वर्षभर में किए कार्यों की समीक्षा और विकास की भावी रूपरेखा निर्धारित करने का पर्व है। मुनिश्री ने कहा कि आचार्य तुलसी जिन्होंने तेरापंथ संघ के लिए अपने संपूर्ण जीवन को समर्पित कर दिया। उनके अवदान को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता है। तेरांपथ संघ की उन्नति और विकास में उनके अवदानों की सक्रिय भूमिका रही है। वे हमेशा इसी दिशा में तत्पर रहते थे कि किस प्रकार से धर्मसंघ का विकास किया जाए। उन्हें हमेशा परहित को ध्यान में रखकर कार्य किया। उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रयास हम सभी को करना चाहिए।
मुनिश्री देवार्यकुमार जी ने कहा कि विकास करना है तो ज्ञान का विकास करें, स्वाध्याय का विकास करें, विवेक का विकास करें। सद्संकल्प हो तो विकास हो सकता है। विकास के लिए प्रयास और पुरुषार्थ आवश्यक होता है। आचार्यश्री तुलसी ने हमें सतत श्रम करने की प्रेरणा दी।
समारोह में शासनश्री साध्वीश्री अमितप्रभा, साध्वी मोलिकयशा, साध्वी गुप्तिप्रभा, साध्वी ऋजुप्रज्ञा ने भी विचार रखे। समारोह में तेरापंथी सभा के अध्यक्ष डॉ. पी.सी. तातेड़ व तेरापंथी महिला मंडल अध्यक्षा ममता रांका ने संदेश वाचन किया। कार्यक्रम के दौरान सामसुखा परिवार व रांका परिवार की तरफ से गीतिका का संगान किया गया।
तेरापंथी सभा के मंत्री अमरचन्द सोनी ने बताया कि मासखमण तपस्या करने वाली सरलादेवी सामसुखा व सुश्री मधु रांका का अभिनन्दन तेरापंथ समाज की संस्थाओं द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि 10 से 15 दिनों की तपस्या करने वाले तपस्वियों का भी अभिनन्दन किया गया।






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