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साहित्यकार कन्हैयालाल सेठिया को याद किया
जन्म शताब्दी समारोह में उनके व्यक्तित्व-कृतित्व पर बात-चीत
बीकानेर ११ सितम्बर | राजस्थानी के महान रचनाकार कन्हैयालाल सेठिया की जन्मशताब्दी वर्ष के दिन आज सखा संगम ने उनके राजस्थानी भाषा पर किए कार्यों पर प्रकाश डाला | मुख्य वक्ता राजेन्द्र जोशी ने कहा कि सेठियाजी राजस्थानी के महान रचनाकार होने के साथ एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे | धरती धोरां री व पाथल और पीथल इनकी कालजयी रचनाएं थी | सखा संगम के चेयर पर्सन चंद्रशेखर जोशी ने कहा कि सेठियाजी समाज सुधारक, परोपकारी थे | कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि कन्हैयालालजी सेठिया का जन्म चुरू के सुजान्गढ़ा में ११ सितम्बर १९१९ को हुआ उनका शताब्दी वर्षा चल रहा है और चुरू में ही जन्में संगीत मनीषी डॉ.जयचंद्र शर्मा का भी शताब्दी वर्षा चल रहा है | दोनों ही मनीषी राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाएं लिखा करते थे |सखा संगम के अध्यक्ष एन डी रंगा ने कहा कि सेठियाजी क पदचिन्हों पर चलना चाहिए | एडवोकेट हीरालाल हर्ष ने कहा कि सेठियाजी की रचनाएं अग्निवीणा में प्रकाशित कर अंग्रेज हुकूमत को ललकारते थे | वे बीकानेर प्रजामंडल के सदस्य भी रहे | लघुकथाकार अशफाक कादरी ने कहा कि सेठियाजी ने भारत छोडो आन्दोलन में करांची में जनसभाएं कर लोगों को अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ जागृत किया |
कार्यक्रम में ब्रजगोपाल जोशी, नागेश्वर जोशी, खुम्राज पंवार, भगवानदास पडिहार, सुरेन्द्रसिंह भाटी, प्रेमरत्न जोशी ने भी सेठियाजी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर अपने विचार प्रकट किए | कार्यक्रम की शुरुआत में सभी ने कन्हैयालाजी के चित्र पर पुष्पांजलि कर श्रद्धासुमन अर्पित किए | आभार जन्मेजय व्यास ने माना |
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