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युवा वर्ग भगवान महावीर के सिद्धान्तों को प्रतिष्ठा व प्रभावना में सक्रिय भूमिका निभाए - साध्वी शशि प्रभा
भगवान महावीर का सत्य, अहिंसा, अचैर्य,अस्तेय व ब्रह्मचर्य सिद्धान्त सर्वहितकारी व उपकारी-साध्वी शशि प्रभाजी म.सा.
बीकानेर, 31 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. के सान्निध्य में पर्युषण पर्व तहत शनिवार को कल्पसूत्र के प्रसंगानुसार जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जीवन आदर्शों का वांचन विवेचन किया गया।
साध्वीश्री शशि प्रभा ने कल्पसूत्र का वाचंन विवेचन करते हुए कहा कि भगवान महावीर का सत्य, अहिंसा, अचैर्य व ब्रह्मचर्य सिद्धान्त सर्वहितकारी व उपकारी है। तीथर््ंाकर भगवान व जैनाचार्यों ने जो संदेश दिए वे युगों-युगों तक जीव मात्र के कल्याण का संदेश देते रहेंगे। दुनियां के अनेक देशों ने वैज्ञानिक शोध से पाया की भगवान महावीर व जैनाचार्यों ने गहन, साधना, आराधना व भक्ति से जो रास्ता दिखाया वह आत्म व परमात्म कल्याण के लिए सार्थक है।
उन्होंने कहा कि रात्रि भोजन का त्याग, उपवास, जीव मात्र के प्रति दया व रक्षा का भाव’ अहिंसा परामोःधर्म को अनेक धर्म व सम्प्रदाय के लोगों ने भी अपनाया है।ं महात्मा गांधी ने भी अहिंसा को अपनाकर देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जैनेतर समुदाय ने वर्तमान मंें जैन सिद्धान्त, जैन मंदिर,जैन शाकाहारी आहार आदि से आकर्षित होकर मन से अपनाया है। लेकिन कुछ जैन समाज के लोग भगवान महावीर का सिद्धान्तों को भूलकर, भौतिकता-आधुनिकता की चकाचैध में और पाश्चात्य संस्कृृति से प्रभावति होकर कर्मबंधन कर रहे है, जो लोक-परलोक के लिए बहुत नुकसानदायक व जन्म मरण के चक्करों से परिभ्रमण करवाने वाले है । जैन समाज के लोगों विशेष कर युवा व युवतियों को चाहिए की वे भगवान महावीर के सिद्धान्तों को प्रतिष्ठा व प्रभावना में सक्रिय भूमिका निभाएं।
साध्वीश्री ने भगवान महावीर के जीवन आदर्शों का स्मरण दिलाते हुए कहा कि परमात्मा का आचार व विचार समान था। उपदेश देने वाले तो हजारों मिल जाएंगे, लेकिन उनका जीवन अपने ही उपदेशो से परे होता है। ऐसे व्यक्ति पूजनीय नहीं होते पूजे वे जाते है जो समता भाव रखते हुए कथनी-करनी में अंतर नहीं रखकर, अनेक पीड़ाओं को सहन कर जीव मात्र के कल्याण के लिए समर्पित रहते है। इस अवसर पर शिखा पारख की अट्ठाई की तपस्या की अनुमोदना की गई।
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