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हवेलियों, परकोटेे, स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए इनटेक काम करेगा-कु.पालकिया
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हवेलियों, परकोटेे, स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए इनटेक काम करेगा-कु.पालकिया
बीकानेर, 24 जुलाई। इनटेक के राज्य सह संयोजन कु. हरिसिंह पालकियां की अध्यक्षता में बीकानेर चैप्टर की बुधवार को बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में ओरण-गोचर के बचाव के लिए भू-परिवर्तन जैसे कार्यो को रोकना और विरासतकालीन हवेलियों, परकोटेे, स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए इनटेक को जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्य किए जान की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
पालकिया ने बताया कि थार मरूस्थलीय क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण के परंपरागत तरीकों को सुरक्षित किए जाने की जरूरत है क्योंकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आने वाले समय में यह सबसे कारगर रहेगी। उन्होंने कहा कि विरासत को नुकसान नहीं होना चाहिए। ऐसा करने वालों के विरूद्ध शासन-प्रशासन की मदद लेकर तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए। बीकानेर चैप्टर के संयोजक पृथ्वीराज रतनू ने जिले में किए गए विरासत स्थलों के सर्वे के बारे में जानकारी दी। जिले में कृषि विश्वविद्यालय, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय और वेटेनरी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को इनटेक की गतिविधियों से जोड़े जाने को कहा गया। स्कूली विद्यार्थियों को भी इनटेक की सदस्यता देकर विरासत संरक्षण के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता जताई गई। अपने परम्परागत स्रोतों को बचाने से ही हमारी संस्कृति बची रह सकती है।
प्रारम्भ में इनटेक के कोषाध्यक्ष सुनील बांठिया ने राज्य सह संयोजक का स्वागत किया और पारम्परिक फसलों के बीज संरक्षण की आवश्यकता जताई। सह संयोजक डाॅ. नंदलाल वर्मा व सदस्य सुधा आचार्य ने परम्परागत लोक संगीत और सकीलों के संरक्षण बाबत विचार रखे। बैठक में एम. एल. जांगिड़, डाॅ. शुक्ला बाला पुरोहित, अरूण प्रकाश गुप्ता, मनमोहन कल्याणी, दिनेश सक्सेना, डाॅ. मंजूला बारहठ, अरविन्द सिंह राठौड़, भंवर सिंह राठौड़ ने भी विरासत पर विचार रखे।
सभी सदस्यों व पालकिया का बीकानेर चैप्टर की ओर से कनवीनर पृथ्वीराज रतनू ने धन्यवाद दिया।
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हवेलियों, परकोटेे, स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए इनटेक काम करेगा-कु.पालकिया
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बीकानेर, 24 जुलाई। इनटेक के राज्य सह संयोजन कु. हरिसिंह पालकियां की अध्यक्षता में बीकानेर चैप्टर की बुधवार को बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में ओरण-गोचर के बचाव के लिए भू-परिवर्तन जैसे कार्यो को रोकना और विरासतकालीन हवेलियों, परकोटेे, स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए इनटेक को जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्य किए जान की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
पालकिया ने बताया कि थार मरूस्थलीय क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण के परंपरागत तरीकों को सुरक्षित किए जाने की जरूरत है क्योंकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आने वाले समय में यह सबसे कारगर रहेगी। उन्होंने कहा कि विरासत को नुकसान नहीं होना चाहिए। ऐसा करने वालों के विरूद्ध शासन-प्रशासन की मदद लेकर तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए। बीकानेर चैप्टर के संयोजक पृथ्वीराज रतनू ने जिले में किए गए विरासत स्थलों के सर्वे के बारे में जानकारी दी। जिले में कृषि विश्वविद्यालय, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय और वेटेनरी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को इनटेक की गतिविधियों से जोड़े जाने को कहा गया। स्कूली विद्यार्थियों को भी इनटेक की सदस्यता देकर विरासत संरक्षण के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता जताई गई। अपने परम्परागत स्रोतों को बचाने से ही हमारी संस्कृति बची रह सकती है।
प्रारम्भ में इनटेक के कोषाध्यक्ष सुनील बांठिया ने राज्य सह संयोजक का स्वागत किया और पारम्परिक फसलों के बीज संरक्षण की आवश्यकता जताई। सह संयोजक डाॅ. नंदलाल वर्मा व सदस्य सुधा आचार्य ने परम्परागत लोक संगीत और सकीलों के संरक्षण बाबत विचार रखे। बैठक में एम. एल. जांगिड़, डाॅ. शुक्ला बाला पुरोहित, अरूण प्रकाश गुप्ता, मनमोहन कल्याणी, दिनेश सक्सेना, डाॅ. मंजूला बारहठ, अरविन्द सिंह राठौड़, भंवर सिंह राठौड़ ने भी विरासत पर विचार रखे।
सभी सदस्यों व पालकिया का बीकानेर चैप्टर की ओर से कनवीनर पृथ्वीराज रतनू ने धन्यवाद दिया।
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