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राहतभरा कदम : स्पेशल रेंट कोर्ट / रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित होंगे, किरायेदार और मकान मालिक के
विवाद 60 दिन में निपटेंगे
राहतभरा कदम : स्पेशल रेंट कोर्ट / रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित होंगे, किरायेदार और मकान मालिक के
विवाद 60 दिन में निपटेंगे
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 / twitter, Podcast, YouTube, साहित्य-सभागार के साथ-साथ Facebook, Pinterest, LinkedIn और Instagram पर भी आपकी खबरें Khabron Me Bikaner 🎤
राहतभरा कदम : स्पेशल रेंट कोर्ट / रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित होंगे, किरायेदार और मकान मालिक के
विवाद 60 दिन में निपटेंगे
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
राहतभरा कदम : स्पेशल रेंट कोर्ट / रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित होंगे, किरायेदार और मकान मालिक के
विवाद 60 दिन में निपटेंगे
नई दिल्ली (हिस)। अब किरायेदार और मकान मालिक के बीच
विवाद का निपटारा 60 दिन के भीतर हो जाएगा। इसके लिए राज्य और केंद्र
शासित प्रदेश अपने-अपने यहां स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित
करेंगे। इतना ही नहीं, किरायेदार और मकान मालिक के बीच का विवाद
सिविल कोर्ट में नहीं जाएगा जहां मामला वर्षो तक चलता रहता है। केंद्र
सरकार ने किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद को सुलझाने के
लिए एक नए कानून का प्रस्ताव किया है। माना जा रहा है कि केंद्र के इस
कानून से मकान मालिकों के साथ -साथ किरायेदारों के हितों की भी रक्षा
होगी। नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या
मकान किराये पर देने से नहीं डरेंगे। सरकार के इस कदम का उद्देश्य देश
में भवनों के किराये का नियमन करना है। बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री
निर्मला सीतारमण ने संसद में 2019 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए इस
संबंध में नए कानून की घोषणा की थी।
मकान खाली न करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान
केंद्र के नए कानून के प्रस्ताव के मुताबिक मकान मालिक या भूस्वामी
किराये की समीक्षा करने से पहले तीन महीने का लिखित नोटिस देगा।
प्रस्तावित कानून जिला कलेक्टर को किराया प्राधिकार के तौर पर नियुक्त
करने और निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहने पर भारी
जुर्माना लगाए जाने की भी हिमायत करता है।
इसके मुताबिक यदि किरायेदार निर्धारित समय सीमा से अधिक
वक्त तक रहता है तो उसे दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद
चार गुना किराया अदा करना होगा। किरायेदार द्वारा अग्रिम राशि के तौर
पर मकान मालिक के पास जमा की जाने वाली राशि अधिकतम दो
महीने का किराया होगी। द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019 का मसौदा जारी
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने परामर्श के लिए
द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019 का मसौदा सार्वजनिक किया है। इसमें
कहा गया है कि मकान मालिक और किरायेदार को किरायानामा (रेंट
एग्रीमेंट) की एक प्रति जिला किराया प्राधिकरण को सौंपनी होगी,
जिसके पास भूस्वामी या किरायेदार के अनुरोध पर किराये की समीक्षा
करने या उसे तय करने की शक्तियां होंगी। इसमें कहा गया है कि भूमि
के राज्य सूची का विषय होने के चलते इस कानून को स्वीकार करने
के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे। हालांकि, राज्यों को स्पेशल रेंट कोर्ट और रेंट
ट्रिब्यूनल गठित करने की जरूरत होगी।
खाली कराने को नहीं काट सकेंगे बिजली पानी
अधिनियम के मसौदा में यह भी कहा गया है कि मकान मालिक
या भूस्वामी किराये के परिसर में मर मत कार्य कराने या पुरानी चीजों
को बदलने के लिए 24 घंटे के पूर्व नोटिस के बगैर प्रवेश नहीं कर
सकेगा।
प्रस्तावित कानून के मुताबिक किरायेदार से विवाद होने की
स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️
🙏
राहतभरा कदम : स्पेशल रेंट कोर्ट / रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित होंगे, किरायेदार और मकान मालिक के
विवाद 60 दिन में निपटेंगे
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
राहतभरा कदम : स्पेशल रेंट कोर्ट / रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित होंगे, किरायेदार और मकान मालिक के
विवाद 60 दिन में निपटेंगे
नई दिल्ली (हिस)। अब किरायेदार और मकान मालिक के बीच
विवाद का निपटारा 60 दिन के भीतर हो जाएगा। इसके लिए राज्य और केंद्र
शासित प्रदेश अपने-अपने यहां स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित
करेंगे। इतना ही नहीं, किरायेदार और मकान मालिक के बीच का विवाद
सिविल कोर्ट में नहीं जाएगा जहां मामला वर्षो तक चलता रहता है। केंद्र
सरकार ने किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद को सुलझाने के
लिए एक नए कानून का प्रस्ताव किया है। माना जा रहा है कि केंद्र के इस
कानून से मकान मालिकों के साथ -साथ किरायेदारों के हितों की भी रक्षा
होगी। नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या
मकान किराये पर देने से नहीं डरेंगे। सरकार के इस कदम का उद्देश्य देश
में भवनों के किराये का नियमन करना है। बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री
निर्मला सीतारमण ने संसद में 2019 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए इस
संबंध में नए कानून की घोषणा की थी।
मकान खाली न करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान
केंद्र के नए कानून के प्रस्ताव के मुताबिक मकान मालिक या भूस्वामी
किराये की समीक्षा करने से पहले तीन महीने का लिखित नोटिस देगा।
प्रस्तावित कानून जिला कलेक्टर को किराया प्राधिकार के तौर पर नियुक्त
करने और निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहने पर भारी
जुर्माना लगाए जाने की भी हिमायत करता है।
इसके मुताबिक यदि किरायेदार निर्धारित समय सीमा से अधिक
वक्त तक रहता है तो उसे दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद
चार गुना किराया अदा करना होगा। किरायेदार द्वारा अग्रिम राशि के तौर
पर मकान मालिक के पास जमा की जाने वाली राशि अधिकतम दो
महीने का किराया होगी। द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019 का मसौदा जारी
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने परामर्श के लिए
द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019 का मसौदा सार्वजनिक किया है। इसमें
कहा गया है कि मकान मालिक और किरायेदार को किरायानामा (रेंट
एग्रीमेंट) की एक प्रति जिला किराया प्राधिकरण को सौंपनी होगी,
जिसके पास भूस्वामी या किरायेदार के अनुरोध पर किराये की समीक्षा
करने या उसे तय करने की शक्तियां होंगी। इसमें कहा गया है कि भूमि
के राज्य सूची का विषय होने के चलते इस कानून को स्वीकार करने
के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे। हालांकि, राज्यों को स्पेशल रेंट कोर्ट और रेंट
ट्रिब्यूनल गठित करने की जरूरत होगी।
खाली कराने को नहीं काट सकेंगे बिजली पानी
अधिनियम के मसौदा में यह भी कहा गया है कि मकान मालिक
या भूस्वामी किराये के परिसर में मर मत कार्य कराने या पुरानी चीजों
को बदलने के लिए 24 घंटे के पूर्व नोटिस के बगैर प्रवेश नहीं कर
सकेगा।
प्रस्तावित कानून के मुताबिक किरायेदार से विवाद होने की
स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️
राहतभरा कदम : स्पेशल रेंट कोर्ट / रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित होंगे, किरायेदार और मकान मालिक के
विवाद 60 दिन में निपटेंगे





Hmm is anyone else encountering problems with the images on this
ReplyDeleteblog loading? I'm trying to determine if its a problem on my end or if it's the blog.
Any suggestions would be greatly appreciated.
Highly energetic article, I enjoyed that a lot.
ReplyDeleteWill there be a part 2?
Nếu thiếu gas, máy lạnh sẽ không hoạt động.
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