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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
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खेलणी सप्तमी पर गेर से छाएंगे होली के रंग
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. ✍️ *फोटो लॉन* 📷🎬📸☑️*********🙏👍🙏 खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️ ... 👇👇👇👇👇👇👇
खेलणी सप्तमी पर गेर से छाएंगे होली के रंग
बीकानेर। अपनी अलग पहचान रखने
वाली बीकानेरी अलमस्त होली की हंसी-
ठिठोलियां व मस्ती थंब स्थापना के साथ ही छाने
लगी है। होलाष्टक के दिनों में यह मस्ती परवान पर
रहेगी। अपनी मस्ती व ठिठोली के बीच भी शहर
बीकाणा के अलमस्त लोग अपनी लोक संस्कृति,
लोक कला को जीवित बनाये रखे हुए है और
आज भी शिद्दत के साथ परंपराओं का निर्वहन
करते है। बुधवार को खेलणी सप्तमी है और
शाकद्वीपीय समाज द्वारा नागणेची जी की पूजा
अर्चना कर फागोत्सव मनाया जाएगा। उसके
बाद परंपरागत गेर निकलेगी। इसके साथ ही होली के
कार्यक्रमों का आगाज हो जाएगा। बाजार में रंग-
गुलाल-पिचकारी की दुकाने सज चुकी है। फाल्गुन
मास की अष्टमी से होलिका दहन तक चंग पर
पड़ती थाप-सुरीली तान, रम्मतें, पानी
डोलची खेल, गेर, फागनिया फुटबाल, फागोत्सव
सहित अनेक ऐसे आयोजन लोगों को अपनी
रसमयता में डूबोये रखेगे। गली गुवाड़ तथा चौक
चौराहों पर मस्ती भरे नजारों में यहां के वाशिंदे
खोए रहते है। अलबेलों और अनूठों के इस
शहर में बच्चों से बुजुर्गो तक सभी अपनी मस्ती में
मस्त रहते है। हर पल हर क्षण मस्ती का आलम।
बच्चों व युवाओं के साथ महिलाएं भी होली के रंगों में रंगी हंसी ठिठोली, मजाक में
पीछे नहीं रहती। लड़की रूप में स्वांग बने लड़कों
नखरें व हरकते देखते ही बनती है। रम्मतों में बनने
वाली मेहरियों तथा स्वांग रूप में लड़की बनकर
नृत्य करने वालों के साथ बुजुगों द्वारा भी गीत-
ठुमके लगाये जाते है। पूर्व में जहां चमचेड़ से
पगड़ी-टोपी को खिंचना और नेग देने पर ही
लौटाना, राह चलते व्यक्ति के पीछे अचानक लोहे
के डिब्बे से बने भोंपू को बजाकर डराना, चलती
साईकिल के पहिए में कपड़ा अटका देना, कहीं पर बैठे व्यक्ति को अचानक रंग-गुलाल से रंग देने जैसी
हरकते कर ठिठोली की जाती और प्रेमभाव बढ़ाने
की कोशिश की जाती। परन्तु समय के साथ सहन
शक्ति कम होने से इन हरकतों में काफी कमी भी
आयी है। अब स्वांग बने युवक अपनी अदाओं-
मस्ती से ठिठोली करते है।
सिमटती चंग की थाप
पूर्व में जहां बसंत पंचमी के साथ ही
अनेक स्थानों पर चंग की थाप के साथ होली के
रंसीले गीत सुनाई देते थे और रसिये देर रात तक
टेरियों के साथ गीतों पर मदमस्त होते नजर आते
थे, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में अब शहर
में चंग की थाप धीरे धीरे सिमटती नजर आ रही
है। चंग के रसिक रात को कभी कोटगेट तो कभी
जूनागढ़ के सामने, जस्सूसर गेट के बाहर जाते
और नाचते भी थे। शहर के कई मोहल्लों में भी चंग
बजाने वाली टोलियों को बुलवाया जाता था और
रात तक चंग पर मोहल्लेवासी होली के गीतों का
आनंद उठाते थे। होली में अब कुछ ही दिन शेष हैं, खेलणी सप्तमी मनाई जा रही है और इस
बार दिन में भी चंग बजाने वाली टोलियां नजर
नहीं आई हैं। हालांकि, शहर में इस परंपरा को चंद
ही लोगों ने जीवित रखा है।
बनने लगे भरभोळिये
होलिका दहन के दिन भाईयों की लंबी उम्र के
लिये की जानी वाली माला घोळाई की तैयारियां भी
शुरू हो गई है। जिसके लिये बहनों ने गोबर से
बनने वाले भरभोळियों का निर्माण करना शुरू कर
दिया है।
फागोत्सव आज
श्री आदि गणेश मंदिर में बुधवार को फागोत्सव
मनाया जाएगा। मण्डल अध्यक्ष अविनाश व्यास ने
बताया कि भगवान गजानंद को फाग गीतों के साथ
पुष्पों की होली खेलाई जाएगी और राबडिय़े का
भोग लगाया जाएगा।
अपनाघर आश्रम में होगा फागोत्सव
अपनाघर आश्रम के अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद
पचीसिया ने बताया कि अपना घर आश्रम में 15
मार्च को पुष्पों की रंग भरी होली मनायी जाएगी।
नापासर, नोखा एवं बीकानेर की टोलियों को भी
होली के फाग एवं लोक गीत गाने की प्रस्तुति देंगे।
रंग की रंगत-शब्द की संगत चंदन
तिलक संग
नगर के संस्कृतिकर्मी एवं विभिन्न कलाकर्म
से जुड़े नगर के रंगप्रेमी-शब्द साधकों द्वारा होली
पर्व पर स्थानीय नागरी भण्डार स्थित नरेन्द्र सिंह
ऑडिटोरियम में 17 मार्च रविवार को शाम 5 बजे
'रंग की रंगत-शब्द की संगत' का भव्य आयोजन
रखा गया है।
कार्यक्रम के संयोजक कवि कथाकार
कमल रंगा ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज
'चंदन तिलक' से होगा। आयोजन में पर्ची द्वारा
आबंटित कविता, गीत, गजल, नज्म, चुटकले,
संस्मरण संवाद आदि तो अनिवार्य रूप से प्रस्तुत
करना होगा साथ ही रंग की रंगत वाली एक रचना
भी प्रस्तुत की जा सकती है। कार्यक्रम में फन
वर्ल्ड पार्क, नाल का सहयोग रहेगा।
खेलणी सप्तमी पर गेर से छाएंगे होली के रंग
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खेलणी सप्तमी पर गेर से छाएंगे होली के रंग
बीकानेर। अपनी अलग पहचान रखने
वाली बीकानेरी अलमस्त होली की हंसी-
ठिठोलियां व मस्ती थंब स्थापना के साथ ही छाने
लगी है। होलाष्टक के दिनों में यह मस्ती परवान पर
रहेगी। अपनी मस्ती व ठिठोली के बीच भी शहर
बीकाणा के अलमस्त लोग अपनी लोक संस्कृति,
लोक कला को जीवित बनाये रखे हुए है और
आज भी शिद्दत के साथ परंपराओं का निर्वहन
करते है। बुधवार को खेलणी सप्तमी है और
शाकद्वीपीय समाज द्वारा नागणेची जी की पूजा
अर्चना कर फागोत्सव मनाया जाएगा। उसके
बाद परंपरागत गेर निकलेगी। इसके साथ ही होली के
कार्यक्रमों का आगाज हो जाएगा। बाजार में रंग-
गुलाल-पिचकारी की दुकाने सज चुकी है। फाल्गुन
मास की अष्टमी से होलिका दहन तक चंग पर
पड़ती थाप-सुरीली तान, रम्मतें, पानी
डोलची खेल, गेर, फागनिया फुटबाल, फागोत्सव
सहित अनेक ऐसे आयोजन लोगों को अपनी
रसमयता में डूबोये रखेगे। गली गुवाड़ तथा चौक
चौराहों पर मस्ती भरे नजारों में यहां के वाशिंदे
खोए रहते है। अलबेलों और अनूठों के इस
शहर में बच्चों से बुजुर्गो तक सभी अपनी मस्ती में
मस्त रहते है। हर पल हर क्षण मस्ती का आलम।
बच्चों व युवाओं के साथ महिलाएं भी होली के रंगों में रंगी हंसी ठिठोली, मजाक में
पीछे नहीं रहती। लड़की रूप में स्वांग बने लड़कों
नखरें व हरकते देखते ही बनती है। रम्मतों में बनने
वाली मेहरियों तथा स्वांग रूप में लड़की बनकर
नृत्य करने वालों के साथ बुजुगों द्वारा भी गीत-
ठुमके लगाये जाते है। पूर्व में जहां चमचेड़ से
पगड़ी-टोपी को खिंचना और नेग देने पर ही
लौटाना, राह चलते व्यक्ति के पीछे अचानक लोहे
के डिब्बे से बने भोंपू को बजाकर डराना, चलती
साईकिल के पहिए में कपड़ा अटका देना, कहीं पर बैठे व्यक्ति को अचानक रंग-गुलाल से रंग देने जैसी
हरकते कर ठिठोली की जाती और प्रेमभाव बढ़ाने
की कोशिश की जाती। परन्तु समय के साथ सहन
शक्ति कम होने से इन हरकतों में काफी कमी भी
आयी है। अब स्वांग बने युवक अपनी अदाओं-
मस्ती से ठिठोली करते है।
सिमटती चंग की थाप
पूर्व में जहां बसंत पंचमी के साथ ही
अनेक स्थानों पर चंग की थाप के साथ होली के
रंसीले गीत सुनाई देते थे और रसिये देर रात तक
टेरियों के साथ गीतों पर मदमस्त होते नजर आते
थे, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में अब शहर
में चंग की थाप धीरे धीरे सिमटती नजर आ रही
है। चंग के रसिक रात को कभी कोटगेट तो कभी
जूनागढ़ के सामने, जस्सूसर गेट के बाहर जाते
और नाचते भी थे। शहर के कई मोहल्लों में भी चंग
बजाने वाली टोलियों को बुलवाया जाता था और
रात तक चंग पर मोहल्लेवासी होली के गीतों का
आनंद उठाते थे। होली में अब कुछ ही दिन शेष हैं, खेलणी सप्तमी मनाई जा रही है और इस
बार दिन में भी चंग बजाने वाली टोलियां नजर
नहीं आई हैं। हालांकि, शहर में इस परंपरा को चंद
ही लोगों ने जीवित रखा है।
बनने लगे भरभोळिये
होलिका दहन के दिन भाईयों की लंबी उम्र के
लिये की जानी वाली माला घोळाई की तैयारियां भी
शुरू हो गई है। जिसके लिये बहनों ने गोबर से
बनने वाले भरभोळियों का निर्माण करना शुरू कर
दिया है।
फागोत्सव आज
श्री आदि गणेश मंदिर में बुधवार को फागोत्सव
मनाया जाएगा। मण्डल अध्यक्ष अविनाश व्यास ने
बताया कि भगवान गजानंद को फाग गीतों के साथ
पुष्पों की होली खेलाई जाएगी और राबडिय़े का
भोग लगाया जाएगा।
अपनाघर आश्रम में होगा फागोत्सव
अपनाघर आश्रम के अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद
पचीसिया ने बताया कि अपना घर आश्रम में 15
मार्च को पुष्पों की रंग भरी होली मनायी जाएगी।
नापासर, नोखा एवं बीकानेर की टोलियों को भी
होली के फाग एवं लोक गीत गाने की प्रस्तुति देंगे।
रंग की रंगत-शब्द की संगत चंदन
तिलक संग
नगर के संस्कृतिकर्मी एवं विभिन्न कलाकर्म
से जुड़े नगर के रंगप्रेमी-शब्द साधकों द्वारा होली
पर्व पर स्थानीय नागरी भण्डार स्थित नरेन्द्र सिंह
ऑडिटोरियम में 17 मार्च रविवार को शाम 5 बजे
'रंग की रंगत-शब्द की संगत' का भव्य आयोजन
रखा गया है।
कार्यक्रम के संयोजक कवि कथाकार
कमल रंगा ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज
'चंदन तिलक' से होगा। आयोजन में पर्ची द्वारा
आबंटित कविता, गीत, गजल, नज्म, चुटकले,
संस्मरण संवाद आदि तो अनिवार्य रूप से प्रस्तुत
करना होगा साथ ही रंग की रंगत वाली एक रचना
भी प्रस्तुत की जा सकती है। कार्यक्रम में फन
वर्ल्ड पार्क, नाल का सहयोग रहेगा।





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