धूप ने दीवार को सहलाया ...
उसे मिली राहत ...
गौरैया के घोंसले पे
जमी बर्फ भी पिघल गई ...
मतवाली हुई हवा ...
आशा के गीत गूंज उठे
... दूर हुआ निराशा का साया ...!
विचारों और भावनाओं को शब्द देने का प्रयास करता हूं
हिंदी, सिंधी और राजस्थानी भाषा में उपन्यास, नाटक, कहानियां, कविताएं लिखी हैं।
पत्रकारिता से जीवनयापन, ब्लॉगर हूं, अखबारों के लिए लिखता हूं।
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