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राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता को भाजपा के संकल्प-पत्र में मान मिले
बीकानेर 6 अप्रेल, 2024
भारतीय भाषाओं में अपने समृद्ध साहित्य वैभव के साथ अलग पहचान रखने वाली प्राचीन भाषा है राजस्थानी। इसकी संवैधानिक मान्यता एवं दूसरी राजभाषा की घोषणा के लिए आजादी के बाद से ही करोडो़ं लोग अहिंसात्मक रूप से प्रयासरत है।
राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ते हुए उसे संवैधानिक मान्यता केन्द्र सरकार के स्तर पर मिले इस बाबत राज्य के स्तर पर संपूर्ण विधिक कार्यवाही पूरी की जा चुकी है। मामला केन्द्र सरकार के स्तर पर लम्बित है। ऐसे में करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान एवं उनकी अस्मिता मातृभाषा राजस्थानी को वाजब हक मिलना चाहिए।
इस संदर्भ में राजस्थानी युवा लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष एवं राजस्थानी भाषा मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कमल रंगा ने देश के रक्षामंत्री एवं वर्तमान में भाजपा के लोकसभा चुनाव 2024 के संकल्प-पत्र के संयोजक राजनाथ सिंह से मांग की है कि राजनाथ सिंह राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता की बात को मान-सम्मान देते हुए एवं करोड़ो लोगों की जन-भावना का आदर करते हुए राजस्थानी भाषा मान्यता को संकल्प-पत्र में उचित स्थान देवें।
साथ ही रंगा ने बताया कि शनिवार को पुष्कर में आयोजित चुनावी सभा के दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने भाषण का आगाज राजस्थानी भाषा मे करते हुए जो मान राजस्थानी भाषा को दिया है वैसा ही सम्मान भाजपा के संकल्प-पत्र समिति के संयोजक माननीय राजनाथ सिंह राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्रदान करने बाबत संकल्प-पत्र में उल्लेख करते हुए उचित मान दिलवाएंगे।
रंगा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ भाजपा के संकल्प-पत्र समिति के सदस्य बीकानेर लोक सभा प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल से भी अनुरोध किया है कि वे करोड़ो लोगों की मातृभाषा राजस्थानी की मान्यता की जायज मांग को संकल्प-पत्र में उचित स्थान दिलवाने हेतु अपने स्तर पर भी प्रयास करें।







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