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खबरों में बीकानेर 📰
बीकानेर बोल रहा है... सुन रहा है कोई...
- मोहन थानवी
बीकानेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र बहुत बड़ा है। इसमें आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। सभी क्षेत्रों के विकास की अपनी-अपनी आकांक्षाएं हैं। समस्याएं भी हैं। रेल फाटक जैसी कुछ ही समस्याओं के शीघ्र निवारण के आश्वासनों को बरसों से ढो रहे शहर को कुछ विकास कार्यों की खुशी भी मिली है। लेकिन पूरे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र को मिलने वाली संभावित विकास की कतिपय सुविधाएं वर्षों से अन्यत्र भी स्थानांतरित होती रही है। यहां तक की शिक्षा की राजधानी के रूप में अपनी पहचान बना चुके बीकानेर से उसकी यह पहचान भी हथियाने की कोशिशें बीकानेर भूल नहीं सकता।
हालांकि इससे भी कोई इनकार नहीं कर सकता की प्रशासनिक, औद्योगिक, कृषि, पशुपालन, यातायात - परिवहन, और नागरिक क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास स्तंभ बीकानेर में भी खड़े किए गए हैं लेकिन जो नहीं मिला उसका मलाल रहता ही है।
यह भी सच है कि यहां जिन समस्याओं को इंगित किया जा रहा है उनमें से कुछ के समाधान की चाबी राज्य सरकार और प्रशासनिक स्तर पर रहती है। लेकिन इन्हीं समस्याओं में से कुछ ऐसी भी है जो सीधे-सीधे केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ-साथ कुछ विभागों और मंत्रालयों के समन्वय से जुड़ी हैं। और इनमें से कुछ पर राजनीतिक असर भी जग जाहिर होता रहा है। इसे बीकानेर वासी भली भांति जानते और समझते रहे हैं। बरसों तक सत्ता में रहे प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कुछ नेताओं ने बीकानेरियों को अपनेपन का एहसास तो भरपूर करवाया। बावजूद इसके बीकानेर के हितैषी नेता भी फिलवक्त तक बीकानेरी जनजीवन को प्रभावित कर रही रेल फाटक जैसी समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त न कर सके।
पूरे लोकसभा क्षेत्र की बात न कर यहां केवल बीकानेर पूर्व व पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के कुछ ही इलाकों की समस्याओं पर नजर डालकर देखें।
शहर के सीने पर घाव बढ़ाती सड़कों, निराश्रित पशुओं, डूब क्षेत्र में गिने जा सकने वाले पुरानी गिन्नानी इलाके की बात करें अथवा इसी से सटे हुए सूरसागर की समस्या की ओर नजर डालें या फिर इसी के साथ कलेक्ट्रेट और पब्लिक पार्क के कुछ दशक पूर्व के स्वरूप और आज के स्वरूप की बात करें या सबसे बड़ी समस्या बीकानेर को पूरब और पश्चिम में बांटकर रख देने वाली रेल लाइन समस्या की बात करें। ये तो बरसों बरस से चली आ रही समस्याएं हैं। इसके अलावा एक बड़ी समस्या पिछले चार दशक से गहराती ही जा रही है और वह समस्या है रिहायशी एवं औद्योगिक क्षेत्रों में पानी निकासी की। सीवर लाइन की जाम की समस्या इसी से जुड़ी है।
बीकानेर में पानी निकासी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लुप्तप्रायः हो चुके नालों की भी याद आती है। तो सीवर लाइन के साथ-साथ पेयजल पाइप लाइन के क्षतिग्रस्त हो जाने की स्थिति में यदा-कदा घरों तक पहुंचने वाले दूषित जल सप्लाई की बात करें। गंदे पानी से उपजाई साग-सब्जी स्वास्थ्य पर प्रहार करती जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में सराहनीय पीबीएम अस्पताल भी कतिपय व्यवस्थाओं की गंभीर आलोचना का निशान बना रहता है।
ऐसी गंभीर जन समस्याओं से घिरा बीकानेर का मुख्यालय (शहर) ही समाधान की उम्मीद बनाए बरसों बरस बिता चुका है। चुनाव दर चुनाव अपनी उंगली पर निशान लगवाता रहा है। इसी उम्मीद में एक और उम्मीद भी जुड़ी रहती है की प्रदेश में हो रहे विकास के सौपानों में बीकानेर का नाम भी जुड़ जाएगा।
इस बार 2024 के लोकसभा आम चुनाव भी बीकानेर के लिए उम्मीद की चमकती किरण लेकर आए हैं। हर बार के चुनाव की तरह।





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