*खबरों में बीकानेर*
चुनाव : पर्दे के पीछे : चुनावी-दिवाली गिफ्ट में क्या... प्रचलित प्रलोभन पर कड़ी नजर...!
- मोहन थानवी
इधर चुनाव के लिए अंतिम तिथि पर नामांकन पत्र दाखिल करने का समय समाप्त हुआ उधर लोगों में दबी जुबान से चुनावी-दिवाली गिफ्ट की चर्चा चल पड़ी। विषय प्रचलित प्रलोभन संबंधित ही रहा। चुनावी माहौल में मनाई जा रही दिवाली के ठीक 1 सप्ताह पहले बीकानेर में रात को तय समय के बाद शराब बिक्री करते हुए एक दुकान पर एफआईआर दर्ज की गई लाइसेंस कुछ दिन के लिए निलंबित कर दिया गया।
चुस्त दुरुस्त प्रशासन की ऐसी सौगात उन परिवारों के लिए वरदान स्वरूप है जिन परिवारों ने शराब के कारण स्थितियां विकट होती हुई देखी है। इसी के साथ ही पुलिस और प्रशासन की ओर से अवैध नकदी और अवैध सामग्री के परिवहन पर रखी जा रही नजर विषयक चर्चाएं भी जोरों पर हैं।
इन दिनों विशेष रूप से आवागमन में लगी गाड़ियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। शराब की दुकानों पर सामान्य दिनों में बिकने वाली शराब की मात्रा और इन दिनों उसमें घटत बढ़त की आशंका को देखते हुए गतिविधियों को टैली किया जा रहा है।
लोग यहां तक कह रहे हैं की आचार संहिता लागू होने से पहले की गई सौगात भरी घोषणाओं की तुलना में पुलिस और प्रशासन की यह मुस्तैदी अधिक महत्वपूर्ण गिफ्ट है।
पुलिस और प्रशासन को ऐसी गिफ्ट चुनाव और दीपावली पर ही नहीं बल्कि बारहमास देते रहना चाहिए। लोग यह भी सराह रहे हैं कि 500 करोड़ से अधिक की अवैध नकदी और अवैध सामग्री अब तक जब्त की जा चुकी है। इससे लोगों में यह आशा भी बलवती हुई है की दीपावली पर खेले जाने वाले जुए और शराब बिक्री व सेवन पर भी पुलिस और प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी। क्योंकि आशंका है कि पर्दे के पीछे ऐसी गतिविधियां भी पांव पसारने में पीछे नहीं रह सकती।







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