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इन 29 नियमों की पालना से कोरोना के कहर से निजात पाना संभव
आज विश्व गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी और 29 नियमों की पालना से ही कोरोना के कहर से निजात पा सकता है। गुरुदेव जम्भेश्वर भगवान ने आज से 550 वर्ष पूर्व ही वह शिक्षाएं प्रदान की, जो आज के वर्तमान समय में कहीं अधिक प्रासंगिक है।
यह विचार मंगलवार को जांभाणी साहित्य अकादमी के तत्वावधान में चल रहे त्रिदिवसीय कोरोना जागरूकता वेबिनार के अंतिम दिन मुख्य वक्ता के तौर पर प्रख्यात जांभाणी विद्वान संत आचार्य डॉ. गोवर्धनराम शिक्षाशास्त्री ने अपने संबोधन में व्यक्त किए।
बिश्नोई समाज के 29 नियम प्रतिदिन प्रात:काल स्नान करना। 30 दिन जनन – सूतक मानना। 5 दिन रजस्वता स्री को गृह कार्यों से मुक्त रखना। शील का पालन करना। संतोष का धारण करना। बाहरी एवं आन्तरिक शुद्धता एवं पवित्रता को बनाये रखना। तीन समय संध्या उपासना करना। संध्या के समय आरती करना एवं ईश्वर के गुणों के बारे में चिंतन करना। निष्ठा एवं प्रेमपूर्वक हवन करना। पानी, ईंधन व दूध को छान-बीन कर प्रयोग में लेना। वाणी का संयम करना। दया एवं क्षमाको धारण करना। चोरी, 14. निंदा, 15. झूठ तथा 16. वाद – विवाद का त्याग करना। अमावश्या के दिनव्रत करना। विष्णु का भजन करना। जीवों के प्रति दया का भाव रखना। हरा वृक्ष नहीं कटवाना। काम, क्रोध, मोह एवं लोभ का नाश करना। रसोई अपने हाध से बनाना। परोपकारी पशुओं की रक्षा करना। अमल नहीं खाना तम्बाकू नहीं खाना भांग नहीं खाना मद्य तथा नहीं खाना नील का त्याग करना। बैल को बधिया नहीं करवाना।
जाम्भाणी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय प्रेस संयोजक पृथ्वी सिंह बैनीवाल ने बताया कि तीन दिन तक चले इस वेबिनार में कोरोना महामारी के संकट में गुरु जांभोजी की शिक्षाओं की प्रासंगिकता, प्रकृति और कोरोना महामारी, संकट के समय में बरती जाने वाली सावधानियों सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अपने संबोधन में भीनमाल निवासी युवा कथावाचिका और संगीतज्ञ डॉ मधु विश्नोई ने कोरोना प्रतिरोधी आयुर्वेद चिकित्सा के बारे में श्रोताओं को ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान की। चिमड़ावास सांचौर से सूबेदार केहराराम गोदारा ने कोरोना शिष्टाचार के व्यवहारिक आयामों के बारे में चर्चा की, वहीं जांभाणी साहित्य अकादमी के जालौर जिला संयोजक डॉ उदाराम खिलेरी ने ग्राम्य जीवन में कोरोना के दुष्प्रभावों की विवेचना करते हुए, बचाव के उपाय निर्दिष्ट किए।
पृथ्वी सिंह गीला ने हिसार के निकटवर्ती देहात में फैले कोरोना संक्रमण की वर्तमान वस्तुस्थिति चित्रित की। बाड़मेर से डॉ बंशीलाल ढाका ने ग्राम्यांचल में व्याप्त कोरोना विभीषिका पर चिंता जताते हुए शासकीय प्रोटोकॉल के पूर्ण परिपालन की आवश्यकता जताई और सभी से पूर्ण सावधानी बरतने की अपील की। जांभाणी साहित्य अकादमी के कोषाध्यक्ष आर के विश्नोई ने कोरोना से बचाव हेतु पारंपरिक प्राकृतिक औषधियों के उपयोग पर बल दिया। वेबीनार के उद्घोषक शंकरलाल कड़वासरा भोजाकोर ने कोविड-19 की दूसरी लहर और नियंत्रण प्रयासों के बारे में अपना वक्तव्य दिया। धन्यवाद ज्ञापन जांभाणी साहित्य अकादमी के महासचिव डॉ सुरेन्द्र खीचड़ द्वारा प्रस्तुत किया गया।
पुस्तकालय विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ हरिराम विश्नोई ने वेबीनार कार्यक्रम की समग्र रूपरेखा निर्धारित की और सुंदर तरीके से वेबिनार का संयोजन किया, वहीं वेबिनार का तकनीकी संचालन डॉ लालचंद बिश्नोई ने किया।
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