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राजस्थान के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास मे शोध की असीम संभावनाएं- डॉक्टर ढाका
March 06, 2021
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📝 ✍️ राजस्थान के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास मे शोध की असीम संभावनाएं- डॉक्टर ढाका राजकीय महिला महाविद्यालय, झुंझुनू द्वारा आयोजित " राजस्थान का सांस्कृतिक इतिहास: नवीन शोध परिकल्पना और संभावनाएं" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित किया गया जिसमें बीज वक्ता के रूप में महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर की इतिहास विभाग के सहायक आचार्य अंबिका ढाका ने उद् बोधन दिया| डॉक्टर ढाका ने "राजस्थान का सांस्कृतिक इतिहास कला और स्थापत्य के विशेष संदर्भ में" विषय पर अपनी बात रखते हैं कहा की राजस्थान का इतिहास अत्यंत समृद्धशाली है जिसमें प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक समय तक इतिहास के पृष्ठों में स्थापत्य और कला अवगाहन करती हैं| डॉक्टर ढाका ने पुरातात्विक स्थल कालीबंगा, बालाथल और गिलुंड की स्थापत्य कला की विशेषताओं को विस्तार से बताया | उन्होंने कहा की राजस्थान में जयपुर के विराटनगर में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का बौद्ध मंदिर सबसे प्राचीन मंदिर है, जबकि चित्तौड़गढ़ की नगरी की नारायण वाटिका सबसे प्राचीन हिंदू मंदिर की बात अभिलेख के माध्यम से करता है| डॉक्टरों ने अपने व्याख्यान में महलों, और राजस्थान के विभिन्न किलो की स्थापत्य कला की विशेषताओं को विस्तार से रखा| राजस्थान की कला के विषय में बात रखते हुए डॉक्टर ढाका ने कहा कि कालीबंगा से टेराकोटा का शिवलिंग, शिव पूजा का सबसे प्राचीन प्रमाण है| उन्होंने ढाबा से ब्रह्मा की अद्भुत मूर्ति, हर्षनाथ का लिंक उद्भव, रंग महल का शिव पार्वती फलक, अजमेर के नांद गांव का शिवलिंग आदि पर विस्तार पूर्वक चर्चा की| कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ राजेश आर्य, सह सचिव डॉ रोहिताश यादव सहित राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि स्थानों से लोगों ने सहभागिता की| कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्राचार्य डॉ नीलम भारद्वाज ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया ।✍🏻
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