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आठ लाख रूपये की धोखाधड़ी व तकादा करने पर जान से मारने की धमकी देने के प्रकरण में न्यायालय ने पुलिस थाना गंगाशहर को एफआईआर दर्ज करने के दिये आदेश।
बीकानेर/
दिनांक 02.07.2020 को माननीय न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सं. 04, बीकानेर की न्यायाधीश (चार्ज) सुश्री शालिनी शर्मा (आर.जे.एस.) ने प्रकरण में पुलिस थाना गंगाशहर को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
प्रकरण में आरोपित मुल्जिम् शिवलाल कुम्हार द्वारा परिवादी मैसर्स महावीर डिपार्टमेन्टल स्टोर से वर्ष 2015 व 2016 में आठ लाख रूपये का माल अपने कैटरिंग व्यवसाय में काम लेने हेतु खरीदा गया। जिसके भुगतान हेतु मुल्जिम शिवलाल ने मैसर्स महावीर डिपार्टमेन्टल स्टोर के पार्टनर जितेन्द्र सामसुखा को एक लाख पचास हजार व तीन लाख पचास हजार रूपये के दो चैक दिये, तथा तीन लाख रूपये का भुगतान करने हेतु एक करार लिखकर दिया। मुल्जिम द्वारा परिवादी को दिये गये चैक अनादरित हो गये और मुल्जिम ने परिवादी से व्यापारिक सम्बन्ध होने के कारण कई बहाने बनाते हुए उस पर कानूनी कार्यवाही नहीं करने हेतु निवेदन किया। जिस पर परिवादी ने उस पर विश्वास करते हुए कोई कार्यवाही नहीं की। लगातार तीन वर्ष से ज्यादा समय तक परिवादी मुल्जिम के बहाने व्यापारिक सम्बन्ध होने के कारण सुनता रहा। फिर आखिरकार मार्च 2020 में परिवादी ने मुल्जिम से पैसों का तकादा किया तो मुल्जिम द्वारा परिवादी को पैसों का भुगतान करने से इंकार करते हुए डराया धमकाया गया जिस पर परिवादी ने मुल्जिम को अप्रैल 2020 में जरिये अधिवक्ता विधिक नोटिस भेजा। जिस पर मुल्जिम द्वारा मई 2020 में नोटिस प्राप्त होने पर परिवादी को फोन कर तकादा करने व नोटिस भेजने के लिये धमकाया गया और उसे व उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई तथा पुलिस या अन्य किसी से शिकायत नहीं करने की धमकी दी गई। जिस पर परिवादी द्वारा पुलिस थाना गंगाशहर तथा जिला पुलिस अधीक्षक, बीकानेर को इस प्रकरण बाबत् एफआईआर दर्ज करने हेतु प्रार्थना-पत्र दिया गया। परन्तु इनके द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं करने पर परिवादी द्वारा माननीय न्यायालय में इस्तगासा पेश किया गया। जिस पर दिनांक 02.07.2020 को परिवादी के अधिवक्ता की बहस सुनकर माननीय न्यायालय द्वारा पुलिस थाना गंगाशहर को उक्त प्रकरण में मुल्जिम के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। अधिवक्ता परिवादी द्वारा प्रकरण की बहस में माननीय उच्चतम न्यायालय के दो निर्णय ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य तथा ललन चौधरी बनाम बिहार राज्य पेश किये गये। परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता गगन कुमार सेठिया ने की।
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