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वित्त वर्ष में नहीं हुआ बदलाव, करदाता इन बातों का रखें खास ध्यान
खास खबर :: आधिकारिक रूप से सरकार ने दिया बयान, वित्त वर्ष जून तक बढ़ाने की खबरें फेक
नई दिल्ली (साभार हिस / युगपक्ष )। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्त वर्ष की
मियाद नहीं बढ़ाई गई है। दरअसल, पहले ऐसी खबर आई थी कि
वित्त वर्ष 30 जून तक बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा,
राजस्व विभाग ने संशोधित भारतीय स्टांप अधिनियम 1 अप्रैल
के बजाय 1 जुलाई से लागू होने की अधिसूचना जारी की है।
इसका वित्त वर्ष से कोई लेना-देना नहीं है। यानी एक अप्रैल
2020 से ही नया वित्त वर्ष शुरू होगा। सरकार ने वित्त वर्ष पर
जनता के बीच पैदा हो रहे भ्रम को दूर किया है। इस बीच आपको
निम्नलिखित बातों का खास ध्यान रखना होगा। वितत् वर्ष 2018-
19 (अप्रैल 2018 से मार्च 2019) के लिए सरकार द्वारा
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए 30 जून 2020 तक का
समय दिया गया है। वित्त वर्ष 2019-20 में 31 मार्च 2020 तक
की आय कर योग्य मानी जाएगी, ना की 30 जून तक। यानी कर
की गणना 31 मार्च तक की आय पर ही होगी। करदाता वित्त वर्ष
2019-20 में 30 जून तक किए गए निवेश के तहत ही टैक्स
छूट का लाभ ले सकेंगे। नई एलआईसी, मेडिक्लेम, पीपीएफ,
एनपीएस जैसी योजनाएं 30 जून तक लेने पर ही वित्त वर्ष
2019-20 के लिए डिडक्शन के लिए योग्य होंगी। एलआईसी की
पुरानी पॉलिसी पर प्रीमियम, मेडिक्लेम, पीपीएफ, एनपीएस जैसी
योजनाओं पर 30 जून तक किए गए पेमेंट भी इसमें शामिल हैं।
हाउसिंग लोन की बात करें, तो डिडक्शन के लिए लोन इंटरस्ट
अरूअल के आधार पर होगा। यानी 31 मार्च तक अर्जित ब्याज
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए कटौती के रूप में योग्य होगा।
लोन की ईएमआई भरने से मिली 3 महीने
की मोहलत, इन बैंकों ने ग्राहकों को दी छूट कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक
के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछले रोज लोन लेने वाले ग्राहकों
को बड़ी राहत की घोषणा की थी। आरबीआई ने सभी बैंकों, गैर-
बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के साथ
अन्य वित्तीय संस्थानों को टर्म लोन की किस्त तीन महीने तक
टालने के लिए कहा था। आरबीआई के इस आदेश के बाद कई
बैंक सामने आए हैं जिनका कहना है कि वे ग्राहकों को लोन की
ईएमआई में तीन महीने की रियायत दे रहे हैं। आरबीआई ने अपने
बयान में कहा है, सभी कॉमर्शियल, क्षेत्रीय, ग्रामीण, एनबीएफसी
और स्मॉल फाइनेंस बैंकों को किस्त के भुगतान पर 3 महीने का
मोरैटोरियम देने की अनुमति दी जाती है।
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