आज फिर उसने एक पत्र लिखा
पर अक्षर एक न लिखा
बस कागज़ को छुवा और ...
अपनी साँसों से महकाया...
कागज़ को सहेजा और लिफाफे में डाला...
पर उसपे उसका भी नाम न लिखा...
पत्र उठाया और उस डिब्बे में रख दिया ...
जिसमे उसके शहीद बेटे का फोटो...
और एक मेडल था रखा....
आज फिर उसने एक पत्र लिखा.....
पर अक्षर एक न लिखा...
-✍️ मोहन थानवी




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