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कृषि एवं कृषक कल्याण के होंगे साझा प्रयास-कुलपति
जिले के विश्वविद्यालय, आइसीएआर संस्थानों के प्रतिनिधियों की कार्यशाला आयोजित
बीकानेर, 12 दिसम्बर। जिले के विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, आइसीएआर संस्थान, औद्योगिक प्रतिष्ठान एवं संगठन, प्रगतिशील किसान एवं पशुपालक मिलकर कृषि एवं कृषक कल्याण के लिए साझा प्रयास करेंगे। इसके लिए इनमें परस्पर ‘एमओयू’ हांेगे, जिससे इनके संसाधनों एवं मैनपावर का समुचित उपयोग हो और किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
इस संबंध में गुरुवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सचिवालय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई। इसे संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने कहा कि एकेडमिक दृष्टिकोण से बीकानेर बेहद सुदृढ़ है। यहां चार सरकारी एवं एक निजी विश्वविद्यालय, आइसीएआर के पांच संस्थान तथा मेडिकल एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय सहित अनेक स्तरीय संस्थान हैं। सभी अपने-अपने स्तर पर बेहतर कार्य कर रहे हैं, जिनसे आमजन को लाभ हो रहा है। भविष्य में सभी संस्थान साझा स्तर पर भी कार्य करें, ऐसे प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए रूपरेखा बनाई जाएगी। इसके तहत विभिन्न एमओयू होंगे।
राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि कृषि प्रसार, शिक्षा एवं अनुसंधान में सामुहिक प्रयास किए जाएं, तो बेहतरीन परिणाम आएंगे। संस्थानों द्वारा सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप एमओयू किए जाएं तथा इनकी नियमित समीक्षा हो। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी. आर. छीपा ने कहा कि कृषि वैज्ञानिक ऐसे अनुसंधान करें, जिससे वैश्विक स्तर पर लाभ हो। उन्होंने उत्पादों के मूल्य संवर्धन और इनकी मार्केटिंग पर जोर दिया।
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एल. एन हर्ष ने कहा कि आज के दौर में समय एवं संसाधनों का समुचित उपयोग जरूरी है। जब सभी संस्थान संयुक्त रूप से कार्य करेंगे तो लाभ के अवसर भी बढ़ेंगे। केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक प्रो. पी. एल. सरोज, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के डाॅ. राजराम चोयल, सीएसडब्ल्यूआरआई के डाॅ. एच. के. नरूला, काजरी के डाॅ. एन. डी. यादव, एनआरसी के डाॅ. एससी मेहता, राजूवास के डाॅ. गोविंद सिंह सहित प्रगतिशील किसान अशोक जांगू आदि ने विचार व्यक्त किए।
इस दौरान जैविक खेती, औषधीय पौधों की खेती, शुष्क क्षेत्र की फसलों, देशी नस्ल की गाय पालन, परम्परागत खेती प्रणाली, बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति, मृदा परीक्षण सहित विभिन्न बिंदुओं पर सामूहिक प्रयासों की संभावनाओं पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के प्रभारी डाॅ. एन. के. शर्मा ने बताया कि ऐसी कार्यशालाएं समय-समय पर आयोजित की जाएंगी। कार्यशाला में कुलसचिव कपूर शंकर मान, वित्त नियंत्रक बी. एल. सर्वा सहित समस्त डीन-डायरेक्टर मौजूद रहे।
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घटता भूजल स्तर और बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय-कुलपति
विंटर स्कूल का उद्घाटन सत्र आयोजित, तीन राज्यों के कृषि वैज्ञानिक निभा रहे भागीदारी
बीकानेर, 12 दिसम्बर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित विंटर स्कूल ‘डिजिटल न्यूट्रिगेशन फोर रिसोर्स कंजर्वेशन इन एरिड एग्रो सिस्टम’ का उद्घाटन सत्र गुरुवार को मानव संसाधन विकास निदेशालय सभागार में आयोजित हुआ।
अध्यक्षता करते हुए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने कहा कि घटता भूजल स्तर तथा बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय है। ऐसे में कृषि के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग जरूरी है, जिससे आय व पैदावार बढ़े। उन्होंने कहा कि इसमें सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिटिजल तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। किसान इसका भरपूर लाभ उठाएं, ऐसे प्रयास हों। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कृषि वैज्ञानिकों के लिए यह प्रशिक्षण लाभदायक सिद्ध होगा।
पूर्व कुलपति प्रो. बी. आर. छीपा ने कहा कि प्रत्येक वैज्ञानिक कम से कम पांच किसानों तक डिजिटल तकनीक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि आज अनेक तकनीकें इजाद हो चुकी हैं। किसान इनका उपयोग करेगा तो उन्हें अधिक लाभ होगा। जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एल. एन. हर्ष ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों के लिए समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण होने चाहिए, इससे उन्हें नए विषयों को सीखने के अवसर मिलते हैं।
पाठ्यक्रम प्रभारी डाॅ. वाई. सुदर्शन ने कहा कि विंटर स्कूल में राजस्थान के अलावा गुजरात और मध्यप्रदेश के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। यह 26 दिसम्बर तक चलेगी। इस दौरान विशेषज्ञों के व्याख्यान, फील्ड विजिट और प्रायोगिक कार्य होंगे। कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक डाॅ. पी. एस. शेखावत ने आभार जताया। इस दौरान विभिन्न डीन-डायरेक्टर मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन विवेक व्यास ने किया।
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