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बाल साहित्य बच्चों को संस्कारित करता है- रवि पुरोहित
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टोडारायसिंह में भव्य समारोह आयोजित । हेत रो परवानो लोकार्पित ।
टोडारायसिंह में भव्य समारोह आयोजित । हेत रो परवानो लोकार्पित ।
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श्रीडूंगरगढ/बीकानेर । 1 दिसम्बर 2019 । बाल साहित्य सिर्फ मनोरंजन नहीं करता बल्कि बच्चों को समग्र रूप में संस्कारित करता है । सात्विक और मूल्यवान बाल साहित्य बच्चे की बौद्धिक और मानसिक क्षमता का विकास भी करता है । ये विचार कवि-कथाकार रवि पुरोहित ने विमला नागला के सद्य प्रकाशित राजस्थानी बाल कहानी संग्रह ‘हेत रो परवानो’ के टोडा रायसिंह के पंचायत समिति सभागार में आयोजित भव्य लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। राष्ट्र भाषा हिन्दी प्रचार समिति द्वारा प्रकाशित एवं साहित्य मंच टोडा रायसिंह के तत्वावधान में लोकार्पित कृति की कहानियों पर चर्चा करते हुए पुरोहित ने कहा कि मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का बोध कराती ये कहानियां जहां बदलते समय के बाल मनोविज्ञान को परिभाषित करती है, वहीं मातृभाषा में रचित होने के कारण ये सीधी बाल-अंतरंगता से साक्षात होती है । विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्बोधन करते हुए डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि इस तरह के बुनियादी प्रयास जो जड़ों को सींचे, मायड़ भाषा के लौकिक जुड़ाव का मार्ग तो प्रशस्त करेंगे ही, साथ ही बच्चे भी सहजता से साहित्य से जुड़ेंगे । नेगी ने कहा कि आने वाले समय में टोंक जिले के विद्यार्थियों की प्रतियोगिता इस कृति पर करवाई जाएगी ताकि बच्चे मन से बाल साहित्य से जुड़ सके । समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अमीर अहमद सुमन ने कहा कि बदलते समय की बदलती जरूरतों को रचनाकार ने समझा और शब्दांकित किया है । उदारमना होकर सभी बोलियों की सर्वगाहî शब्दावली इस कृति को सामाजिक स्वीकृति प्रदान करेगी । इस अवसर पर शिक्षाविद सदाशिव पाराशर ने बांसुरी और माउथ आर्गन से रचनात्मक प्रस्तुति दी । रंगकर्मी रामप्रसाद पारीक ने कहा कि जल्द ही इन कहानियों पर नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी । प्रेमलता शर्मा, गुरमीत कौर ने भी विचार साझा किए ।
श्रीडूंगरगढ/बीकानेर । 1 दिसम्बर 2019 । बाल साहित्य सिर्फ मनोरंजन नहीं करता बल्कि बच्चों को समग्र रूप में संस्कारित करता है । सात्विक और मूल्यवान बाल साहित्य बच्चे की बौद्धिक और मानसिक क्षमता का विकास भी करता है । ये विचार कवि-कथाकार रवि पुरोहित ने विमला नागला के सद्य प्रकाशित राजस्थानी बाल कहानी संग्रह ‘हेत रो परवानो’ के टोडा रायसिंह के पंचायत समिति सभागार में आयोजित भव्य लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। राष्ट्र भाषा हिन्दी प्रचार समिति द्वारा प्रकाशित एवं साहित्य मंच टोडा रायसिंह के तत्वावधान में लोकार्पित कृति की कहानियों पर चर्चा करते हुए पुरोहित ने कहा कि मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का बोध कराती ये कहानियां जहां बदलते समय के बाल मनोविज्ञान को परिभाषित करती है, वहीं मातृभाषा में रचित होने के कारण ये सीधी बाल-अंतरंगता से साक्षात होती है । विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्बोधन करते हुए डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि इस तरह के बुनियादी प्रयास जो जड़ों को सींचे, मायड़ भाषा के लौकिक जुड़ाव का मार्ग तो प्रशस्त करेंगे ही, साथ ही बच्चे भी सहजता से साहित्य से जुड़ेंगे । नेगी ने कहा कि आने वाले समय में टोंक जिले के विद्यार्थियों की प्रतियोगिता इस कृति पर करवाई जाएगी ताकि बच्चे मन से बाल साहित्य से जुड़ सके । समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अमीर अहमद सुमन ने कहा कि बदलते समय की बदलती जरूरतों को रचनाकार ने समझा और शब्दांकित किया है । उदारमना होकर सभी बोलियों की सर्वगाहî शब्दावली इस कृति को सामाजिक स्वीकृति प्रदान करेगी । इस अवसर पर शिक्षाविद सदाशिव पाराशर ने बांसुरी और माउथ आर्गन से रचनात्मक प्रस्तुति दी । रंगकर्मी रामप्रसाद पारीक ने कहा कि जल्द ही इन कहानियों पर नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी । प्रेमलता शर्मा, गुरमीत कौर ने भी विचार साझा किए ।
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