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वैज्ञानिकों ने जानी पशुपालकों की समस्याएँ, ऊँट 14, गाय 326, भैंस 14, भेड़ 235, बकरी 363 एवं घोड़ी 1 के साथ आए 30 महिलाएँ एवं 105 पुरुष पशुपालक लाभान्वित हुए
बीकानेर 10 दिसम्बर । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत गांव कल्यानसर अगुनी में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। केन्द्र द्वारा आयोजित इस पशु स्वास्थ्य शिविर में विविध पशुओं जिनमें ऊँट 14, गाय 326, भैंस 14, भेड़ 235, बकरी 363 एवं घोड़ी 1 के साथ आए 30 महिलाएँ एवं 105 पुरुष पशुपालक लाभान्वित हुए।
किसान गोष्ठी कार्यक्रम में पशुपालकों से बातचीत करते हुए केन्द्र निदेषक डाॅ.आर.के.सावल ने कहा कि भारत सरकार की इस योजना के मूल उद्देष्य को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जाति क्षेत्रों में जरूरतमंदों का आधारभूत विकास करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेष में कृषि से ज्यादा पशुपालन पर अधिक निर्भरता देखी जा सकती है, ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य, उनकी देखभाल आदि के प्रति पशुपालक भाई अधिक सजगता बरतें,ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से वे जागरूक बन पषुओं की भलीभांति देखभाल कर सकेंगे और उनसे मनचाहा उत्पादन प्राप्त अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं। डाॅ.सावल ने कई महत्वपूर्ण व व्यावहारिक तरीके सुझाए ताकि पशुओं को रोग मुक्त रखा जा सके।
इस अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ.राकेष रंजन ने पशुओं में होने वाले विभिन्न रोगों, उनकी लक्षण पहचान, समस्याओं एवं उनके उचित निराकरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा कहा कि रोगग्रस्त पशुओं का समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
एससीएसपी योजना के नोडल अधिकारी डाॅ.काषीनाथ ने बताया कि षिविर में लाए गए पशुओं में मुख्यतः चीचड़, भूख कम लगना, पेट के कीड़े, दस्त लगना आदि रोग देखे गए तथा उपचार हेतु रोग संबंधित दवाइयाँ वितरित की गई। वहीं खाज-खुजली, तिबरसा रोगों एवं कमजोर पशुओं को मल्टी-विटामिन युक्त टीके लगाए गए। इस स्वास्थ्य षिविर में पशुपालकों को उनके पशुओं की पौषकता वृद्धि हेतु केन्द्र निर्मित संतुलित पषु आहार व खनिज मिश्रण का वितरण किया गया।
गोष्ठी में पशुपालकों ने वैज्ञानिकों से पशुओं संबंधी अपनी समस्याओं को साझा किया तथा बताया कि पशुओं में दस्त रोग की समस्या बहुत अधिक सामने आ रही है। इस पर उन्हें जानकारी दी गई कि इस बार मूंगफली का संक्रमित चारा खिलाने इसका एक मुख्या कारण भी हो सकता है, अतः दस्त रोग से ग्रसित पशुओं को संक्रमित मूंगफली चारा नहीं खिलाने की सलाह दी गई।
केन्द्र द्वारा आयोजित इस पशु स्वास्थ्य कैम्प में श्री मनजीत सिंह, श्री नेमीचंद एवं श्री अमित ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा/इंजेक्षन लगवाने व पशु आहार वितरण आदि विभिन्न कार्याें में सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।
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