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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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गोपीनाथ मंदिर में गूंजे रामलीला के संवाद
सब सुत मोहि प्राण की नाहीं, पर राम देत नहीं बने गुसाईं
बीकानेर। स्थानीय गर्वमेन्ट प्रेस रोड स्थित गोपीनाथ मंदिर में रविवार को रामलीला महेंद्र सिंह राजपुरोहित की स्मृति में शहरी जन कल्याण सेवा संस्थान एवं श्री राम रामलीला कमेटी द्वारा मंचित रामलीला में दूसरे दिन रामजन्म से ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने राम जन्म की कथा का ऐसा मंचन किया, जिसे देख दर्शक खुद ऐसा महसूस कर रहे थे मानो वह खुद दशरथ के महल में सभी को राम जन्म की बधाईयां दे रहेे हों। जैसे ही भगवान राम का जन्म होता वैसे ही पूरे पंडाल में भये प्रकट कृपाला दीन दयाला ......कौशाल्या हितकारी आदि शब्दों से गूंजने लगा। दूर-दूर तक राम के नाम के जयकारे गूंजने लगे। इसके बाद कलाकारों ने भगवान शिव का माता क ौशल्या के साथ संवाद और गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों के नामकरण करने की कथा का मनोहारी म ंचन किया। दशरथ के चारो राजकुमार द्वारा गुरू विशिष्ट से शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करने शस्त्र विद्या सीखने का दृश्य दिखाया गया। साथ ही दिखाया कि ऋ षि विश्वामित्र के आश्रम के आसपास राक्षस मारीच सुबाहु तथा राक्षसी ताड़का का बहुत आंतक था। यह राक्षस ऋ षि मुनियों सहित लोगों को लूट महिलाओं के साथ अत्याचार कर परेशान करते थे। महर्षि विश्वामित्र दुखी होकर राजा दशरथ के दरबार में पहुंचे और राक्षसों के विनाश के लिए राम-लक्ष्मण को साथ ले कर गए। जिन्होंने ताड़का, सुबाहु के साथ साथ सभी राक्षसों का वध कर दिया। सब सुत मोहि प्राण की नाहीं, पर राम देत नहीं बने गुसाईं। गुरु विश्वामित्र जगत कल्याण व ऋषि-मुनियों की रक्षा के लिए राजा दशरथ से तीन वचन मांगते हैं, वे सहर्ष तैयार हो जाते हैं। लेकिन जब राम को साथ ले जाने की बात कहते हैं तो राजा दशरथ दुखी होकर उक्त पंक्तियां कहने लगते हैं। यह दृश्य व राजा दशरथ के वचन सुन श्रोताओं के आ ंखों में आंसू आ गए। संयोजक खुशालचंद व्यास ने बताया कि मुख्य अतिथि राजेन्द्र व अध्यक्षता मेघराज आचार्य ने की।
इन्होनें निभाई भूमिका
विजय डावला व किशन स्वामी के नेतृत्व में चल रही रामलीला में दशरथ की भूमिका में लीलाधर तंवर,राम की भूमिका में यशवर्धन,लक्ष्मण की भूमिका में नारायण,विश्वामित्र की भूमिका में शशांक,मारीच की भूमिका में सुरेन्द्र व ताडका की भूमिका में घनश्याम व्यास ने निभाई।
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