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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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भगवान को अपने से अलग मत मानो-क्षमारामजी महाराज
कुछ भी होअपने धर्म को नहीं छोडऩा चाहिए-
बीकानेर। भगवान को अपने से अलग मत मानो, अलग ना मानने से भगवान का खूब अच्छा ज्ञान होता है। भगवान वासुदेव की कथा में जब रुची हो जाती है तो समझो अपने आत्मा के अंदर आवश्यकता पैदा हो जाती है। इसलिए श्रीमद् भागवत कथा को सुनने वालों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे कथा अपने हद्धय में बेठे भगवान को सुना रहे हैं। गोपेश्वर महादेव मंदिर में पितृ पक्ष पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए महंत क्षमारामजी महाराज ने कहा कि भगवान को अपने अंदर महसूस करना पड़ता है। भगवान कहां रहते हैं इसका कोई जवाब नहीं दे सकता। जो सदैव और सर्वत्र रहते हैं , अवर्णनीय और अकल्पनीय है उसके लिए कोई क्या बताएगा कि वे कहां रहते हैं। भागवत कथा के तीसरे दिन क्षमारामजी महाराज ने सोनक जी द्वारा सूतजी से किए गए छह प्रश्नों के विस्तृत वर्णन की जानकारी दी । क्षमारामजी महाराज ने परमात्मा है या नहीं इस बात को समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार लकड़ी में आग तो होती है लेकिन उसे जब तक जलाने का उपक्रम ना किया जाए वह नहीं जलती,इसके लिए दो लकडिय़ों में परस्पर लगातार घर्षण कर अग्नि प्रज्वलित की जाती है। ठीक इसी प्रकार परमात्मा को पाने के लिए मन में घर्षण पैदा करना पड़ता है। भगवान हमारे हद्धय में विराजमान है। वर्तमान में धर्म पर से लोगों के उठते हुए विश्वास पर कटाक्ष करते हुए क्षमारामजी महाराज ने कहा कि कुछ लोग अपने धर्म में कमी मानने लगे हैं, यह वे लोग हैं जिन्हें भगवान के अस्तित्व की जानकारी नहीं है। ऐसे लोग मजारों पर भी जाने लगे हैं, जिन्हें नियम कायदों की जानकारी नहीं है। महाराज ने कहा कि मैने सुना है कि दिल्ली में एक मशहूर मस्जिद है जहां पर मौलवी बैठता हैं। वहां कोई हिन्दू जाता है तो वह कहते हैं कि देखो भाई आप लोगों के पास कोई कमी थोड़े ही है। आप हनुमान चालीसा का पाठ करो, आप सुन्दरकाण्ड का पाठ करो, मैं तो मुसलमानों को जो इस धर्म को जानते हैं, इनके नियम कायदों को मानते हैं इस लायक बात बताता हूं, आप आये तो आपके लायक यही कि आप पर कोई कष्ट है तो आप हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड का पाठ करो। महाराज ने कहा कि कितनी अच्छी बात बोलता है। गीता कहती है कि चाहे कुछ भी हो अपने धर्म में कोई कमी रहती भी हो तो भी अपने धर्म को नहीं छोडऩा चाहिए। आज की कथा में महाराज ने पंचभूतों के प्रधान की महत्ता बताई और भक्त एवं भगवान के संबंधो की विस्तृत व्याख्या की।
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