कांग्रेस के बौद्धिक दिवालियापन की मिसाल रहा संसद का मॉनसून सत्र - ✍️ अशोक भाटी
twitter, Podcast, YouTube, साहित्य-सभागार के साथ-साथ Facebook, Pinterest, LinkedIn और Instagram पर भी आपकी खबरें Khabron Me Bikaner 🎤
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
कांग्रेस के बौद्धिक दिवालियापन की मिसाल रहा संसद का मॉनसून सत्र - ✍️ अशोक भाटी
देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल की ऐसी दुर्गति का उदाहरण शायद यूरोपियन देशों के राजनैतिक इतिहास में भी ना मिलेगा,
सदन में संख्या बल का अधिक या न्यून अथवा नगण्य हो जाना तो जनता जनार्दन के आशीर्वाद पर निर्भर करता है इस त्रासदी को भा ज पा. ने शायद कांग्रेस से कहीं अधिक झेला है । एक समय था जब सदन में कमल के दो सिपाही ही थे और मतान्ध सत्ता पक्ष चुटकी लेता था की हम दो ~ हमारे दो !
खैर ! हमे संख्या गणित में नही उलझना, भारतीय जनमानस में वर्तमान चिंता देश केे पुराने राजनीतिक दल और वर्तमान मे प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी के वैचारिक न्यूनता (अर्थशास्त्र की भाषा मे बौद्धिक दीवालियापन) की है ।
आपको 370 के हटाने पर आपत्ति हो सकती है,
हटाये जाने के तरीके पर आपत्ति हो सकती है,
आपत्ति हो ना हो ये विरोध दर्ज करवाना आपके राजनैतिक एजेंडे का भाग हो सकता है
आपके नेताओं का बहस के दौरान जम्हाईयां लेना,
चर्चा में भाग लेते समय वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं द्वारा कश्मीर में नाजी कैम्प जैसे हालात बताना [क्या चौधरी को पता है कि नाजी शासन की हक़ीक़त क्या थी ...?
बहस के दौरान कांग्रेसी नेताओं के बयान_
कश्मीर संयुक्त राष्ट्र का मामला - अधिरञ्जन चौधरी
कश्मीरी बिकाउ - गुलाम नबी आजाद
फिलिस्तीन जैसे हालात (गाजा पट्टी) - मणिसंकर अय्यर
जम्मु कश्मीर मुस्लिम डोमिनेंट स्टेट के कारण धारा 370 और 35A हटाया - पी. चिदम्बरम
कांग्रेस पृष्ठभूमि के भारतीय मूल के राजनेताओं के बयान सोनिया गांधी को विदेशी मूल की होने के बावजूद भला साबित करते हैं। ये दीगर बात है कि 370 पर चर्चा / बहस में सोनिया ने भाग तक नही लिया , शायद जरूरत भी नही थी क्योंकि जो सोनिया शायद नही बोल पाती वो तथाकथित कांग्रेस पोलिटिकल एडवाइजर्स बेझिझक बेशर्मी से बोल गये ।
बहुजन समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, बीजू जनता दल सहित अनेक राजनैतिक दलों ने NDA के घटक दल ना होने के बावजूद अपना मत अनुच्छेद 370 एवं 35 A को अप्रभावी करने के पक्ष में जाहिर किया ।
आजकल जनता जनार्दन सदन की कार्यवाही, नेताओ के बयान, नेताओं की भाव-भंगिमा (body Language) सब देखती है और प्रिंट ना सही, इलेक्ट्रॉनिक ना सही किन्तु सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Twiter / Facebook etc.) पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे देती है । सशक्त निरपेक्ष वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आ रही समसामयिक विषयक प्रतिक्रिया कॉंग्रेस के लिये दूरगामी शुभ संदेश नही है ।
( लेखक के स्वतंत्र विचार हैं, जरूरी नहीं कि ब्लॉग और ब्लॉगर सहमत हों )






यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...