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स्वामी द्वार खुलवाने लक्ष्मी को मनाने हुए विवश, लोग खुशी से जैकारे लगाते रहे
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
स्वामी द्वार खुलवाने लक्ष्मी को मनाने हुए विवश, लोग खुशी से जैकारे लगाते रहे
बीकानेर 12 जुलाई 2019 । खुशी से जैकारे लगाते लोग हैरान थे। जगत का पालनहार अपने धाम के बाहर खड़ा था मगर द्वार बंद था। लोगों ने पूछताछ की तो ज्ञात हुआ भगवान वापस आए तो नाराज लक्ष्मी ने मंदिर का दरवाजा ही बंद कर दिया । दरअसल रथ यात्रा के पांचवें दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को लेने मौसी के घर गई थी, लेकिन भगवान साथ चलने को राजी नहीं हुए। इस पर नाराज लक्ष्मी रथ भंग कर वापस चली गईं थी। इसी वजह आज माता लक्ष्मी को मनाने के लिए भगवान को लक्ष्मीजी के नाज-नखरे उठाने पड़े, मिष्ठान्न खिलाते हुए मान-मनोव्वल करनी पड़ी। जी हां, ये सब हुआ देवशयनी एकादशी को, जब मौसी के घर ( रसिक शिरोमणि मंदिर रतन बिहारी पार्क ) बीते दिनों तक रहने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने धाम जगन्नाथ मंदिर में लौट आए। भगवान के आने पर धनीनाथ पंच मंदिर के सामने स्थित जगन्नाथ मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। लौटती शोभायात्रा में जगन्नाथ जी का जगह-जगह स्वागत किया गया।
गाजे-बाजे के साथ निकली रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के जयकारे गूंज उठे। वापस घर लौट रहे भगवान का रथ खींचने के लिए भक्तगणों में होड़ लगी रही। बच्चे, युवा, महिलाएं सभी उत्साहपूर्वक रथ को खींचने में उत्साहित नजर आए। भगवान के लौटने की खुशी में शुक्रवार को महाभंडारा का आयोजन किया गया । परंपरा के अनुसार सभी अनुष्ठान करते हुए भगवान को गर्भगृह में सिंहासन पर बैठाया गया। आचार्यों ने वेद मंत्रोच्चार से भगवान को पुनःप्रतिष्ठापित किया। इससे पहले मौसी के घर से भगवान की यात्रा की पूरी तैयारियां करते हुए मंदिर में हवन और पूजा-पाठ किया गया । रथ पूजन की परंपरा का निर्वहन कर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को गगनभेदी जयकारों के बीच रथ पर बैठाया गया। सभी अनुष्ठान और परंपराओं को पुरी मंदिर की तर्ज पर ही संपन्न किया गया ।
अब चार माह लगी शुभ कार्यों पर रोक
शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने देवशयनी एकादशी का व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से देवी-देवताओं के विश्राम करने का समय शुरू हो जाता है और इसके बाद चातुर्मास मनाया जाता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार अब अगले चार माह तक चलने वाले चातुर्मास में सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी और देवउठनी एकादशी के दिन भगवान के जागने की परंपरा निभाने के बाद ही मांगलिक कार्य किए जाएंगे।
-✍️ मोहन थानवी
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️
बीकानेर। खुशी से जैकारे लगाते लोग हैरान
थे। जगत का पालनहार अपने धाम के बाहर खड़ा था
मगर द्वार बंद था। लोगों ने पूछताछ की तो ज्ञात हुआ
भगवान वापस आए तो नाराज लक्ष्मी ने मंदिर का
दरवाजा ही बंद कर दिया । दरअसल रथ यात्रा के
पांचवें दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को लेने
मौसी के घर गई थीं, लेकिन भगवान साथ चलने को
राजी नहीं हुए। इस पर नाराज लक्ष्मी रथ भंग कर
वापस चली गई थीं। इसी वजह आज माता लक्ष्मी को
मनाने के लिए भगवान को लक्ष्मीजी के नाज-नखरे
उठाने पड़े, मिष्ठान्न खिलाते हुए मान-मनोव्वल करनी
पड़ी। जी हां, ये सब हुआ देवशयनी एकादशी को,
जब मौसी के घर (रसिक शिरोमणि मंदिर रतन
बिहारी पार्क) बीते दिनों तक रहने के बाद भगवान
जगन्नाथ अपने धाम जगन्नाथ मंदिर में लौट आए।
भगवान के आने पर धनीनाथ पंच मंदिर के सामने
स्थित जगन्नाथ मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया
गया। भगवान जगन्नाथ मंदिर विकास समिति
के अध्यक्ष घनश्याम लखानी ने बताया कि इससे
पहले मौसी के घर से भगवान की यात्रा की पूरी
तैयारियां करते हुए मंदिर में हवन और पूजा-पाठ
किया गया। रथ पूजन की परंपरा का निर्वहन कर
भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को
गगनभेदी जयकारों के बीच रथ पर बैठाया गया। सभी
अनुष्ठान और परंपराओं को पुरी मंदिर की तर्ज पर ही
संपन्न किया गया। भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा
शाम को 5:30 बजे रसिक शिरोमणि मंदिर रतन
बिहारी पार्क से निकली मंदिर में पहले महाआरती हुई
फिर यहां रतन बिहारी पार्क मंदिर से भगवान जगन्नाथ
जी को रथ में आसीन करवाकर बड़ी धूमधाम से
गाजे बाजे के साथ रथ रवाना हुए।
गाजे-बाजे के साथ निकली रथयात्रा में
भगवान जगन्नाथ के जयकारे गूंज उठे। वापस घर
लौट रहे भगवान का रथ खींचने के लिए भक्तगणों में
होड़ लगी रही। बच्चे, युवा, महिलाएं सभी
उत्साहपूर्वक रथ को खींचने में उत्साहित नजर आए।
रथयात्रा के.ई.एम रोड़ कोटगेट होते हुए अंणचा बाई
हॉस्पिटल के सामने निज मंदिर पहुंची। लखानी ने
बताया कि शुक्रवार शाम को भगवान जगन्नाथ जी
जब निज मंदिर पहुंचे उसके बाद सभी भक्तगणों के
लिए निज मंदिर मे भंडारे का आयोजन किया गया ।
रथयात्रा में बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के अध्यक्ष
रघुराज सिंह राठौड़, सरंक्षक नरपत सिंह सेठिया, सुरेंद्र
पटवा, म-
खन लाल अग्रवाल, तानरतन, कैलाश
भट्टड़, जीवन लाल अग्रवाल, पीयूष सिंघवी व
भक्तगण मौजूद रहे।
परंपरा के अनुसार सभी अनुष्ठान करते हुए
भगवान को गर्भगृह में सिंहासन पर बैठाया गया।
आचार्यों ने वेद मंत्रोच्चार से भगवान को
पुन:प्रतिष्ठापित किया।
अब चार माह लगी शुभ कार्यों पर रोक
शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने देवशयनी एकादशी
का व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की।
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से देवी-देवताओं
के विश्राम करने का समय शुरू हो जाता है और
इसके बाद चातुर्मास मनाया जाता है। शास्त्रीय
मान्यता के अनुसार अब अगले चार माह तक चलने
वाले चातुर्मास में सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर
रोक लग जाएगी और देवउठनी एकादशी (जेठउनी)
के दिन भगवान के जागने की परंपरा निभाने के बाद
ही मांगलिक कार्य किए जाएंगे।
🙏
स्वामी द्वार खुलवाने लक्ष्मी को मनाने हुए विवश, लोग खुशी से जैकारे लगाते रहे
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स्वामी द्वार खुलवाने लक्ष्मी को मनाने हुए विवश, लोग खुशी से जैकारे लगाते रहे
बीकानेर 12 जुलाई 2019 । खुशी से जैकारे लगाते लोग हैरान थे। जगत का पालनहार अपने धाम के बाहर खड़ा था मगर द्वार बंद था। लोगों ने पूछताछ की तो ज्ञात हुआ भगवान वापस आए तो नाराज लक्ष्मी ने मंदिर का दरवाजा ही बंद कर दिया । दरअसल रथ यात्रा के पांचवें दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को लेने मौसी के घर गई थी, लेकिन भगवान साथ चलने को राजी नहीं हुए। इस पर नाराज लक्ष्मी रथ भंग कर वापस चली गईं थी। इसी वजह आज माता लक्ष्मी को मनाने के लिए भगवान को लक्ष्मीजी के नाज-नखरे उठाने पड़े, मिष्ठान्न खिलाते हुए मान-मनोव्वल करनी पड़ी। जी हां, ये सब हुआ देवशयनी एकादशी को, जब मौसी के घर ( रसिक शिरोमणि मंदिर रतन बिहारी पार्क ) बीते दिनों तक रहने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने धाम जगन्नाथ मंदिर में लौट आए। भगवान के आने पर धनीनाथ पंच मंदिर के सामने स्थित जगन्नाथ मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। लौटती शोभायात्रा में जगन्नाथ जी का जगह-जगह स्वागत किया गया।
गाजे-बाजे के साथ निकली रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के जयकारे गूंज उठे। वापस घर लौट रहे भगवान का रथ खींचने के लिए भक्तगणों में होड़ लगी रही। बच्चे, युवा, महिलाएं सभी उत्साहपूर्वक रथ को खींचने में उत्साहित नजर आए। भगवान के लौटने की खुशी में शुक्रवार को महाभंडारा का आयोजन किया गया । परंपरा के अनुसार सभी अनुष्ठान करते हुए भगवान को गर्भगृह में सिंहासन पर बैठाया गया। आचार्यों ने वेद मंत्रोच्चार से भगवान को पुनःप्रतिष्ठापित किया। इससे पहले मौसी के घर से भगवान की यात्रा की पूरी तैयारियां करते हुए मंदिर में हवन और पूजा-पाठ किया गया । रथ पूजन की परंपरा का निर्वहन कर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को गगनभेदी जयकारों के बीच रथ पर बैठाया गया। सभी अनुष्ठान और परंपराओं को पुरी मंदिर की तर्ज पर ही संपन्न किया गया ।
अब चार माह लगी शुभ कार्यों पर रोक
शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने देवशयनी एकादशी का व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से देवी-देवताओं के विश्राम करने का समय शुरू हो जाता है और इसके बाद चातुर्मास मनाया जाता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार अब अगले चार माह तक चलने वाले चातुर्मास में सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी और देवउठनी एकादशी के दिन भगवान के जागने की परंपरा निभाने के बाद ही मांगलिक कार्य किए जाएंगे।
-✍️ मोहन थानवी
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️
थे। जगत का पालनहार अपने धाम के बाहर खड़ा था
मगर द्वार बंद था। लोगों ने पूछताछ की तो ज्ञात हुआ
भगवान वापस आए तो नाराज लक्ष्मी ने मंदिर का
दरवाजा ही बंद कर दिया । दरअसल रथ यात्रा के
पांचवें दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को लेने
मौसी के घर गई थीं, लेकिन भगवान साथ चलने को
राजी नहीं हुए। इस पर नाराज लक्ष्मी रथ भंग कर
वापस चली गई थीं। इसी वजह आज माता लक्ष्मी को
मनाने के लिए भगवान को लक्ष्मीजी के नाज-नखरे
उठाने पड़े, मिष्ठान्न खिलाते हुए मान-मनोव्वल करनी
पड़ी। जी हां, ये सब हुआ देवशयनी एकादशी को,
जब मौसी के घर (रसिक शिरोमणि मंदिर रतन
बिहारी पार्क) बीते दिनों तक रहने के बाद भगवान
जगन्नाथ अपने धाम जगन्नाथ मंदिर में लौट आए।
भगवान के आने पर धनीनाथ पंच मंदिर के सामने
स्थित जगन्नाथ मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया
गया। भगवान जगन्नाथ मंदिर विकास समिति
के अध्यक्ष घनश्याम लखानी ने बताया कि इससे
पहले मौसी के घर से भगवान की यात्रा की पूरी
तैयारियां करते हुए मंदिर में हवन और पूजा-पाठ
किया गया। रथ पूजन की परंपरा का निर्वहन कर
भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को
गगनभेदी जयकारों के बीच रथ पर बैठाया गया। सभी
अनुष्ठान और परंपराओं को पुरी मंदिर की तर्ज पर ही
संपन्न किया गया। भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा
शाम को 5:30 बजे रसिक शिरोमणि मंदिर रतन
बिहारी पार्क से निकली मंदिर में पहले महाआरती हुई
फिर यहां रतन बिहारी पार्क मंदिर से भगवान जगन्नाथ
जी को रथ में आसीन करवाकर बड़ी धूमधाम से
गाजे बाजे के साथ रथ रवाना हुए।
गाजे-बाजे के साथ निकली रथयात्रा में
भगवान जगन्नाथ के जयकारे गूंज उठे। वापस घर
लौट रहे भगवान का रथ खींचने के लिए भक्तगणों में
होड़ लगी रही। बच्चे, युवा, महिलाएं सभी
उत्साहपूर्वक रथ को खींचने में उत्साहित नजर आए।
रथयात्रा के.ई.एम रोड़ कोटगेट होते हुए अंणचा बाई
हॉस्पिटल के सामने निज मंदिर पहुंची। लखानी ने
बताया कि शुक्रवार शाम को भगवान जगन्नाथ जी
जब निज मंदिर पहुंचे उसके बाद सभी भक्तगणों के
लिए निज मंदिर मे भंडारे का आयोजन किया गया ।
रथयात्रा में बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के अध्यक्ष
रघुराज सिंह राठौड़, सरंक्षक नरपत सिंह सेठिया, सुरेंद्र
पटवा, म-
खन लाल अग्रवाल, तानरतन, कैलाश
भट्टड़, जीवन लाल अग्रवाल, पीयूष सिंघवी व
भक्तगण मौजूद रहे।
परंपरा के अनुसार सभी अनुष्ठान करते हुए
भगवान को गर्भगृह में सिंहासन पर बैठाया गया।
आचार्यों ने वेद मंत्रोच्चार से भगवान को
पुन:प्रतिष्ठापित किया।
अब चार माह लगी शुभ कार्यों पर रोक
शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने देवशयनी एकादशी
का व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की।
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से देवी-देवताओं
के विश्राम करने का समय शुरू हो जाता है और
इसके बाद चातुर्मास मनाया जाता है। शास्त्रीय
मान्यता के अनुसार अब अगले चार माह तक चलने
वाले चातुर्मास में सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर
रोक लग जाएगी और देवउठनी एकादशी (जेठउनी)
के दिन भगवान के जागने की परंपरा निभाने के बाद
ही मांगलिक कार्य किए जाएंगे।







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