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ग्रहण का स्पर्श रात्रि 01:31 पर, मध्य रात्रि 03:01 पर, मोक्ष मध्य रात्रि 04:30 पर
■ ज्योर्तिविद् श्री विमल जैन
गुरु पूर्णिमा पर खण्डग्रास चन्द्रग्रहण का अनुपम संयोग वृष, कन्या, तुला और कुम्भ राशि वाले होंगे विशेष लाभान्वित
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
ग्रहण का स्पर्श रात्रि 01:31 पर, मध्य रात्रि 03:01 पर, मोक्ष मध्य रात्रि 04:30 पर
■ ज्योर्तिविद् श्री विमल जैन
गुरु पूर्णिमा पर खण्डग्रास चन्द्रग्रहण का अनुपम संयोग वृष, कन्या, तुला और कुम्भ राशि वाले होंगे विशेष लाभान्वित
सम्पूर्ण भारत में दृश्य प्रथम खण्डग्रास चन्द्रग्रहण 16
जुलाई, मंगलवार को दिखाई देगा। यह ग्रहण पूर्वाषाढ़ा/उत्तराषाढ़ा
नक्षत्र एवं धनु/मकर राशि पर लगेगा। ग्रहण स्पर्श के समय
चन्द्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, धनु राशि में और मोक्ष के समय
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, मकर राशि में सूर्योदय के पूर्व हो रहा है।
चन्द्रग्रहण के समय सूर्य-शुक्र-राहु मिथुन राशि में, मंगल-बुध
कर्क राशि में, गुरु वृश्चिक राशि में, चन्द्रमा-शनि-केतु धनु राशि
में उपस्थित रहेंगे।
खण्डग्रास के रूप में यह चन्द्रग्रहण दक्षिण अमेरिका,
स्केन्डिनेविया के ध्रुव उत्तरी भाग को छोड़कर सम्पूर्ण यूरोप में
चन्द्रास्त के समय ग्रहण का स्पर्श न्यूजीलैण्ड के कुछ भाग,
आस्ट्रेलिया के पूर्वी बाग, दक्षिण एवं उत्तरी कोरिया, चीन का उत्तर
पूर्वी भाग एवं रूस के कुछ भाग में दृश्य है। ग्रहण मोक्ष चन्द्रोदय
के समय अर्जेन्टिना, चिली, बोलविया, ब्राजील के पश्ïिचम भाग,
पेरू और उ ारी अन्ध महासागर में दृश्य है। आस्ट्रेलिया, प्रशान्त
महासागर, हिन्द महासागर और अन्टार्कटिका के दृश्य है।
प्र यात ज्योतिॢवद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूॢणमा तिथि 15 जुलाई, सोमवार को
अर्द्ध रात्रि के पश्चात 01 बजकर 49 मिनट पर लग रही है, जो
कि 16 जुलाई, मंगलवार को अर्द्ध रात्रि के पश्चात् 03 बजकर
08 मिनट तक रहेगी। इस दिन लगने वाला चन्द्रग्रहण का स्पर्श
रात्रि 01 बजकर 31 मिनट पर, ग्रहण का मध्य रात्रि 03 बजकर
01 मिनट पर तथा ग्रहण का मोक्ष मध्य रात्रि 04 बजकर 30
मिनट पर होगा। चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 9 घंटे पूर्व
प्रारम्भ हो जाता है। ग्रहण के स्पर्श, मध्य एवं मोक्ष के समय स्नान
करना चाहिए।
ज्योतिषविद् श्री विमल जैन ने बताया कि सूतक काल के
आरंभ होने के पूर्व मंदिरों के कपाट बन्द हो जाते हैं। सूतक काल
में हास्य-विनोद, मनोरंजन, शयन, भोजन, देवी-देवता के मूर्ति या
विग्रह का स्पर्श करना, व्यर्थ वार्तालाप, अकारण भ्रमण, वाद-
विवाद करना आदि वर्जित है। इस काल में यथासम्भव मौन-व्रत
रहते हुए अपने दैनिक जरूरी कार्यों को संपन्न करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखना पूर्णतया वॢजत है। बालक व
वृद्ध एवं रोगी पथ्य एवं दवा आदि ग्रहण कर सकते हैं। भोजन,
दूध व जल की शुचिता के लिए उसमें तुलसी के प ो या कुश
रखना चाहिए। यथास भव एकान्त स्थान पर अपने आराध्य देवी-
देवता को स्मरण करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिए। ग्रहण
मोक्ष के पश्चात् स्नानोपरान्त देव-दर्शन करके यथासामथ्र्य दान
करना चाहिए।
ग्रहयोगों के फलस्वरूप चन्द्रग्रहण का प्रभाव विश्वपटल
पर भी अपना विशेष प्रभाव छोड़ेगा। जिसके फलस्वरूप विश्व
के अनेक राष्ट्र प्रभावित होंगे। राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में विशेष
हलचल, शेयर, वायदा व धातु बाजार में घटा-बढ़ी के साथ
उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। दैविक आपदाएँ, जल-थल वायु
दुर्घटनाओं का प्रकोप तथा कहीं-कहीं पर आगजनी की आशंका
रहेगी। कई देशों में स ाा परिवर्तन व पक्ष-विपक्ष में आरोप-
प्रत्यारोप बढ़ेंगे। मौसम में भी अजीबो-गरीब परिवर्तन होगा।
दैविक आपदाएँ भी प्रभावी रहेंगी। आॢथक व राजनैतिक घोटाले
भी शासक-प्रशासक पक्ष के लिए सिरदर्द बनेंगे। ज्योतिॢवद श्री
विमल जैन ने बताया कि जिन जातकों को शनिग्रह की अढ़ैया
अथवा साढ़ेसाती हो या जन्मकुण्डली के अनुसार ग्रहों की
महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा प्रतिकूल हो तथा चन्द्रग्रह के
साथ राहु या केतु हों, उन्हें ग्रहणकाल में विशेष सावधानी बरतनी
चाहिए। साथ ही चन्द्रग्रह से स बन्धित मन्त्र का मानसिक जप
करें तथा अपने इष्टï देवी-देवता की मानसिक आराधना करें।
चन्द्रग्रहण से द्वादश राशियाँ भी प्रभावित होंगी जिनका प्रभाव इस
प्रकार है—
ेष— कार्यों में बाधा। क्रोध की अधिकता। दा पत्य जीवन
में कटुता। आय में न्यूनता। योजना पूर्ति में बाधा। यात्रा
निराशाजनकï।
वृषभ— नवीन कार्यों की योजना। प्रगति का मार्ग प्रशस्त।
धन का लाभ। जीवन में मधुरता। आरोग्य सुख। यशमान
प्रतिष्ठïा में वृद्धि।
मिथुन— ग्रहस्थिति निराशाजनक। विचारों में उग्रता। जीवन
साथी से कष्टï। समस्याओं से परेशानी। आशाएँ अधूरी।
आत्मविश्वास में कमी।
कर्क— कार्य व्यवसाय में निराशा। स्पष्टïवादिता घातक।
स्वास्थ्य प्रतिकूल। वाहन से कष्ट। वाद-विवाद से हानि। मित्रों
से अनबन।
ङ्क्षसह— नवयोजना अधूरी। धन का अभाव। विचारों में
उग्रता। वाद विवाद की आशंका। कार्यों में उदासीनता। दुर्घटना
संभव।
कन्या— भाग्योन्नति का मार्ग प्रशस्त। आरोग्य सुख।
जीवनसाथी से सामंजस्य। यात्रा का प्रसंग। बौद्धिक क्षमता का
विकास।
तुला— धार्मिक गतिविधियों में रुचि। कार्यों के बनने से
प्रसन्नता। उच्चाधिकारियों से स पर्क। लाभ की स्थिति। धार्मिक
यात्रा का प्रसंग।
वृश्चिक— विश्वासघात की आशंका। प्रियजनों से अनबन।
वाद विवाद की आशंका। व्यवसाय में अड़चनें। यात्रा
असंतोषजनक।
धनु— लाभ में कमी। जोखिम से नुकसान। विश्वासघात की
आशंका। एकाग्रता का अभाव। मानसिक अशांति। यात्रा से
हानि।
मकर— विरोधी प्रभावी। लाभार्जन का मार्ग अवरुद्ध।
राजकीय पक्ष से कष्टï। कार्य क्षमता में कमी। धनागम में बाधा।
मनोबल में कमी।
कु भ— कार्य प्रगति पर। दा पत्य जीवन में सुख शांति। धन
संचय में रुचि। आनन्द की अनुभूति। बौद्धिक क्षमता का
विकास। हर्ष भी।
मीन— प्रतिष्ठïा पर आघात। क्रोध की अधिकता। दुर्घटना की
स भावना। धन का अभाव। विश्वासघात की आशंका। व्यर्थ
भ्रमण
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️
🙏
ग्रहण का स्पर्श रात्रि 01:31 पर, मध्य रात्रि 03:01 पर, मोक्ष मध्य रात्रि 04:30 पर
■ ज्योर्तिविद् श्री विमल जैन
गुरु पूर्णिमा पर खण्डग्रास चन्द्रग्रहण का अनुपम संयोग वृष, कन्या, तुला और कुम्भ राशि वाले होंगे विशेष लाभान्वित
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
ग्रहण का स्पर्श रात्रि 01:31 पर, मध्य रात्रि 03:01 पर, मोक्ष मध्य रात्रि 04:30 पर
■ ज्योर्तिविद् श्री विमल जैन
गुरु पूर्णिमा पर खण्डग्रास चन्द्रग्रहण का अनुपम संयोग वृष, कन्या, तुला और कुम्भ राशि वाले होंगे विशेष लाभान्वित
सम्पूर्ण भारत में दृश्य प्रथम खण्डग्रास चन्द्रग्रहण 16
जुलाई, मंगलवार को दिखाई देगा। यह ग्रहण पूर्वाषाढ़ा/उत्तराषाढ़ा
नक्षत्र एवं धनु/मकर राशि पर लगेगा। ग्रहण स्पर्श के समय
चन्द्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, धनु राशि में और मोक्ष के समय
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, मकर राशि में सूर्योदय के पूर्व हो रहा है।
चन्द्रग्रहण के समय सूर्य-शुक्र-राहु मिथुन राशि में, मंगल-बुध
कर्क राशि में, गुरु वृश्चिक राशि में, चन्द्रमा-शनि-केतु धनु राशि
में उपस्थित रहेंगे।
खण्डग्रास के रूप में यह चन्द्रग्रहण दक्षिण अमेरिका,
स्केन्डिनेविया के ध्रुव उत्तरी भाग को छोड़कर सम्पूर्ण यूरोप में
चन्द्रास्त के समय ग्रहण का स्पर्श न्यूजीलैण्ड के कुछ भाग,
आस्ट्रेलिया के पूर्वी बाग, दक्षिण एवं उत्तरी कोरिया, चीन का उत्तर
पूर्वी भाग एवं रूस के कुछ भाग में दृश्य है। ग्रहण मोक्ष चन्द्रोदय
के समय अर्जेन्टिना, चिली, बोलविया, ब्राजील के पश्ïिचम भाग,
पेरू और उ ारी अन्ध महासागर में दृश्य है। आस्ट्रेलिया, प्रशान्त
महासागर, हिन्द महासागर और अन्टार्कटिका के दृश्य है।
प्र यात ज्योतिॢवद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूॢणमा तिथि 15 जुलाई, सोमवार को
अर्द्ध रात्रि के पश्चात 01 बजकर 49 मिनट पर लग रही है, जो
कि 16 जुलाई, मंगलवार को अर्द्ध रात्रि के पश्चात् 03 बजकर
08 मिनट तक रहेगी। इस दिन लगने वाला चन्द्रग्रहण का स्पर्श
रात्रि 01 बजकर 31 मिनट पर, ग्रहण का मध्य रात्रि 03 बजकर
01 मिनट पर तथा ग्रहण का मोक्ष मध्य रात्रि 04 बजकर 30
मिनट पर होगा। चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 9 घंटे पूर्व
प्रारम्भ हो जाता है। ग्रहण के स्पर्श, मध्य एवं मोक्ष के समय स्नान
करना चाहिए।
ज्योतिषविद् श्री विमल जैन ने बताया कि सूतक काल के
आरंभ होने के पूर्व मंदिरों के कपाट बन्द हो जाते हैं। सूतक काल
में हास्य-विनोद, मनोरंजन, शयन, भोजन, देवी-देवता के मूर्ति या
विग्रह का स्पर्श करना, व्यर्थ वार्तालाप, अकारण भ्रमण, वाद-
विवाद करना आदि वर्जित है। इस काल में यथासम्भव मौन-व्रत
रहते हुए अपने दैनिक जरूरी कार्यों को संपन्न करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखना पूर्णतया वॢजत है। बालक व
वृद्ध एवं रोगी पथ्य एवं दवा आदि ग्रहण कर सकते हैं। भोजन,
दूध व जल की शुचिता के लिए उसमें तुलसी के प ो या कुश
रखना चाहिए। यथास भव एकान्त स्थान पर अपने आराध्य देवी-
देवता को स्मरण करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिए। ग्रहण
मोक्ष के पश्चात् स्नानोपरान्त देव-दर्शन करके यथासामथ्र्य दान
करना चाहिए।
ग्रहयोगों के फलस्वरूप चन्द्रग्रहण का प्रभाव विश्वपटल
पर भी अपना विशेष प्रभाव छोड़ेगा। जिसके फलस्वरूप विश्व
के अनेक राष्ट्र प्रभावित होंगे। राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में विशेष
हलचल, शेयर, वायदा व धातु बाजार में घटा-बढ़ी के साथ
उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। दैविक आपदाएँ, जल-थल वायु
दुर्घटनाओं का प्रकोप तथा कहीं-कहीं पर आगजनी की आशंका
रहेगी। कई देशों में स ाा परिवर्तन व पक्ष-विपक्ष में आरोप-
प्रत्यारोप बढ़ेंगे। मौसम में भी अजीबो-गरीब परिवर्तन होगा।
दैविक आपदाएँ भी प्रभावी रहेंगी। आॢथक व राजनैतिक घोटाले
भी शासक-प्रशासक पक्ष के लिए सिरदर्द बनेंगे। ज्योतिॢवद श्री
विमल जैन ने बताया कि जिन जातकों को शनिग्रह की अढ़ैया
अथवा साढ़ेसाती हो या जन्मकुण्डली के अनुसार ग्रहों की
महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा प्रतिकूल हो तथा चन्द्रग्रह के
साथ राहु या केतु हों, उन्हें ग्रहणकाल में विशेष सावधानी बरतनी
चाहिए। साथ ही चन्द्रग्रह से स बन्धित मन्त्र का मानसिक जप
करें तथा अपने इष्टï देवी-देवता की मानसिक आराधना करें।
चन्द्रग्रहण से द्वादश राशियाँ भी प्रभावित होंगी जिनका प्रभाव इस
प्रकार है—
ेष— कार्यों में बाधा। क्रोध की अधिकता। दा पत्य जीवन
में कटुता। आय में न्यूनता। योजना पूर्ति में बाधा। यात्रा
निराशाजनकï।
वृषभ— नवीन कार्यों की योजना। प्रगति का मार्ग प्रशस्त।
धन का लाभ। जीवन में मधुरता। आरोग्य सुख। यशमान
प्रतिष्ठïा में वृद्धि।
मिथुन— ग्रहस्थिति निराशाजनक। विचारों में उग्रता। जीवन
साथी से कष्टï। समस्याओं से परेशानी। आशाएँ अधूरी।
आत्मविश्वास में कमी।
कर्क— कार्य व्यवसाय में निराशा। स्पष्टïवादिता घातक।
स्वास्थ्य प्रतिकूल। वाहन से कष्ट। वाद-विवाद से हानि। मित्रों
से अनबन।
ङ्क्षसह— नवयोजना अधूरी। धन का अभाव। विचारों में
उग्रता। वाद विवाद की आशंका। कार्यों में उदासीनता। दुर्घटना
संभव।
कन्या— भाग्योन्नति का मार्ग प्रशस्त। आरोग्य सुख।
जीवनसाथी से सामंजस्य। यात्रा का प्रसंग। बौद्धिक क्षमता का
विकास।
तुला— धार्मिक गतिविधियों में रुचि। कार्यों के बनने से
प्रसन्नता। उच्चाधिकारियों से स पर्क। लाभ की स्थिति। धार्मिक
यात्रा का प्रसंग।
वृश्चिक— विश्वासघात की आशंका। प्रियजनों से अनबन।
वाद विवाद की आशंका। व्यवसाय में अड़चनें। यात्रा
असंतोषजनक।
धनु— लाभ में कमी। जोखिम से नुकसान। विश्वासघात की
आशंका। एकाग्रता का अभाव। मानसिक अशांति। यात्रा से
हानि।
मकर— विरोधी प्रभावी। लाभार्जन का मार्ग अवरुद्ध।
राजकीय पक्ष से कष्टï। कार्य क्षमता में कमी। धनागम में बाधा।
मनोबल में कमी।
कु भ— कार्य प्रगति पर। दा पत्य जीवन में सुख शांति। धन
संचय में रुचि। आनन्द की अनुभूति। बौद्धिक क्षमता का
विकास। हर्ष भी।
मीन— प्रतिष्ठïा पर आघात। क्रोध की अधिकता। दुर्घटना की
स भावना। धन का अभाव। विश्वासघात की आशंका। व्यर्थ
भ्रमण
( साभार - युगपक्ष/ ज्योतिर्विद् पं विमल जैन )
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