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गर्मी में पशुओं को राहत : भारवहन करने वाले पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक मुक्त रखने के निर्देश
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गर्मी में पशुओं को राहत
भारवहन करने वाले पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक मुक्त रखने के निर्देश
बीकानेर, 11 जून। जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने गर्मी के प्रकोप के मद्देनजर भारवहन करने वाले पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक कार्य से मुक्त रखने के निर्देश दिए हैं।
गौतम ने कहा कि गर्मी के मौसम में इन पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक काम न करवाएं। गौतम ने इस सम्बंध में पशुपालन विभाग को आदेश जारी कर इसकी अनुपालना सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में तापमान की प्रतिकूल परिस्थितियां बनी हुई है। प्रतिवर्ष प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने के कारण हजारों पशु काल का ग्रास बन जाते हैं। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत पशुओं को क्रूरता से बचाने का प्रावधान है, पशुओं के साथ क्रूर व्यवहार करना एक गंभीर अपराध माना जाएगा। पशुधारक इस बात का भी ध्यान रखे कि पशुओं पर क्षमता से अधिक भार न ढोया जाए। उन्होंने बताया कि पशुओं के साथ क्रूर व्यवहार करता पाए जाने पर सम्बंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।
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एनआरसीसी के पशु स्वास्थ्य कैम्प में उमड़े पशुपालक
बीकानेर, 11 जून। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत मंगलवार को गांव गीगासर में पशु स्वास्थ्य षिविर एवं वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। गीगासर के उपस्वास्थ्य केन्द्र में आयोजित इस पशु स्वास्थ्य षिविर में 1101 विविध पशुओं जिनमें ऊँट 48, गाय 574, भैंस 50 एवं 429 भेड़/बकरी के साथ आए 137 महिला एवं पुरुष पशुपालक लाभान्वित हुए।
निदेषक डॉ.आर.के.सावल ने संवाद कार्यक्रम में पशुपालकों को से कहा कि इस योजना का मूल उद्देष्य अनुसूचित जाति क्षेत्रों में विभिन्न घटकों के तहत जरूरतमंदों का ढांचागत विकास सुनिष्चित करना है। इसके तहत एनआरसीसी अपने कार्यक्षेत्र के अनुरूप इन क्षेत्रों में अधिकाधिक पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से पशुओं का रखरखाव, बीमारियों के इलाज के साथ-साथ उनके बेहतर स्वास्थ्य हेतु उचित समाधान सुझाते हुए उन्हें जागरूक बनाने की दिषा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से पशुओं से बेहतर उत्पादन प्राप्त होगा तथा जमीनी स्तर पर पशुपालकों की आजीविका में सुधार लाया जा सकता है।
एससीएसपी योजना के नोडल अधिकारी डॉ.काषीनाथ ने बताया कि षिविर में लाए गए पशुओं में चीचड़, खाज-खुजली, भूख कम लगना, पेट के कीड़े, दस्त लगना, मिट्टी खाना आदि के उपचार हेतु दवा दी गई। षिविर में पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु कमजोर पशुओं को मल्टी विटामिनयुक्त इंजेक्षन लगाए गए। साथ ही पौषकता में वृद्धि हेतु केन्द्र निर्मित संतुलित पषु आहार व खनिज मिश्रण का वितरण किया गया।
इस अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.सुमन्त व्यास ने पशुओं में होने वाली विभिन्न प्रजनन संबंधी समस्याओं एवं उनके उचित निराकरण के बारे में जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एफ.सी.टुटेजा ने पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु पशुओं के उचित प्रबन्धन व इलाज के द्वारा खाज-खुजली एवं अन्य बीमारियों से बचाव हेतु जानकारी दी।
केन्द्र द्वारा गीगासर में आयोजित इस पशु स्वास्थ्य कैम्प में रामदयाल, मनजीत सिंह, हरपाल सिंह, राधाकृष्ण एवं सतनाम सिंह, नेमीचंद ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा व पशु आहार वितरण, ऊँट गाड़ों में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु रिफलेक्टर्स लगाने जैसे कार्याें में सहयोग प्रदान किया गया।
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गर्मी में पशुओं को राहत : भारवहन करने वाले पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक मुक्त रखने के निर्देश
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गर्मी में पशुओं को राहत
भारवहन करने वाले पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक मुक्त रखने के निर्देश
बीकानेर, 11 जून। जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने गर्मी के प्रकोप के मद्देनजर भारवहन करने वाले पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक कार्य से मुक्त रखने के निर्देश दिए हैं।
गौतम ने कहा कि गर्मी के मौसम में इन पशुओं को दोपहर 12 से 3 बजे तक काम न करवाएं। गौतम ने इस सम्बंध में पशुपालन विभाग को आदेश जारी कर इसकी अनुपालना सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में तापमान की प्रतिकूल परिस्थितियां बनी हुई है। प्रतिवर्ष प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने के कारण हजारों पशु काल का ग्रास बन जाते हैं। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत पशुओं को क्रूरता से बचाने का प्रावधान है, पशुओं के साथ क्रूर व्यवहार करना एक गंभीर अपराध माना जाएगा। पशुधारक इस बात का भी ध्यान रखे कि पशुओं पर क्षमता से अधिक भार न ढोया जाए। उन्होंने बताया कि पशुओं के साथ क्रूर व्यवहार करता पाए जाने पर सम्बंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।
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एनआरसीसी के पशु स्वास्थ्य कैम्प में उमड़े पशुपालक
बीकानेर, 11 जून। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत मंगलवार को गांव गीगासर में पशु स्वास्थ्य षिविर एवं वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। गीगासर के उपस्वास्थ्य केन्द्र में आयोजित इस पशु स्वास्थ्य षिविर में 1101 विविध पशुओं जिनमें ऊँट 48, गाय 574, भैंस 50 एवं 429 भेड़/बकरी के साथ आए 137 महिला एवं पुरुष पशुपालक लाभान्वित हुए।
निदेषक डॉ.आर.के.सावल ने संवाद कार्यक्रम में पशुपालकों को से कहा कि इस योजना का मूल उद्देष्य अनुसूचित जाति क्षेत्रों में विभिन्न घटकों के तहत जरूरतमंदों का ढांचागत विकास सुनिष्चित करना है। इसके तहत एनआरसीसी अपने कार्यक्षेत्र के अनुरूप इन क्षेत्रों में अधिकाधिक पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से पशुओं का रखरखाव, बीमारियों के इलाज के साथ-साथ उनके बेहतर स्वास्थ्य हेतु उचित समाधान सुझाते हुए उन्हें जागरूक बनाने की दिषा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से पशुओं से बेहतर उत्पादन प्राप्त होगा तथा जमीनी स्तर पर पशुपालकों की आजीविका में सुधार लाया जा सकता है।
एससीएसपी योजना के नोडल अधिकारी डॉ.काषीनाथ ने बताया कि षिविर में लाए गए पशुओं में चीचड़, खाज-खुजली, भूख कम लगना, पेट के कीड़े, दस्त लगना, मिट्टी खाना आदि के उपचार हेतु दवा दी गई। षिविर में पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु कमजोर पशुओं को मल्टी विटामिनयुक्त इंजेक्षन लगाए गए। साथ ही पौषकता में वृद्धि हेतु केन्द्र निर्मित संतुलित पषु आहार व खनिज मिश्रण का वितरण किया गया।
इस अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.सुमन्त व्यास ने पशुओं में होने वाली विभिन्न प्रजनन संबंधी समस्याओं एवं उनके उचित निराकरण के बारे में जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एफ.सी.टुटेजा ने पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु पशुओं के उचित प्रबन्धन व इलाज के द्वारा खाज-खुजली एवं अन्य बीमारियों से बचाव हेतु जानकारी दी।
केन्द्र द्वारा गीगासर में आयोजित इस पशु स्वास्थ्य कैम्प में रामदयाल, मनजीत सिंह, हरपाल सिंह, राधाकृष्ण एवं सतनाम सिंह, नेमीचंद ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा व पशु आहार वितरण, ऊँट गाड़ों में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु रिफलेक्टर्स लगाने जैसे कार्याें में सहयोग प्रदान किया गया।
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