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Khabron Me Bikaner 🎤
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ऋणी को दो लाख पांच हजार रूपये क्षतिपूर्ति राशि व बैंक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश,
स्थाई लोक अदालत ने दिए आदेश
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ऋणी को दो लाख पांच हजार रूपये क्षतिपूर्ति राशि व बैंक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश।
स्थाई लोक अदालत ने दिए आदेश
बीकानेर, 31 मई। स्थाई लोक अदालत बीकानेर के समक्ष प्रार्थी ज्ञानप्रकाश व प्रेमप्रकाश ने एक प्रार्थना पत्र एस.बी.आई. बैंक ब्रांच मोमासर व पी.पी. ब्रांच के विरूद्ध प्रस्तुत किया था।
प्रार्थीगण की एक खातेदारी कृषि भूमि रोही मौजा मोमासर पटवार हल्का भू.अभि.नि. क्षेत्र आडसर में कुल 8.97 हैक्टर अपने कब्जा काश्त में स्थित है। प्रार्थीगण ने अपनी भूमि को सुधारने एवं जमीन को काश्त योग्य उपजाऊ बनाने के लिये एस.बी.आई. शाखा मोमासर के प्रबंधक के समक्ष भूमि पर किसान क्रेडिट कार्ड बनाने हेतु रहन रखकर ऋण लेने का आवेदन किया। अप्रार्थी द्वारा केसीसी बनवाने हेतु सर्च रिपोर्ट करवाई। जो अपने नियुक्त विधि सलाहकार द्वारा सर्च रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद अप्रार्थी द्वारा राजस्व रिकाॅर्ड में बैंक के नाम भूमि रहन किये जाने का इन्द्राज किये जाने का दस्तावेज जारी किया गया। प्रार्थीगण ने 01 नवम्बर .2017 को भूमि रहन करने का इन्द्राज अप्रार्थी के यहां पेश किया। परंतु अप्रार्थी के द्वारा जमीन को रहन करने के बाद भी केसीसी ऋण स्वीकृत नहीं किया। जिस पर स्थाई लोक अदालत अध्यक्ष डाॅ॰ कमलदत्त एवं सदस्यगण श्री दयाराम गोदारा व श्रीमती मधुलिका आचार्य ने पक्षकारान की सुनवाई करते हुए अप्रार्थीगण को आदेश दिया कि अप्रार्थीगण प्रार्थीगण को केसीसी ऋण की सुविधा एक माह के भीतर उपलब्ध करवाये, साथ ही रूपये दो लाख की राशि, इतने लम्बे समय तक प्रार्थीगण की भूमि रहन रखी जाने के लिये और समय पर प्रार्थीगण को ऋण उपलब्ध नहीं करवाये जाने के कारण तथा प्रार्थीगण को कारित मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के लिये अप्रार्थीगण द्वारा प्रार्थीगण को अदा किया जावे व रूपये पांच हजार भी बतौर परिवाद व्यय भी अप्रार्थीगण प्रार्थीगण को अदा करेंगे। उक्त राशि अप्रार्थीगण द्वारा प्रार्थीगण को एक माह में अदा की जाये। यदि एक माह में ऋण स्वीकार किया जाकर ऋण प्रार्थीगण को उपलब्ध नहीं करवाया जाता है तो अप्रार्थीगण पर संयुक्त रूप से व पृथकः-पृथकः एक हजार रूपये प्रतिदिन बतौर क्षतिपूर्ति देय होगा एवं उक्त राशि दो लाख पांच हजार रूपये की राशि भी एक माह में अदा नहीं होती है तो उस पर अप्रार्थीगण द्वारा 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ताअदायगी ब्याज भी देय होगा। बैंक द्वारा उक्त राशि जो दो लाख पांच हजार रूपये अदा की जायेगी वह राशि एवं उसके पश्चात् एक हजार रूपये प्रतिदिन के जो अदा करने होंगे वह समस्त राशि संबंधित तत्कालीन अधिकारी एवं अन्य दोषी अधिकारियों से वसूली जायेगी साथ ही बैंक तत्कालीन अधिकारी एवं अन्य दोषी अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही भी अमल मंे ले। उक्त प्रकरण में प्रार्थी अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने पैरवी की।
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ऋणी को दो लाख पांच हजार रूपये क्षतिपूर्ति राशि व बैंक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश,
स्थाई लोक अदालत ने दिए आदेश
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ऋणी को दो लाख पांच हजार रूपये क्षतिपूर्ति राशि व बैंक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश।
स्थाई लोक अदालत ने दिए आदेश
बीकानेर, 31 मई। स्थाई लोक अदालत बीकानेर के समक्ष प्रार्थी ज्ञानप्रकाश व प्रेमप्रकाश ने एक प्रार्थना पत्र एस.बी.आई. बैंक ब्रांच मोमासर व पी.पी. ब्रांच के विरूद्ध प्रस्तुत किया था।
प्रार्थीगण की एक खातेदारी कृषि भूमि रोही मौजा मोमासर पटवार हल्का भू.अभि.नि. क्षेत्र आडसर में कुल 8.97 हैक्टर अपने कब्जा काश्त में स्थित है। प्रार्थीगण ने अपनी भूमि को सुधारने एवं जमीन को काश्त योग्य उपजाऊ बनाने के लिये एस.बी.आई. शाखा मोमासर के प्रबंधक के समक्ष भूमि पर किसान क्रेडिट कार्ड बनाने हेतु रहन रखकर ऋण लेने का आवेदन किया। अप्रार्थी द्वारा केसीसी बनवाने हेतु सर्च रिपोर्ट करवाई। जो अपने नियुक्त विधि सलाहकार द्वारा सर्च रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद अप्रार्थी द्वारा राजस्व रिकाॅर्ड में बैंक के नाम भूमि रहन किये जाने का इन्द्राज किये जाने का दस्तावेज जारी किया गया। प्रार्थीगण ने 01 नवम्बर .2017 को भूमि रहन करने का इन्द्राज अप्रार्थी के यहां पेश किया। परंतु अप्रार्थी के द्वारा जमीन को रहन करने के बाद भी केसीसी ऋण स्वीकृत नहीं किया। जिस पर स्थाई लोक अदालत अध्यक्ष डाॅ॰ कमलदत्त एवं सदस्यगण श्री दयाराम गोदारा व श्रीमती मधुलिका आचार्य ने पक्षकारान की सुनवाई करते हुए अप्रार्थीगण को आदेश दिया कि अप्रार्थीगण प्रार्थीगण को केसीसी ऋण की सुविधा एक माह के भीतर उपलब्ध करवाये, साथ ही रूपये दो लाख की राशि, इतने लम्बे समय तक प्रार्थीगण की भूमि रहन रखी जाने के लिये और समय पर प्रार्थीगण को ऋण उपलब्ध नहीं करवाये जाने के कारण तथा प्रार्थीगण को कारित मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के लिये अप्रार्थीगण द्वारा प्रार्थीगण को अदा किया जावे व रूपये पांच हजार भी बतौर परिवाद व्यय भी अप्रार्थीगण प्रार्थीगण को अदा करेंगे। उक्त राशि अप्रार्थीगण द्वारा प्रार्थीगण को एक माह में अदा की जाये। यदि एक माह में ऋण स्वीकार किया जाकर ऋण प्रार्थीगण को उपलब्ध नहीं करवाया जाता है तो अप्रार्थीगण पर संयुक्त रूप से व पृथकः-पृथकः एक हजार रूपये प्रतिदिन बतौर क्षतिपूर्ति देय होगा एवं उक्त राशि दो लाख पांच हजार रूपये की राशि भी एक माह में अदा नहीं होती है तो उस पर अप्रार्थीगण द्वारा 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ताअदायगी ब्याज भी देय होगा। बैंक द्वारा उक्त राशि जो दो लाख पांच हजार रूपये अदा की जायेगी वह राशि एवं उसके पश्चात् एक हजार रूपये प्रतिदिन के जो अदा करने होंगे वह समस्त राशि संबंधित तत्कालीन अधिकारी एवं अन्य दोषी अधिकारियों से वसूली जायेगी साथ ही बैंक तत्कालीन अधिकारी एवं अन्य दोषी अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही भी अमल मंे ले। उक्त प्रकरण में प्रार्थी अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने पैरवी की।
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ऋणी को दो लाख पांच हजार रूपये क्षतिपूर्ति राशि व बैंक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश,
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