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सेवा करना हमारा धर्म है
गंगाषहर। गंगाषहर शान्ति निकेतन जहाँ रूग्ण व वृद्ध साध्वियों का स्थिरवास होता है उन सभी साध्वीवृन्दों कि सेवा करने के लिए हर वृष आचार्य श्री महाश्रमण जी के द्वारा चाकरी के लिए नई साध्वीवृन्दो को भेजा जाता है। इस वर्ष शासनश्री साध्वीश्री अमितप्रभाजी व साध्वीश्री गुप्तिप्रभाजी को सेवा के लिए भेजा गया है। साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी मोमासर से विहार करके यहां गंगाषहर हंसा गेस्ट हाऊस में पधारी। साध्वीश्री का वहां से रैली के माध्यम से गंगाषहर शान्तिनिकेतन में मंगल प्रवेष हुआ। साध्वीश्री गुप्तिप्रभा के मंगलप्रवेष पर भव्य स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शासनश्री साध्वीश्री मधुरेखा जी ने साध्वीश्री गुप्तिप्रभाजी के स्वागत में फरमाया कि तेरापंथ धर्मसंघ का प्राणतत्व है सेवा। स्वयं आचार्य श्री भिक्षु ने प्रारम्भिक काल में सन्तो की बहुत सेवा कि और सन्तो को प्रतिक्षण यह प्रषिक्षण प्रदान करवाते कि सेवा करना हमारा धर्म है। शारीरिक और मानसिक दोनो प्रकार कि सेवा जिस व्यक्ति की होती है उसे बड़ी समाधी की प्राप्ति होती है। साध्वीश्री मुधरेखाजी व साध्वी विषद्प्रज्ञा जी ने अपनी चाकरी का दायित्व साध्वीश्री गुप्तिप्रभाजी को हस्तान्तरित किया।
साध्वी विषद्प्रज्ञा जी ने स्वागत में फरमाया कि हम यहाँ चाकरी के लिए जब पधारे थे तो हमें यहाँ पर 14 अमूल्य रत्न सौंपे गये थे आज आपका यहाँ चाकरी के लिए आगमन हुआ है तो आज उन 14 अमूल्य रत्नों को हम आपको सम्भला रहे है आप इन रत्नों की पूरे तन मन से सेवा करना। साध्वीश्री जी ने कहा कि हमारा धर्मसंघ सेवाभावी धर्मसंघ है इस धर्मसंघ में सेवा की भावना एक विषिष्ट भावना होती है। साध्वीश्री ने सेवा के लाभ की सम्पूर्ण जानकारी रूप से बताई।
साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी ने फरमाया कि आज हम अपने मायतों के पास आये है हम आज बहुत ही भाव विभोर है। तेरापंथ धर्मसंघ एक अनुठा धर्मसंघ है। इस संघ में जो व्यक्ति आता है। वह देखता है कि यहाँ किसी भी व्यक्ति की महात्वाकांक्षा को प्रश्रय नहीं दिया जाता है यहाँ पर विद्वता के साथ समर्पण और सेवा जमी हुई है। यहाँ जब कोई किसी भी बात की अवहेलना करता है तो उसकी उपेक्षा नहीं करते अपितु उसको समझाया जाता है। साध्वीश्री जी ने बड़ी ही उत्साहपूर्णक चाकरी के दायित्व को ग्रहण किया।
शान्ति निकेतन में विराजित साध्वीवृन्दो ने सामुहिक गीतिका के माध्यम से साध्वीश्री का स्वागत किया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष डॉ.पूनमचन्द तातेड, आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़, तेरापंथ युवक परिषद् के विनीत बोथरा, ने साध्वीश्री जी के स्वागत में अपनी उद्गार व्यक्त किए। अणुव्रत समिति के मनोज छाजेड़, तेरापंथ महिला मण्डल, तेरापंथ कन्या मण्डल, ने गीतिका के माध्यम से साध्वीश्री जी का स्वागत किया। कार्यक्रम में तेरापंथ धर्मसंघ के अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थी। कार्यक्रम का कुषल संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री अमरचन्द सोनी व उपाध्यक्ष किषन बैद ने किया।


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