*खबरों में बीकानेर 🎤*
नींव हिलाने पर तुली हवा, सत्ता कहती है सबखैरियत
बीकानेर 5 सितंबर 2018। राजस्थान मेंमुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गौरव यात्रा पर हैं। यात्रा केपहुंचने से पहले संभाग-संभाग सब खैरियत केगीत गंुजाए जा रहे हैं। छह सितंबर से बीकानेरसंभाग के लोगों को खैरियत ही नहीं बल्किविकास के शिखर छूते कार्यों की नजीर मिलनेलगेगी। लेकिन बीकानेर संभाग में ही बरसों सेलंबित योजनाओं, समस्याओं, विकास कार्योंबाबत कोई बात, कोई नेता नहीं करेगा। जनताअथवा मीडिया द्वारा किसी ऐसी योजना के बारे मेंपूछे जाने पर नेता लोग बगलें झांकेंगे अथवासंबंधित विभाग अधिकारी से सरकारी कागजीकार्रवाई की जानकारी लेकर मुस्कराते हुए जवाबमें विफलताओं का जिम्मा0 पिछली सरकार परउंडेल देंगे। यात्रा के दौरान यह जानने की भी उन्हेंफुर्सत नहीं होगी कि प्रत्येक संभाग में उनके दलकी सरकार ने ‘‘कथित रूप से जो अभूतपूर्व’’विकास कार्य करने के दावे किए हैं उसके अलावाभी एक दुनिया है जिसमें संभाग के लोग सरकारकी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। बीकानेर में यूंतो पानी, बिजली, सफाई, रोटी-कपड़ा-मकान,रोजगार आदि मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ीसमस्याओं का अंबार है लेकिन रेलवे फाटकों परहर रोज घंटों अटक जाने वाले शहर के विकास केलिए अनोखी योजनाएं बनाने वाले भी इसीसत्ताधारी दल में हैं। व्यापारी वर्ग, जागरूक जन,बीकानेर के हितेषी जन प्रतिनिधि ऐसी योजनाएलिवेटेड रोड को होने से नकार नहीं पाते।दरअसल यह एक ऐसी योजना है जिस पर लगनेवाला समय इसके बरसों पहले से तय विकल्प परकार्य करने के समय से बहुत अधिक लगने वालाहै। एलिवेटेड रोड बनने की स्थिति में संबंधित क्षेत्रसे बीकानेर के करीब 100 छोटे बड़े बाजार उजड़जाएंगे। एक लाख लोगों की रोजी-रोटी छिनजाएगी। इसी से व्यथित भाजपा के वरिष्ठ नेतासोमदत्त श्रीमाली ने पांच सितंबर 18 कोव्यापारियों की प्रेसवार्ता में एलिवेटेड रोड केविरोध में यहां तक कह दिया कि कभी इस रोडका शिलान्यास हुआ तो वे शिलान्यास स्थल परअपना शरीर समर्पित कर देंगे। व्यापारियों नेघोषणा की है कि वे गौरव यात्रा का विरोध नहींकरेंगे, यात्रा में गतिरोध भी नहीं बनेंगे लेकिनअपनी दुकानें बंद कर उन पर काले झंडेफहराएंगे। बंद दुकानांे के आगे सरकार कोसद्बुद्धि के लिए कीर्तन करेंगे। ऐसे विरोध के स्वरभाजपा आलाकमान तक जरूर पहुंचे होंगे लेकिनसत्ता के रथ पर भ्रमण करने वाली हस्तियों नेकभी यह स्वीकार नहीं किया कि उनके सत्ताकालमें कोई समस्या पनपी है। रथ वही रहता है, सत्ताबदल जाती है। समस्याएं बढ़ती जाती है।राजनीतिक सच्चे सलाहकार रथासीन को चेतातेहैं, हवा विपरीत हो चली है। किंतु सत्तामद में चूरकुर्सीधारी मानते हैं कि सत्ता की नींव भला हवाओंसे हिलती है ? विरोध के स्वर भला जनता गुंजातीहै ? लेकिन चुनावी अनुभवों के होते हुए भीविपरीत हवा को नहीं पहचानने की भूल जबकुर्सी खिसका देती है तभी परास्त स्वरों में कहाजाता है, हम अपने दल की हार के कारणांे काविश्लेषण करेंगे। लेकिन, यह भी सच है कि तबतक सब खैरियत नहीं रहती। हवा नींव हिला चुकी होती है। ---- मोहन थानवी


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