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पाकिस्तान की ओर बहने वाला अतिरिक्त जल अब इस जलाशय को भरेगा RD 750 एस्केप रिजर्वायर परियोजना से बीकानेर-नागौर को मिलेगा पेयजल संबल : मुख्य अभियंता विवेक कुमार गोयल


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पाकिस्तान की ओर बहने वाला अतिरिक्त जल अब इस जलाशय को भरेगा
RD 750 एस्केप रिजर्वायर परियोजना से बीकानेर-नागौर को मिलेगा पेयजल संबल : मुख्य अभियंता विवेक कुमार गोयल




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पाकिस्तान की ओर बहने वाला अतिरिक्त जल अब इस जलाशय को भरेगा
RD 750 एस्केप रिजर्वायर परियोजना से बीकानेर-नागौर को मिलेगा पेयजल संबल : मुख्य अभियंता विवेक कुमार गोयल

बीकानेर। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत RD 750 पर विकसित किए जा रहे एस्केप रिजर्वायर से क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। मुख्य अभियंता विवेक कुमार गोयल ने बताया कि यह परियोजना जल जीवन मिशन के तहत अतिरिक्त जल के वैज्ञानिक भंडारण और उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने बताया कि बीकानेर जिले की पूगल तहसील के अमरपुरा गांव के पास मुख्य नहर की बुर्जी संख्या 750 पर इस जलाशय का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना को राज्य एवं केंद्र सरकार की 50-50 प्रतिशत भागीदारी से कुल 1274.26 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति 28 फरवरी 2022 को प्रदान की गई थी। इस योजना के अंतर्गत चार जलाशयों (बुर्जी संख्या 507, 750, 1121 एवं 1356) का विकास किया जा रहा है।

मुख्य अभियंता गोयल के अनुसार वर्षा ऋतु में पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त जल का अब इस जलाशय में भंडारण किया जाएगा, जिससे जल जीवन मिशन के तहत बीकानेर, नागौर एवं चूरू जिलों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही इससे जुड़ी दांतौर वितरिका को भी लाभ मिलेगा।

उन्होंने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य मेसर्स वीपीएल एससीसीएल (जेवी) द्वारा 300.66 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। कार्यादेश 14 जुलाई 2022 को जारी होने के बाद 24 जुलाई 2022 से निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। जलाशय का पूर्ण भराव स्तर 171.62 मीटर, भराव क्षमता 3000 एमसीएफटी, गहराई 9.62 मीटर एवं परिधि 24 किलोमीटर निर्धारित की गई है।

गोयल ने बताया कि वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगति पर है और 15 जुलाई 2026 तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके बाद जल संग्रहण शुरू किया जाएगा। अब तक परियोजना पर 189.83 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जबकि कुल अनुमानित लागत 351 करोड़ रुपये है।

मुख्य अभियंता ने कहा कि यह परियोजना न केवल अतिरिक्त जल के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि क्षेत्र में दीर्घकालिक पेयजल संकट के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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