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बीकानेर : हवा को गूंथ माला बनाई, साहित्यिक नवाचार में बताया प्रकृति और कविता का घनिष्ठ संबंध

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— Mohan Thanvi / खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 (@Mohanthanvi) February 23, 2025
बीकानेर : हवा को गूंथ माला बनाई, साहित्यिक नवाचार में बताया प्रकृति और कविता का घनिष्ठ संबंध
बीकानेर 28 फरवरी, 2025 शुक्रवार
बीकानेर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है । साहित्य के क्षेत्र में नवाचार भी किए जाते रहे हैं। नवाचारों की इस कड़ी में प्रज्ञालय और राजस्थानी युवा लेखक संघ का नाम अग्रिम पंक्ति में शुमार है। इन संस्थाओं ने इस मर्तबा अपनी मासिक श्रृंखला के तहत प्रकृति पर केन्द्रित ‘काव्य रंगत-शब्द संगत‘ की दसवीं कड़ी का आयोजन लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन नत्थूसर गेट बाहर किया । अपनी परंपरा के अनुसार आयोजन से पूर्व में ही आमंत्रित बहुभाषीय कवियों को विषय आवंटित कर दिया था और यह विषय था हवा। कार्यक्रम का आनंद तब और बढ़ गया जब कवियों ने अपनी रचनाओं में हवा को गूंथकर एक से बढ़कर एक महकती काव्य मालाएं प्रस्तुत की। इस वृहद हवामाला की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने की। उन्होंने प्रकृति और कविता का संबंध अत्यंत घनिष्ठ बताते हुए कहा - प्रकृति अपने विभिन्न रूपात्मक विराट प्रसार को लेकर मनुष्य के हृदय पर अनेक संस्कार डाला करती है, जिससे प्राकृतिक सौन्दर्य के प्रति मनुष्य का सहज आकर्षण हो जाता है, उसकी अभिव्यक्ति साहित्य में प्रकृति के संश्लिष्ट चित्रण का निरूपण करके की जाती है।
काव्य माला में हवा को पिरोते हुए रंगा ने अपनी कविता-कैया करे हवा रौ रूख समझ लेवै बो मिनख/पण म्हैं नीं मानूं/असल में हवा रौ रूख बदल देवै बो हुवै मिनख....शब्दमाला में हवा का मानवीयकरण करते हुए नए संदर्भ एवं नव बोध के साथ कविता प्रस्तुत की।
हवामाला की खुशबू बढ़ाते वरिष्ठ कवियत्री श्रीमती इन्द्रा व्यास ने-वायु तु ना बिगाड़े स्वरूप थांरौ..., वरिष्ठ शायर क़ासिम बीकानेरी ने- झूम कर प्यारे तराने/जब सुनाती है हवा..., वरिष्ठ कवि कैलाश टाक ने-मैं हवा हूं/जैसा तू चलाएगा..., वरिष्ठ हास्य कवि बाबूलाल छंगाणी ने-जब तक यह है/तब तक ही दम है..., वरिष्ठ कवि डॉ. नृसिंह बिन्नाणी ने चेहरे पर/हवाएं उड जाती/झूठे लोगों की... रचनाएं प्रस्तुत की।
युवा कवि गिरिराज पारीक यशस्वी हर्ष इंजि. ऋषि कुमार तंवर हरिकशन व्यास ने भी सस्वर हवामाला पेश कर वरिष्ठजनों से सराहना प्राप्त की।
प्रारंभ में सभी का स्वागत वरिष्ठ इतिहासविद् डॉ. फारूख चौहान ने किया।
इस कार्यक्रम के साक्षी बने भवानी सिंह, पुनीत कुमार रंगा, हरिनारायण आचार्य, अशोक शर्मा, नवनीत व्यास, सुनील व्यास, कार्तिक मोदी, अख्तर अली, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, कन्हैयालाल पंवार, बसंत सांखला।
कार्यक्रम संचालक वरिष्ठ हास्य कवि बाबूलाल छंगाणी ने घोषणा की कि मार्च में प्रस्तावित अगली ग्यारहवीं कड़ी में ‘आग’ पर रचनाएं प्रस्तुत की जाएंगी।
सभी आगंतुकों का आभार युवा संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने ज्ञापित किया।




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