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बीकानेर में अमूल्य ज्ञान सम्पदा को सरकार का प्रश्रय नहीं
बीकानेर। बीकानेर में सार्वजनिक महत्व की ज्ञान सम्पदा सरकारी प्रश्रय के अभाव में नष्ट हो रही है। इसमें अनूप संस्क्रत लाइब्रेरी, शहर का डिविजनल पुस्तकालय, अमर चन्द नाहटा पुस्तकालय, संग्रहित पांडुलिपियां के प्रति सरकार के सकारात्मक भूमिका की जरूरत है अन्यथा यह दुर्लभ ज्ञान नष्ट हो जाएगा। यह बात बीकानेर के साहित्यकार, कलाकार, पुरावेत्ता और संस्कृति सरोकारों से जुड़े वक्ताओं ने कहीं। वेटरनरी के एबीजी सभागार में शनिवार को कला, साहित्य, संस्कृति, पुरातत्व और पर्यटन विकास पर संवाद कार्यक्रम में विद्वानों का समागम हुआ।। साहित्यकार मालचंद तिवारी ने ज्ञान के स्त्रोत पर सरकारों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा राज्य व केंद्र सरकार अकादमियों में अध्यक्ष की नियुक्तिया करें उनके विधान में सामयिक और व्यवहारिक बदलाव करें। पुरस्कारों की राशि सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाएं। ऊँट उत्सव के स्वरूप को बदला जाए।। कमल रँगा ने ज्ञान की पूरा सम्पदा सादुर्ल शोध संस्थान, भारतीय प्राच्य विद्या मंदिर आदि संस्थानों को फिर से चालू करने की जरूरत बताई। बीकानेर साहित्य व नाट्य विधा की राजधानी है। संस्क्रति और पुरातन का वैभव है। यहां लोक साहित्य अकादमी के गठन की जरूरत है। प्राच्य शोध संस्थान के ....गोयल कला संस्कृति क्षेत्र में कितने लोग काम करते हैं। इसके आंकड़े नहीं है। ऐसे लोगों को स्कॉलरशिप मिले और अर्थ से जोड़ा जाए।। डॉ मदन सैनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति समन्वय वादी, आध्यात्मिक केंद्रित और अहिंसावादी है। राज्य का प्रश्रय नहीं होने से संस्क्रति, शोध और कला को संरक्षण देने वाले केंद्र बन्द या निष्क्रिय है। इससे कला, साहित्य और संस्कृति की क्षति हो रही है। राजस्थानी साहित्य संस्कृति अकादमी के सचिव शरद केवलिया ने कहा कि नवोदित लेखकों को प्रोत्साहन दिया जाए। लेखकों के व्याख्यान रिकार्ड किया जाए व डॉक्यूमेंट्री बनाए जाए। लेखकों की रचनाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाए। लिटरेचर फेटिवल, फूड फेस्टिवल, नाइट टुरिज्म, पर्यटन के लिए धार्मिक-सांस्कृतिक सर्किल बनाया जाए। डॉ वी एस आचार्य ने बीकानेर की ज्ञान धरोहर को संरक्षित करने के लिए बंद शोध संस्थान चालू करने का मुद्दा उठाया। संवाद कार्यक्रम में डॉ सुमन्त व्यास, पीयुष कुमार नाहटा, डॉ मो. फारूक, बुनियाद जहिन, डॉ रेणुका व्यास, सुधा आचार्य, जावेद हसन, हनीफ उस्ता, डॉ एस बी पुरोहित, डॉ नन्द लाल वर्मा, अनन्त वीर जैन, डॉ राकेश किराडू, अजय पुरोहित समेत कई वक्ताओं ने विचार रखे। बीकानेर में कला, साहित्य, संस्कृति, पुरातत्व और पर्यटन विकास के लिए माल चन्द तिवारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।
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