✒️खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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बीकानेर के संचार तन्त्र की रीढ़ हो रही प्रभावित, 1 फरवरी को बीएसएनएल के कार्यालय हो जाएंगे खाली ?
भारत संचार निगम
लिमिटेड यानी बीएसएनएल में 31
जनवरी 2020 को 78569
कर्मचारी/अधिकारी वीआरएस ले
रहे हैं और अब तक निगम के
उच्चाधिकारियों ने अन्य कोई
व्यवस्था नहीं बनाई है जिससे 1
फरवरी 2020 से निगम के
दैनिक कार्यों में व्यवधान आने की
पूरी आशंका है।
बीकानेर।
हैलो...हैलो
■ 31 जन. को 78569
कर्मचारी-अधिकारी ले
रहे वीआरएस
■ आज 119 सदस्यों का
किया सम्मान
■ अभी तक प्रबंधन ने
कोई नई व्यवस्था नहीं
की है
■ ऐसे में कर्मचारी नहीं
होंगे तो छोटे छोटे
फाल्ट भी शायद ही
ठीक हो पाए
आपको चौंकाने वाली जानकारी दे रहे हैं कि
31 जनवरी 2020 को बीकानेर जिले में
119 कर्मचारी/अधिकारी वीआरएस ले रहे हैं
और बीकानेर के संचार तन्त्र की रीढ़ इसका
प्रभाव भी आने वाले दिनों में झेलेगी। प्रसाशन
द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है,
वीआरएस लेने वाले अधिकांश कर्मचारी उ ार
प्रदेश से हैं, बीकानेर जिले से बाहर के हैं वे
यहां से जायेंगें तो इस बड़ी भारी व्यवस्था का
संचालन कौन करेगा? इस यक्ष प्रश्न का उ ार
किसी के पास नहीं है।
विभागीय सूत्रों ने यह जानकारी
देते हुए बताया कि हालांकि दूरभाष/टेलीफोन
लाइनों के रख रखाव के लिये प्राइवेट टेंडर
किये जा रहें हैं लेकिन उनको आमन्त्रित करने,
ठेकेदार को काम आवंटित करने में दो से तीन
महीने का समय लगना एक सामान्य प्रक्रिया
है, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता। ऐसे
में पूरी आशंका है कि निगम के रोजमर्रा के
कार्यों पर असर पड़ेगा और उसका खामियाजा
अंतत: बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को
भुगतना पड़ सकता है।
बीएसएनएलईयू के प्रदेश अध्यक्ष कमलसिंह गोहिल बताते हैं कि निगम के उच्चाधिकारियों
के इसी रवैये के कारण आज भारत संचार निगम लिमिटेड की यह हालत बनी। -
क्योंकि ये
बीएसएनएल में कार्यरत उच्चाधिकारी आई टी एस हैं और ये केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं न
कि बीएसएनएल के इसलिए बीएसएनएल के घाटे-फायदे का इन्हें कोई लेना देना नहीं हैं।
गोहिल साफ कहते हैं कि समय रहते ये सरकारी नुमाइंदे सरकार को सही सलाह देते रहते
तो आज बीएसएनएल में वीआरएस की जरूरत नहीं पड़ती। समय पर 4 जी स्पेक्ट्रम लाने
की जिम्मेदारी अधिकारियों की थी लेकिन इन्होंने कभी सरकार को प्रस्ताव ही नहीं भेजा।
उच्चाधिकारी
जो बीएसएनएल
के कर्मचारी
नहीं हैं
यह पढ़कर शायद आपकी भी छाती गर्व से फूल उठेगी कि
बीएसएनएलईयू यूनियन के जिला सचिव गुलाम हुसैन ने सभी साथियों से
यूनियन कार्यालय में यह संकल्प दिलवाया कि हालांकि प्रशासन इस
मामले में कोई पहल नहीं कर रहा है मगर हमें तैयार रहना है ताकि बिना
किसी पारितोषिक के हम बीएसएनएल को बीकानेर में सेवाएं देते रहने में
अपना सहयोग दे सकें।
बिना तन वाह काम करने को मुस्तैद हैं बीएसएनएल के वीर सिपाही
नॉन एग्जीक्यूटिव यूनियन द्वारा बरसों से आंदोलन करने पर सरकार चेती लेकिन उपाय
निजीकरण के रास्ते ले जाकर पहले बीएसएनएल के कर्मचारियों में भय व्याप्त किया कि
बीएसएनएल को बंद करेंगें और बाद में वीआरएस ले आये जिसके फलस्वरूप ज्यादा बचे
सेवाकाल के कर्मचारी आर्थिक नुकसान होने के बाद भी अनिश्चितता के वातावरण के कारण
वीआरएस लेने को मजबूर हुए। कमलसिंह गोहिल ने बताया कि रेलवे की तरह सेवा निवृ िा
लेने वाले कर्मचारियों से जब तक प्राइवेट ठेका प्रथा प्रार भ न हो तब तक काम करने की
व्यवस्था करनी चाहिए थी, मगऱ प्रशासन द्वारा कोई प्राथमिक पहल नहीं की गई ऐसी स्थिति
में ज्यादा बारिश आने से या अन्य एजेंसियों द्वारा कोई निर्माण कार्य के चलते ऑप्टिकल
फाइबर या अंडर ग्राउंड केबल क्षतिग्रस्त कर दी गई तो इसको दुरुस्त करने की कौनसी
वैकल्पिक व्यवस्था है यह पूछने पर बीएसएनएल का प्रशासन मौन धारण कर लेता है या अपने
बचाव में हाथ झटक लेता है। कुछ ऊंचे दिमाग वाले अफसर तो यहां तक कह देते हैं कि
कर्मचारी अपने आप आकर बीएसएनएल के हित में इसका संचालन कर देंगे। जबकि जमीनी
हालात ये होगी कि अंडर ग्राउंड केबल के केबल जोइन्टर नहीं रहेंगे। बीएसएनएल के प्रत्येक
इलाके, मोहल्ले, कॉलोनी के पिलर/ केबिनेट से कहां कहां लाईने बिछी है ये बतलाने वाले
कर्मचारी अधिकारी ही नहीं रहेंगे तो हालात चिंता जनक होने स्वाभाविक है।
(साभार - दैनिक युगपक्ष 31 जनवरी 2020 )
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बीकानेर के संचार तन्त्र की रीढ़ हो रही प्रभावित, 1 फरवरी को बीएसएनएल के कार्यालय हो जाएंगे खाली ?
भारत संचार निगम
लिमिटेड यानी बीएसएनएल में 31
जनवरी 2020 को 78569
कर्मचारी/अधिकारी वीआरएस ले
रहे हैं और अब तक निगम के
उच्चाधिकारियों ने अन्य कोई
व्यवस्था नहीं बनाई है जिससे 1
फरवरी 2020 से निगम के
दैनिक कार्यों में व्यवधान आने की
पूरी आशंका है।
बीकानेर।
हैलो...हैलो
■ 31 जन. को 78569
कर्मचारी-अधिकारी ले
रहे वीआरएस
■ आज 119 सदस्यों का
किया सम्मान
■ अभी तक प्रबंधन ने
कोई नई व्यवस्था नहीं
की है
■ ऐसे में कर्मचारी नहीं
होंगे तो छोटे छोटे
फाल्ट भी शायद ही
ठीक हो पाए
आपको चौंकाने वाली जानकारी दे रहे हैं कि
31 जनवरी 2020 को बीकानेर जिले में
119 कर्मचारी/अधिकारी वीआरएस ले रहे हैं
और बीकानेर के संचार तन्त्र की रीढ़ इसका
प्रभाव भी आने वाले दिनों में झेलेगी। प्रसाशन
द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है,
वीआरएस लेने वाले अधिकांश कर्मचारी उ ार
प्रदेश से हैं, बीकानेर जिले से बाहर के हैं वे
यहां से जायेंगें तो इस बड़ी भारी व्यवस्था का
संचालन कौन करेगा? इस यक्ष प्रश्न का उ ार
किसी के पास नहीं है।
विभागीय सूत्रों ने यह जानकारी
देते हुए बताया कि हालांकि दूरभाष/टेलीफोन
लाइनों के रख रखाव के लिये प्राइवेट टेंडर
किये जा रहें हैं लेकिन उनको आमन्त्रित करने,
ठेकेदार को काम आवंटित करने में दो से तीन
महीने का समय लगना एक सामान्य प्रक्रिया
है, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता। ऐसे
में पूरी आशंका है कि निगम के रोजमर्रा के
कार्यों पर असर पड़ेगा और उसका खामियाजा
अंतत: बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को
भुगतना पड़ सकता है।
बीएसएनएलईयू के प्रदेश अध्यक्ष कमलसिंह गोहिल बताते हैं कि निगम के उच्चाधिकारियों
के इसी रवैये के कारण आज भारत संचार निगम लिमिटेड की यह हालत बनी। -
क्योंकि ये
बीएसएनएल में कार्यरत उच्चाधिकारी आई टी एस हैं और ये केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं न
कि बीएसएनएल के इसलिए बीएसएनएल के घाटे-फायदे का इन्हें कोई लेना देना नहीं हैं।
गोहिल साफ कहते हैं कि समय रहते ये सरकारी नुमाइंदे सरकार को सही सलाह देते रहते
तो आज बीएसएनएल में वीआरएस की जरूरत नहीं पड़ती। समय पर 4 जी स्पेक्ट्रम लाने
की जिम्मेदारी अधिकारियों की थी लेकिन इन्होंने कभी सरकार को प्रस्ताव ही नहीं भेजा।
उच्चाधिकारी
जो बीएसएनएल
के कर्मचारी
नहीं हैं
यह पढ़कर शायद आपकी भी छाती गर्व से फूल उठेगी कि
बीएसएनएलईयू यूनियन के जिला सचिव गुलाम हुसैन ने सभी साथियों से
यूनियन कार्यालय में यह संकल्प दिलवाया कि हालांकि प्रशासन इस
मामले में कोई पहल नहीं कर रहा है मगर हमें तैयार रहना है ताकि बिना
किसी पारितोषिक के हम बीएसएनएल को बीकानेर में सेवाएं देते रहने में
अपना सहयोग दे सकें।
बिना तन वाह काम करने को मुस्तैद हैं बीएसएनएल के वीर सिपाही
नॉन एग्जीक्यूटिव यूनियन द्वारा बरसों से आंदोलन करने पर सरकार चेती लेकिन उपाय
निजीकरण के रास्ते ले जाकर पहले बीएसएनएल के कर्मचारियों में भय व्याप्त किया कि
बीएसएनएल को बंद करेंगें और बाद में वीआरएस ले आये जिसके फलस्वरूप ज्यादा बचे
सेवाकाल के कर्मचारी आर्थिक नुकसान होने के बाद भी अनिश्चितता के वातावरण के कारण
वीआरएस लेने को मजबूर हुए। कमलसिंह गोहिल ने बताया कि रेलवे की तरह सेवा निवृ िा
लेने वाले कर्मचारियों से जब तक प्राइवेट ठेका प्रथा प्रार भ न हो तब तक काम करने की
व्यवस्था करनी चाहिए थी, मगऱ प्रशासन द्वारा कोई प्राथमिक पहल नहीं की गई ऐसी स्थिति
में ज्यादा बारिश आने से या अन्य एजेंसियों द्वारा कोई निर्माण कार्य के चलते ऑप्टिकल
फाइबर या अंडर ग्राउंड केबल क्षतिग्रस्त कर दी गई तो इसको दुरुस्त करने की कौनसी
वैकल्पिक व्यवस्था है यह पूछने पर बीएसएनएल का प्रशासन मौन धारण कर लेता है या अपने
बचाव में हाथ झटक लेता है। कुछ ऊंचे दिमाग वाले अफसर तो यहां तक कह देते हैं कि
कर्मचारी अपने आप आकर बीएसएनएल के हित में इसका संचालन कर देंगे। जबकि जमीनी
हालात ये होगी कि अंडर ग्राउंड केबल के केबल जोइन्टर नहीं रहेंगे। बीएसएनएल के प्रत्येक
इलाके, मोहल्ले, कॉलोनी के पिलर/ केबिनेट से कहां कहां लाईने बिछी है ये बतलाने वाले
कर्मचारी अधिकारी ही नहीं रहेंगे तो हालात चिंता जनक होने स्वाभाविक है।
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