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अणुव्रत का मतलब है आत्मानुशासन का विकास: मुनिश्री सुमतिकुमार
गंगाशहर। अणुव्रत मानव जीवन की न्यूनतम आचार-सहिंता है। मनुष्य मात्र को नैतिकता और मानवता की और बढ़ने की प्रेरणा देता है। ये विचार तेरापंथ भवन में मुनिश्री समुतिकुमार जी ने पर्युषण महापर्व के पांचवे दिन अणुव्रत चेतना दिवस के उपलक्ष्य में व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि अणुव्रत का मतलब है सहनशीलता का विकास, आत्मानुशासन का विकास, आचरण शुद्धि का विकास। भगवान महावीर ने साधु के लिए महाव्रत और गृहस्थ के लिए अणुव्रत का मार्ग बताया जिसमें मुख्य रूप से पांच अणुव्रत का अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह का उल्लेख है जो कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए है। मुनिश्री ने कहा कि व्रत का अर्थ है त्याग और त्याग का बड़ा महत्व है जो व्रत ग्रहण करता है उसकी संकल्प शक्ति बढ़ती है। श्रावक समाज को जागरूकता के साथ अणुव्रतों का पालन करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि अणुव्रत युगीन समस्याओं का समाधायक है। आदमी को अणुव्रत के माध्यम से अपने जीवन को संयमित बनाने का प्रयास करना चाहिए। आचार्य तुलसी ने ग्रन्थ और पंथ से ऊपर उठकर ऐसे आन्दोलन का सूत्रपात किया जो मानवता का पथ प्रशस्त करता है।
मंत्री अमरचन्द सोनी ने बताया कि सम्पूर्ण श्रावक समाज में पुर्यषण पर्व को लेकर भारी उत्साह है। तेरापंथ भवन में ‘‘णमोकार मंत्र’’ का अखण्ड जप जारी है। दोपहर में शासनश्री साध्वीश्री अमितकुमारी जी एवं साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी के सान्निध्य में व्याख्यान तथा रात्रिकालीन कार्यक्रम चल रहे हैं। सोनी ने बताया कि सांयकालीन प्रतिक्रमण में तेरापंथ भवन, शान्ति निकेतन एवं नैतिकता का शक्तिपीठ पर श्रद्धालुगण प्रतिक्रमण में शामिल होते हैं।



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