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आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी समारोह का हुआ शुभारम्भ, ‘महाप्रज्ञ के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धा होगी’
गंगाशहर। आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी समारोह का शुभारम्भ गंगाशहर स्थित शान्ति निकेतन में रविवार सुबह 9 बजे आयोजित किया गया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह को मुनिश्री सुमतिकुमार जी, शासनश्री साध्वीश्री अमितप्रभा जी एवं साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी ने सान्निध्य प्रदान किया। मुनिश्री सुमतिकुमारजी ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि आचार्य महाप्रज्ञ का गंगाशहर से विशेष रिश्ता रहा। आचार्य महाप्रज्ञ ने वैराग्य काल में पूज्य कालूगणी के दर्शन गंगाशहर में ही किये थे। आचार्य महाप्रज्ञ को ‘‘महाप्रज्ञ अलंकरण’’ गंगाशहर में आचार्य तुलसी द्वारा प्रदान किया गया। महाप्रज्ञजी ने अपने जीवन काल की सर्वाधिक 21 दीक्षाएं एक साथ गंगाशहर में दी थी। मुनिश्री देवार्यकुमार जी व मुनिश्री आदित्य कुमार जी ने भी समारोह को सम्बोधित किया।
शासनश्री साध्वीश्री अमितप्रभा जी ने कहा कि गुरुदेव आचार्य तुलसी के शब्दों में महाप्रज्ञ विद्या, विनय, विवेक की त्रिवेणी के कारण ही तेरापंथ के तीर्थ बने है। साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ प्रबल, पुण्यवान ऋषि थे। उनके द्वारा बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा होगी। साध्वीवृन्द द्वारा सामूहिक गीतिका का संगान किया गया। समारोह में तेरापंथ महिला मंडल, कन्या मण्डल की 100 से ज्यादा बहनों ने सामूहिक गीतिका से अभिव्यक्ति दी। समारोह के दौरान ज्ञानशाला के बच्चों द्वारा संवाद, नाटिका प्रस्तुत की गई।
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद्, तेरापंथ किशोर मण्डल, अणुव्रत समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने श्रद्धाभिव्यक्ति दी गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन किशन बैद ने किया।
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आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी समारोह का हुआ शुभारम्भ, ‘महाप्रज्ञ के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धा होगी’
गंगाशहर। आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी समारोह का शुभारम्भ गंगाशहर स्थित शान्ति निकेतन में रविवार सुबह 9 बजे आयोजित किया गया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह को मुनिश्री सुमतिकुमार जी, शासनश्री साध्वीश्री अमितप्रभा जी एवं साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी ने सान्निध्य प्रदान किया। मुनिश्री सुमतिकुमारजी ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि आचार्य महाप्रज्ञ का गंगाशहर से विशेष रिश्ता रहा। आचार्य महाप्रज्ञ ने वैराग्य काल में पूज्य कालूगणी के दर्शन गंगाशहर में ही किये थे। आचार्य महाप्रज्ञ को ‘‘महाप्रज्ञ अलंकरण’’ गंगाशहर में आचार्य तुलसी द्वारा प्रदान किया गया। महाप्रज्ञजी ने अपने जीवन काल की सर्वाधिक 21 दीक्षाएं एक साथ गंगाशहर में दी थी। मुनिश्री देवार्यकुमार जी व मुनिश्री आदित्य कुमार जी ने भी समारोह को सम्बोधित किया।
शासनश्री साध्वीश्री अमितप्रभा जी ने कहा कि गुरुदेव आचार्य तुलसी के शब्दों में महाप्रज्ञ विद्या, विनय, विवेक की त्रिवेणी के कारण ही तेरापंथ के तीर्थ बने है। साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ प्रबल, पुण्यवान ऋषि थे। उनके द्वारा बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा होगी। साध्वीवृन्द द्वारा सामूहिक गीतिका का संगान किया गया। समारोह में तेरापंथ महिला मंडल, कन्या मण्डल की 100 से ज्यादा बहनों ने सामूहिक गीतिका से अभिव्यक्ति दी। समारोह के दौरान ज्ञानशाला के बच्चों द्वारा संवाद, नाटिका प्रस्तुत की गई।
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद्, तेरापंथ किशोर मण्डल, अणुव्रत समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने श्रद्धाभिव्यक्ति दी गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन किशन बैद ने किया।
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