खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
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चौपाल की गूंज ... राज आपणो देश
आपणो इरी रक्षा आपां ने करणी है
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. ✍️ *फोटो लॉन* 📷🎬📸☑️*********🙏👍🙏 खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️ ... 👇👇👇👇👇👇👇
चौपाल की गूंज ... राज आपणो देश
आपणो इरी रक्षा आपां ने करणी है
स्वास्थ्य एवंसा हित्य संगम के राष्ट्रीय कवि चौपाल की
188 वीं कड़ी प्रो. श्री ब्रह्माराम चौधरी के
मु य आतिथ्य में हुई। वरिष्ठ रंगकर्मी बी
एल नवी, विशिष्ट अतिथि रामेश्वर मेहचा
मंच पर शोभायमान हुए। गणतंत्र दिवस
पर देश भक्ति से ओत प्रोत रचनाएं
सुनाई। संस्था के संस्थापक नेमीचंद
गहलोत ने सदकर्माे को अभी करो, मरने
से तुम कभी मत डरो तथा आदर्श सुवाक्य
कहें। अध्यक्ष रामेश्वर द्वारकादास बाड़मेरा
साधक ने राम नाम सत्य है मृत्यु पर रचना
सुनाई। तुलसीराम ने राज आपणो देश
आपणो इरी रक्षा आपा ने करणी है।
किशननाथ खरपतवार ने गले में मादळियों
राखो, चालो सावळ चेत। कैलाश टाक ने
रोटी के नाम पे या या काम हो गया।
बांसुरी वादक राजू लखोटिया ने जन गन
मन राष्ट्रीय गान पर बांसुरी वादन किया।
राजकुमार ग्रोवर ने भारत मां के वीर छुपे
है... मातृ भूमि पर मर मिट कर भारत
माता को किया प्रणाम, श्रीमती कृष्णा वर्मा
ने मैं हूं रक्षक मातृ भूमि का फौजी मेरा
नाम, सीमाओं की रक्षा करके दे दूं अपनी
जान। मु य अतिथि बी एल नवीन ने टूटे
हुए वाबों ने हमको ये सिखाया है तथा
1960 में खेले नाटक जमाना के नाटक
के संवाद सुनाए। डॉ. प्रकाश वर्मा ने एक
है अपनी जमीं एक है अपना गगन,
आवाज दो। डॉ. ब्रह्माराम चौधरी ने
अध्यक्षीय स बोधन तथा गणतंत्र के बारे
में विलक्षण जानकारी दी, सरदार अली
पडि़हार ने ऐ सिपाई सदा ही जुंजो है सीमा
रेखा रे मायं सिपाई देश रो धणी धरती मां
रो रिणी, फजल मोह मद ने जो जिस को
पुकारेगा, गरदन वहीं उतारेगा सुनाई।
ज बार बीकाणवी, महबूब अली,
अजीतराज, मेहराजूदीन, महेश चुघ,
सिराजुदीन, शकील गौरी, शिवप्रकाश
सोलंकी, हनुमंत गौड़ ने भी काव्य पाठ
किया।
चौपाल की गूंज ... राज आपणो देश
आपणो इरी रक्षा आपां ने करणी है
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चौपाल की गूंज ... राज आपणो देश
आपणो इरी रक्षा आपां ने करणी है
स्वास्थ्य एवंसा हित्य संगम के राष्ट्रीय कवि चौपाल की
188 वीं कड़ी प्रो. श्री ब्रह्माराम चौधरी के
मु य आतिथ्य में हुई। वरिष्ठ रंगकर्मी बी
एल नवी, विशिष्ट अतिथि रामेश्वर मेहचा
मंच पर शोभायमान हुए। गणतंत्र दिवस
पर देश भक्ति से ओत प्रोत रचनाएं
सुनाई। संस्था के संस्थापक नेमीचंद
गहलोत ने सदकर्माे को अभी करो, मरने
से तुम कभी मत डरो तथा आदर्श सुवाक्य
कहें। अध्यक्ष रामेश्वर द्वारकादास बाड़मेरा
साधक ने राम नाम सत्य है मृत्यु पर रचना
सुनाई। तुलसीराम ने राज आपणो देश
आपणो इरी रक्षा आपा ने करणी है।
किशननाथ खरपतवार ने गले में मादळियों
राखो, चालो सावळ चेत। कैलाश टाक ने
रोटी के नाम पे या या काम हो गया।
बांसुरी वादक राजू लखोटिया ने जन गन
मन राष्ट्रीय गान पर बांसुरी वादन किया।
राजकुमार ग्रोवर ने भारत मां के वीर छुपे
है... मातृ भूमि पर मर मिट कर भारत
माता को किया प्रणाम, श्रीमती कृष्णा वर्मा
ने मैं हूं रक्षक मातृ भूमि का फौजी मेरा
नाम, सीमाओं की रक्षा करके दे दूं अपनी
जान। मु य अतिथि बी एल नवीन ने टूटे
हुए वाबों ने हमको ये सिखाया है तथा
1960 में खेले नाटक जमाना के नाटक
के संवाद सुनाए। डॉ. प्रकाश वर्मा ने एक
है अपनी जमीं एक है अपना गगन,
आवाज दो। डॉ. ब्रह्माराम चौधरी ने
अध्यक्षीय स बोधन तथा गणतंत्र के बारे
में विलक्षण जानकारी दी, सरदार अली
पडि़हार ने ऐ सिपाई सदा ही जुंजो है सीमा
रेखा रे मायं सिपाई देश रो धणी धरती मां
रो रिणी, फजल मोह मद ने जो जिस को
पुकारेगा, गरदन वहीं उतारेगा सुनाई।
ज बार बीकाणवी, महबूब अली,
अजीतराज, मेहराजूदीन, महेश चुघ,
सिराजुदीन, शकील गौरी, शिवप्रकाश
सोलंकी, हनुमंत गौड़ ने भी काव्य पाठ
किया।


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